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Srinagar News: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने तीसरे सीआईआई जेएंडके हेल्थ कॉन्क्लेव का किया उद्घाटन
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श्रीनगर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शनिवार को भारतीय उद्योग परिसंघ द्वारा आयोजित तीसरे ''''जम्मू-कश्मीर हेल्थ कॉन्क्लेव'''' का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कभी भी, कहीं भी स्वास्थ्य सेवाएं के विजन को रेखांकित करते हुए कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों तक सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सरकार का मुख्य उद्देश्य है।
उपराज्यपाल ने कहा कि टेलीमेडिसिन, ड्रोन से दवाओं और रक्त की आपूर्ति, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड चेन सिस्टम स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय करेंगे। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा टेली-कंसल्टेशन के सफल प्रयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक से भौगोलिक बाधाएं समाप्त हो रही हैं। उन्होंने हितधारकों से जम्मू-कश्मीर को स्वास्थ्य क्षेत्र में कम लागत और उच्च प्रभाव वाले नवाचारों की ''''प्रयोगशाला'''' बनाने का आह्वान किया।
बीमारी के इलाज से आगे बढ़कर रोकथाम पर ध्यान जरूरी
वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के बढ़ते खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए मनोज सिन्हा ने कहा कि अब केवल बीमारी के इलाज तक सीमित रहने के बजाय रोकथाम, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर प्राथमिक उपचार को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, बेहतर स्टाफिंग और प्रशासनिक बोझ को कम करने पर भी जोर दिया।
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हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक सुधार
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में हुए विस्तार का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में 2 नए एम्स और 10 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं।
2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट सहित बोन एंड जॉइंट और बाल चिकित्सा जैसे विशेष अस्पताल शुरू किए गए हैं।
52 नर्सिंग कॉलेज, 23 पैरामेडिकल कॉलेज और 5 फार्मेसी कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जो चिकित्सा शिक्षा और रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर बल
मनोज सिन्हा ने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के लिए सरकार और निजी क्षेत्र का तालमेल जरूरी है। उन्होंने निजी अस्पतालों और उद्योगों से राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर सीआईआई जेएंडके के चेयरमैन इक़राम अली शफी, उजाला सिग्नस के संस्थापक निदेशक डॉ. शुचिन बजाज, डिप्टी कमिश्नर श्रीनगर अक्षय लाबरू, एसएसपी श्रीनगर डॉ. जी.वी. संदीप चक्रवर्ती और स्वास्थ्य क्षेत्र के कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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उपराज्यपाल ने कहा कि टेलीमेडिसिन, ड्रोन से दवाओं और रक्त की आपूर्ति, एआई आधारित डायग्नोस्टिक्स और सौर ऊर्जा से चलने वाले कोल्ड चेन सिस्टम स्वास्थ्य क्षेत्र का भविष्य तय करेंगे। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा टेली-कंसल्टेशन के सफल प्रयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक से भौगोलिक बाधाएं समाप्त हो रही हैं। उन्होंने हितधारकों से जम्मू-कश्मीर को स्वास्थ्य क्षेत्र में कम लागत और उच्च प्रभाव वाले नवाचारों की ''''प्रयोगशाला'''' बनाने का आह्वान किया।
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बीमारी के इलाज से आगे बढ़कर रोकथाम पर ध्यान जरूरी
वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के बढ़ते खर्च पर चिंता व्यक्त करते हुए मनोज सिन्हा ने कहा कि अब केवल बीमारी के इलाज तक सीमित रहने के बजाय रोकथाम, नियमित स्क्रीनिंग और समय पर प्राथमिक उपचार को प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने स्वास्थ्यकर्मियों के मानसिक स्वास्थ्य, बेहतर स्टाफिंग और प्रशासनिक बोझ को कम करने पर भी जोर दिया।
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हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर में ऐतिहासिक सुधार
उपराज्यपाल ने जम्मू-कश्मीर में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे में हुए विस्तार का ब्योरा साझा करते हुए बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में 2 नए एम्स और 10 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए गए हैं।
2 स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट सहित बोन एंड जॉइंट और बाल चिकित्सा जैसे विशेष अस्पताल शुरू किए गए हैं।
52 नर्सिंग कॉलेज, 23 पैरामेडिकल कॉलेज और 5 फार्मेसी कॉलेज स्थापित किए गए हैं, जो चिकित्सा शिक्षा और रोजगार के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं।
सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की साझेदारी पर बल
मनोज सिन्हा ने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली के लिए सरकार और निजी क्षेत्र का तालमेल जरूरी है। उन्होंने निजी अस्पतालों और उद्योगों से राष्ट्र निर्माण के इस कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
इस अवसर पर सीआईआई जेएंडके के चेयरमैन इक़राम अली शफी, उजाला सिग्नस के संस्थापक निदेशक डॉ. शुचिन बजाज, डिप्टी कमिश्नर श्रीनगर अक्षय लाबरू, एसएसपी श्रीनगर डॉ. जी.वी. संदीप चक्रवर्ती और स्वास्थ्य क्षेत्र के कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।