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Srinagar News: बारामुला के जेहनपोरा में 2000 साल पुराने बौद्ध स्थल पर दूसरे चरण की खुदाई शुरू
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बारामुला। उत्तरी कश्मीर के बारामुला जिले के जेहनपोरा में स्थित लगभग 2,000 साल पुराने बौद्ध पुरातात्विक स्थल पर दूसरे चरण का उत्खनन कार्य शुरू हो गया है। अधिकारियों के अनुसार शुरू हुआ यह उत्खनन अभियान करीब 100 दिनों तक चलेगा, जिससे क्षेत्र के प्राचीन इतिहास और सभ्यता से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि पहले चरण की खुदाई के दौरान मिले अवशेष हैरान करने वाले और बेहद दिलचस्प थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे के काम से इस क्षेत्र में फली-फूली प्राचीन सभ्यता के बारे में और अधिक विस्तृत जानकारी मिलेगी।
पुरालेख, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने कश्मीर विश्वविद्यालय के सहयोग से जेहनपोरा में पुरातात्विक खुदाई के लिए पिछले साल एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। जरूरी अनुमतियां मिलने के बाद पिछले साल नवंबर में पहले चरण की खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन कड़ाके की ठंड और मौसम के मिजाज को देखते हुए काम को बीच में ही रोकना पड़ा था।
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मुख्य सचिव ने बताया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी इस स्थान के संदर्भ मिलते हैं और अब अधिकारी ऐतिहासिक विवरणों तथा खुदाई से मिल रहे पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। स्थल से मिले प्राचीन ढांचों, कलाकृतियों और सामग्रियों से उस दौर के लोगों के औजारों, निर्माण सामग्री और जीवनशैली के बारे में अहम सुराग मिले हैं।
अटल डुल्लू ने स्पष्ट किया कि उत्खनन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए किया जा रहा है। बरामद सामग्री की उम्र और प्रामाणिकता जांचने के लिए कार्बन डेटिंग सहित कई वैज्ञानिक परीक्षण कराए जा रहे हैं। इस फील्डवर्क में कश्मीर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के छात्र भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।
पूरे पुरातात्विक स्थल के संपूर्ण उत्खनन में लगभग पांच साल तक का समय लग सकता है, जो यहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहर के विशाल दायरे को दर्शाता है। यह खोज आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक संपदा को समृद्ध करने के साथ-साथ बौद्ध और पुरातात्विक विरासत में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र भी बन सकती है।
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जम्मू-कश्मीर के मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने इस परियोजना को लेकर उत्साह जताते हुए कहा कि पहले चरण की खुदाई के दौरान मिले अवशेष हैरान करने वाले और बेहद दिलचस्प थे। उन्होंने उम्मीद जताई कि आगे के काम से इस क्षेत्र में फली-फूली प्राचीन सभ्यता के बारे में और अधिक विस्तृत जानकारी मिलेगी।
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पुरालेख, पुरातत्व एवं संग्रहालय निदेशालय ने कश्मीर विश्वविद्यालय के सहयोग से जेहनपोरा में पुरातात्विक खुदाई के लिए पिछले साल एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। जरूरी अनुमतियां मिलने के बाद पिछले साल नवंबर में पहले चरण की खुदाई शुरू की गई थी, लेकिन कड़ाके की ठंड और मौसम के मिजाज को देखते हुए काम को बीच में ही रोकना पड़ा था।
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मुख्य सचिव ने बताया कि ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी इस स्थान के संदर्भ मिलते हैं और अब अधिकारी ऐतिहासिक विवरणों तथा खुदाई से मिल रहे पुरातात्विक साक्ष्यों के बीच कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं। स्थल से मिले प्राचीन ढांचों, कलाकृतियों और सामग्रियों से उस दौर के लोगों के औजारों, निर्माण सामग्री और जीवनशैली के बारे में अहम सुराग मिले हैं।
अटल डुल्लू ने स्पष्ट किया कि उत्खनन आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों के जरिए किया जा रहा है। बरामद सामग्री की उम्र और प्रामाणिकता जांचने के लिए कार्बन डेटिंग सहित कई वैज्ञानिक परीक्षण कराए जा रहे हैं। इस फील्डवर्क में कश्मीर विश्वविद्यालय के पुरातत्व विभाग के छात्र भी सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिससे उन्हें व्यावहारिक अनुभव भी मिल रहा है।
पूरे पुरातात्विक स्थल के संपूर्ण उत्खनन में लगभग पांच साल तक का समय लग सकता है, जो यहां मौजूद ऐतिहासिक धरोहर के विशाल दायरे को दर्शाता है। यह खोज आने वाले समय में जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक संपदा को समृद्ध करने के साथ-साथ बौद्ध और पुरातात्विक विरासत में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र भी बन सकती है।