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Srinagar News: हाईकोर्ट ने जेकेएसपीएससी को 42 सिविल जज शॉर्टलिस्टिंग पर दियाा नोटिस
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने जम्मू-कश्मीर पब्लिक सर्विस कमीशन (जेकेएसपीएससी) को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 25 अभ्यर्थियों की तरफ से दायर याचिका पर जारी किया गया है।
इसमें अधीनस्थ न्यायपालिका में 42 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए हालिया शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने जेकेएसपीएससी को नोटिस जारी किया, जिसे कमीशन के स्टैंडिंग काउंसिल एडवोकेट शाह आमिर ने स्वीकार कर लिया।
कोर्ट ने साक्षात्कार की निर्धारित तिथि को देखते हुए मामले की तात्कालिकता पर विचार करते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए दो मार्च को सूचीबद्ध किया है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका में अभ्यर्थियों ने पूरी चयन प्रक्रिया सहित 20 जनवरी के रिजल्ट नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग पब्लिक सर्विस (कंडक्ट ऑफ एग्जामिनेशन) रूल्स, 2022 तथा जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस (ज्यूडिशियल) रिक्रूटमेंट रूल्स, 1967 के निर्धारित मानदंडों के विपरीत की गई।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में “कानूनी अमान्यता” आई है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के तहत समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करती है।
उन्होंने कमीशन द्वारा जारी इंटरव्यू नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें 17 फरवरी से मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोचे) शुरू करने की तिथि तय की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, क्योंकि देरी से याचिका व्यर्थ हो सकती है।
उनका कहना है कि उचित मॉडरेशन प्रक्रिया न अपनाने से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में एकरूपता और सुसंगतता प्रभावित होती है। याचिकाकर्ताओं ने रिजल्ट नोटिफिकेशन और चयन प्रक्रिया को रद्द करने, साक्षात्कार आगे बढ़ाने पर रोक लगाने तथा लागू परीक्षा नियमों के सख्त अनुपालन में चयन प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही उचित मूल्यांकन और मॉडरेशन के बाद इंटर से मेरिट के अनुसार श्रेणी-वार चयन सूची पुनः तैयार करने की भी प्रार्थना की गई है।
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इसमें अधीनस्थ न्यायपालिका में 42 सिविल जज (जूनियर डिवीजन) पदों के लिए हालिया शॉर्टलिस्टिंग प्रक्रिया को चुनौती दी गई है। जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने जेकेएसपीएससी को नोटिस जारी किया, जिसे कमीशन के स्टैंडिंग काउंसिल एडवोकेट शाह आमिर ने स्वीकार कर लिया।
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कोर्ट ने साक्षात्कार की निर्धारित तिथि को देखते हुए मामले की तात्कालिकता पर विचार करते हुए इसे आगे की सुनवाई के लिए दो मार्च को सूचीबद्ध किया है। संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत दायर याचिका में अभ्यर्थियों ने पूरी चयन प्रक्रिया सहित 20 जनवरी के रिजल्ट नोटिफिकेशन को रद्द करने की मांग की है। उनका आरोप है कि मूल्यांकन और शॉर्टलिस्टिंग पब्लिक सर्विस (कंडक्ट ऑफ एग्जामिनेशन) रूल्स, 2022 तथा जम्मू-कश्मीर सिविल सर्विस (ज्यूडिशियल) रिक्रूटमेंट रूल्स, 1967 के निर्धारित मानदंडों के विपरीत की गई।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि चयन प्रक्रिया में “कानूनी अमान्यता” आई है और यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 एवं 16 के तहत समानता तथा सार्वजनिक रोजगार में समान अवसर के संवैधानिक गारंटी का उल्लंघन करती है।
उन्होंने कमीशन द्वारा जारी इंटरव्यू नोटिस को भी चुनौती दी है, जिसमें 17 फरवरी से मौखिक परीक्षा (वाइवा-वोचे) शुरू करने की तिथि तय की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की, क्योंकि देरी से याचिका व्यर्थ हो सकती है।
उनका कहना है कि उचित मॉडरेशन प्रक्रिया न अपनाने से उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में एकरूपता और सुसंगतता प्रभावित होती है। याचिकाकर्ताओं ने रिजल्ट नोटिफिकेशन और चयन प्रक्रिया को रद्द करने, साक्षात्कार आगे बढ़ाने पर रोक लगाने तथा लागू परीक्षा नियमों के सख्त अनुपालन में चयन प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही उचित मूल्यांकन और मॉडरेशन के बाद इंटर से मेरिट के अनुसार श्रेणी-वार चयन सूची पुनः तैयार करने की भी प्रार्थना की गई है।