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Srinagar News: एम्स अवंतीपोरा फैकल्टी भर्ती में जम्मू-कश्मीर के डॉक्टरों को नहीं मिल रही एनओसी
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में निर्माणाधीन अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) अवंतीपोरा में फैकल्टी पदों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट (यूडीएफ) भारत की जम्मू-कश्मीर इकाई ने केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा को एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन का आरोप है कि जम्मू-कश्मीर के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में कार्यरत पात्र डॉक्टरों को इस भर्ती में आवेदन करने के लिए आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी नहीं किया जा रहा है, जिससे वे आवेदन करने से वंचित हो रहे हैं।
यूडीएफ ने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक अनुचित प्रशासनिक बाधा करार दिया है। यूडीएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और जम्मू कश्मीर प्रभारी डॉ मीर वसीम ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में वर्षों से जनता को अपनी सेवाएं दे रहे कई डॉक्टर निर्धारित सेवा और शैक्षणिक पात्रता पूरी करते हैं। इसके बावजूद उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय डॉक्टर किसी भी प्रकार की विशेष छूट या तरजीह की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे केवल भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर योग्यता और मेरिट के आधार पर अन्य अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का वैध अवसर चाहते हैं। संगठन का आरोप है कि बिना कोई ठोस और नियम-आधारित कारण बताए डॉक्टरों को एनओसी देने से रोकना पूरी तरह से नौकरशाही की मनमानी है। इस तरह का रवैया योग्य स्थानीय चिकित्सकों को अपने ही क्षेत्र के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान में सेवा करने के अवसर से दूर कर रहा है।
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डॉ वसीम ने ज्ञापन में इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम कर रहे डॉक्टरों के मनोबल पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्षों से कठिन परिस्थितियों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने वाले चिकित्सकों को करियर में आगे बढ़ने के वैध अवसरों से रोकना उचित नहीं है। इससे स्थानीय डॉक्टरों और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से आने वाले उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल भी असमान हो जाएगा।
यूडीएफ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि वे इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाएं ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। संगठन ने मांग की है कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले सभी डॉक्टरों को बिना किसी मनमानी प्रशासनिक रोकटोक के आवेदन करने की अनुमति दी जाए।
एम्स अवंतीपोरा आने वाले समय में कश्मीर घाटी में सुपर-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाने जा रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स फ्रंट का कहना है कि नियमों और मेरिट के सिद्धांतों का पालन करते हुए स्थानीय प्रतिभाओं को भी इस महत्वपूर्ण संस्थान का हिस्सा बनने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।
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यूडीएफ ने स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे एक अनुचित प्रशासनिक बाधा करार दिया है। यूडीएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और जम्मू कश्मीर प्रभारी डॉ मीर वसीम ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में वर्षों से जनता को अपनी सेवाएं दे रहे कई डॉक्टर निर्धारित सेवा और शैक्षणिक पात्रता पूरी करते हैं। इसके बावजूद उन्हें इस प्रतिष्ठित संस्थान में आवेदन करने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
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उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय डॉक्टर किसी भी प्रकार की विशेष छूट या तरजीह की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे केवल भर्ती प्रक्रिया में शामिल होकर योग्यता और मेरिट के आधार पर अन्य अभ्यर्थियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने का वैध अवसर चाहते हैं। संगठन का आरोप है कि बिना कोई ठोस और नियम-आधारित कारण बताए डॉक्टरों को एनओसी देने से रोकना पूरी तरह से नौकरशाही की मनमानी है। इस तरह का रवैया योग्य स्थानीय चिकित्सकों को अपने ही क्षेत्र के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थान में सेवा करने के अवसर से दूर कर रहा है।
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डॉ वसीम ने ज्ञापन में इस बात पर भी गंभीर चिंता जताई है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में काम कर रहे डॉक्टरों के मनोबल पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वर्षों से कठिन परिस्थितियों में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को संभालने वाले चिकित्सकों को करियर में आगे बढ़ने के वैध अवसरों से रोकना उचित नहीं है। इससे स्थानीय डॉक्टरों और केंद्र शासित प्रदेश के बाहर से आने वाले उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा का माहौल भी असमान हो जाएगा।
यूडीएफ ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि वे इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच करवाएं ताकि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे। संगठन ने मांग की है कि निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले सभी डॉक्टरों को बिना किसी मनमानी प्रशासनिक रोकटोक के आवेदन करने की अनुमति दी जाए।
एम्स अवंतीपोरा आने वाले समय में कश्मीर घाटी में सुपर-स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं, उच्च स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को मजबूत करने में केंद्रीय भूमिका निभाने जा रहा है। ऐसे में डॉक्टर्स फ्रंट का कहना है कि नियमों और मेरिट के सिद्धांतों का पालन करते हुए स्थानीय प्रतिभाओं को भी इस महत्वपूर्ण संस्थान का हिस्सा बनने का पूरा अवसर मिलना चाहिए।