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Srinagar News: अत्यंत कठिन परिस्थितियों में पर्यावरण संरक्षण का मॉडल बन रहा सियाचिन

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सियाचिन क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन करते कर्मचारी। - फोटो : leh news
लेह। दुनिया के सबसे ऊंचे युद्धक्षेत्र के रूप में प्रसिद्ध सियाचिन क्षेत्र, पृथ्वी की सबसे कठोर जीवन परिस्थितियों के बावजूद पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के लिए तेजी से पहचान बना रहा है। शून्य से 40 डिग्री नीचे तक गिरने वाले तापमान और सीमित बुनियादी ढांचे के बीच नागरिक प्रशासन, वैज्ञानिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों की समन्वित पहल मानव गतिविधियों और पारिस्थितिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन स्थापित कर रही है।
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क्षेत्र में पर्यावरणीय कार्यक्रमों का उद्देश्य दुर्लभ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, पारिस्थितिक क्षरण को कम करना और उच्च हिमालयी शीत मरुस्थलीय भूभाग के अनुरूप सतत प्रथाओं को बढ़ावा देना है। अपशिष्ट प्रबंधन को प्रमुख प्राथमिकता दी गई है, जिसके तहत ग्लेशियरों और आबादी वाले क्षेत्रों से सूखा कचरा एकत्र कर केंद्रीकृत इकाइयों तक पहुंचाया जाता है, जहां उसका पृथक्करण और उपचार किया जाता है। पुनर्चक्रित प्लास्टिक का उपयोग पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद बनाने में किया जा रहा है, जबकि गीले कचरे से तैयार खाद ग्रीनहाउस खेती में सहायक बन रही है।
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जल संरक्षण परियोजनाओं का भी उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। 100 से अधिक जल-संग्रहण संरचनाओं ( पारंपरिक तालाबों का पुनर्जीवन और हिमपिघलन संग्रह प्रणालियां) ने सामुदायिक जल सुरक्षा को मजबूत किया है। बोरवेल, समर्पित भंडारण टैंक और रिवर्स ऑस्मोसिस जल के पुनः उपयोग जैसी व्यवस्थाएं जल-संकटग्रस्त क्षेत्र में न्यूनतम बर्बादी सुनिश्चित करती हैं।
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कड़ाके की ठंड में स्वच्छता चुनौतियों से निपटने के लिए 225 से अधिक सेप्टिक टैंक और सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया गया है, जिससे स्वच्छता में सुधार हुआ है और आसपास के जल स्रोत सुरक्षित रहे हैं। वहीं, ग्रीनहाउस, माइक्रो-ग्रीन केबिन और ट्रेंच फार्मिंग के माध्यम से संरक्षित खेती ने ताजा सब्जियों के उत्पादन को संभव बनाया है तथा उच्च हिमालयी शोध संस्थानों के सहयोग से जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है।

नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग से डीजल जनरेटर पर निर्भरता लगातार कम हो रही है। एक मेगावाट की संयुक्त क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र और एलईडी प्रकाश व्यवस्था अपनाने से ईंधन खपत और कार्बन उत्सर्जन में उल्लेखनीय कमी आई है, जो अत्यंत प्रतिकूल जलवायु में भी स्वच्छ ऊर्जा की व्यवहार्यता को दर्शाता है।

भौगोलिक सीमाओं के बावजूद पौधरोपण प्रयासों के तहत अब तक 4,200 से अधिक पेड़ लगाए गए हैं। साथ ही पहले अनुपयोगी भूमि को स्मारकों और सार्वजनिक स्थलों में परिवर्तित किया गया है, जबकि प्रमुख स्थानों पर मृदा अपरदन-रोधी उपायों ने पर्यावरण को और मजबूत बनाया है।

नियमित जागरूकता अभियान, स्कूलों की भागीदारी और सामुदायिक कार्यक्रमों के माध्यम से निवासियों में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित की जा रही है।

इन पहलों के परिणामस्वरूप नुब्रा घाटी और सियाचिन क्षेत्र में जल सुरक्षा बेहतर हुई है, पर्यावरणीय प्रभाव कम हुआ है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार आया है। यह परिवर्तन दर्शाता है कि नवाचार और सतत प्रयासों के माध्यम से पृथ्वी के सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में भी पर्यावरण संरक्षण और मानव सहनशीलता साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।


समुदाय के सदस्यों ने पर्यावरण संरक्षण पहलों में सहयोग के लिए फायर एंड फ्यूरी कॉर्प्स के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। राष्ट्रीय सुरक्षा के अलावा, लेह स्थित इस कॉर्प्स का लद्दाख के विकास में योगदान व्यापक रूप से सराहनीय माना जा रहा है।
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