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शोध केवल शोध-पत्रों तक सीमित न रहे, समाज और स्वास्थ्य सुधार में दिखे वैज्ञानिक अनुसंधानों का असर : डॉ. श्रीनिवास
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श्रीनगर। नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने शुक्रवार को सीएसआईआर-भारतीय समवेत औषध संस्थान, श्रीनगर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार (इनोवेशन), उद्यमिता और सामाजिक विकास से जुड़ी पहलों की व्यापक समीक्षा की। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने काम को केवल रिसर्च पेपर्स और साइटेशन इंडेक्स तक सीमित न रखें, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने और व्यापक सामाजिक लाभ के लिए अनुसंधान करें।
उनके साथ नीति आयोग के आर्थिक सलाहकार श्री सुभाष चंद्र मीणा, उप सलाहकार डॉ. मुनिराजू एसबी तथा अटल इनोवेशन मिशन की प्रोग्राम लीड सुमैया यूसुफ भी मौजूद थीं। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों और स्टार्टअप्स से सीधा संवाद किया।
दौरे के दौरान डॉ. श्रीनिवास ने संस्थान के श्रीनगर परिसर स्थित ''''एआईसी-आईआईआईएम बायोइनोवेशन फाउंडेशन'''' का निरीक्षण किया और इनक्यूबेशन गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र द्वारा एसेंशियल ऑयल के वैल्यू एडिशन, औषधीय मशरूम, किण्वन (फर्मेंटेशन) आधारित उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े उद्यमों को दिए जा रहे प्रोत्साहन की सराहना की। उन्होंने वेलनेस और हेल्थकेयर क्षेत्र में काम कर रहे युवा उद्यमियों से बातचीत कर उनके नवाचारों को परखा और बाजार से जुड़ाव मजबूत करने की सलाह दी।
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लैब से बाजार तक पहुंचे वैज्ञानिक अनुसंधान
संस्थान के वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि संस्थान फाइटोकेमिकल्स, फ्लोरीकल्चर और औषधीय पौधों के अलावा पैंक्रियाटिक कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अल्जाइमर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के निदान पर सराहनीय काम कर रहा है। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने काम को केवल रिसर्च पेपर्स और साइटेशन इंडेक्स तक सीमित न रखें, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने और व्यापक सामाजिक लाभ के लिए अनुसंधान करें। उन्होंने बुनियादी शोध से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और व्यावसायीकरण (कमर्शियलाइजेशन) के लिए डॉक्टरों व विभिन्न हितधारकों के साथ मजबूत तालमेल पर बल दिया। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि नीति आयोग वैज्ञानिक विकास और सहयोग को बढ़ावा देने में हर संभव सहायता करेगा।
कैनबिस व फाइटोफार्मास्युटिकल रिसर्च की चुनौतियों पर हुई चर्चा
सीएसआईआर-आईआईआईएम के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और अनुसंधान को तकनीक में बदलने की दिशा में किए जा रहे कार्यों का ब्योरा दिया। उन्होंने कैनबिस (भांग) तथा अन्य फाइटोकेमिकल रिसर्च में आ रही अनुमतियों की देरी और देश में फाइटोफार्मास्युटिकल विनिर्माण सुविधाओं की आवश्यकता जैसी चुनौतियों से भी अवगत कराया। इस पर डॉ. श्रीनिवास ने इन मुद्दों के उचित स्तर पर समाधान का आश्वासन दिया।
फ्लोरीकल्चर और एरोमा मिशन की प्रगति साझा की
कार्यक्रम में डॉ. सौरभ सरन (वैज्ञानिक-एफ) ने टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर पर प्रस्तुति दी। वहीं, डॉ. शाहिद रसूल (वैज्ञानिक-ई) ने फ्लोरीकल्चर मिशन और डॉ. सुफला गुप्ता (वैज्ञानिक-एफ) ने एरोमा मिशन के तहत किसानों की आय बढ़ाने और सुगंधित फसलों के वैल्यू-एडिशन पर संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान और एआईसी-आईआईआईएम के सीईओ डॉ. शाहिद जिब्रान द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।
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उनके साथ नीति आयोग के आर्थिक सलाहकार श्री सुभाष चंद्र मीणा, उप सलाहकार डॉ. मुनिराजू एसबी तथा अटल इनोवेशन मिशन की प्रोग्राम लीड सुमैया यूसुफ भी मौजूद थीं। प्रतिनिधिमंडल ने संस्थान के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, अधिकारियों और स्टार्टअप्स से सीधा संवाद किया।
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दौरे के दौरान डॉ. श्रीनिवास ने संस्थान के श्रीनगर परिसर स्थित ''''एआईसी-आईआईआईएम बायोइनोवेशन फाउंडेशन'''' का निरीक्षण किया और इनक्यूबेशन गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने केंद्र द्वारा एसेंशियल ऑयल के वैल्यू एडिशन, औषधीय मशरूम, किण्वन (फर्मेंटेशन) आधारित उत्पादों और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े उद्यमों को दिए जा रहे प्रोत्साहन की सराहना की। उन्होंने वेलनेस और हेल्थकेयर क्षेत्र में काम कर रहे युवा उद्यमियों से बातचीत कर उनके नवाचारों को परखा और बाजार से जुड़ाव मजबूत करने की सलाह दी।
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लैब से बाजार तक पहुंचे वैज्ञानिक अनुसंधान
संस्थान के वैज्ञानिकों और युवा शोधकर्ताओं को संबोधित करते हुए डॉ. श्रीनिवास ने कहा कि संस्थान फाइटोकेमिकल्स, फ्लोरीकल्चर और औषधीय पौधों के अलावा पैंक्रियाटिक कैंसर, ब्रेस्ट कैंसर, अल्जाइमर और टीबी जैसी गंभीर बीमारियों के निदान पर सराहनीय काम कर रहा है। उन्होंने युवा वैज्ञानिकों से आह्वान किया कि वे अपने काम को केवल रिसर्च पेपर्स और साइटेशन इंडेक्स तक सीमित न रखें, बल्कि वास्तविक जीवन की समस्याओं को सुलझाने और व्यापक सामाजिक लाभ के लिए अनुसंधान करें। उन्होंने बुनियादी शोध से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और व्यावसायीकरण (कमर्शियलाइजेशन) के लिए डॉक्टरों व विभिन्न हितधारकों के साथ मजबूत तालमेल पर बल दिया। साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि नीति आयोग वैज्ञानिक विकास और सहयोग को बढ़ावा देने में हर संभव सहायता करेगा।
कैनबिस व फाइटोफार्मास्युटिकल रिसर्च की चुनौतियों पर हुई चर्चा
सीएसआईआर-आईआईआईएम के निदेशक डॉ. जबीर अहमद ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए संस्थान की उपलब्धियों और अनुसंधान को तकनीक में बदलने की दिशा में किए जा रहे कार्यों का ब्योरा दिया। उन्होंने कैनबिस (भांग) तथा अन्य फाइटोकेमिकल रिसर्च में आ रही अनुमतियों की देरी और देश में फाइटोफार्मास्युटिकल विनिर्माण सुविधाओं की आवश्यकता जैसी चुनौतियों से भी अवगत कराया। इस पर डॉ. श्रीनिवास ने इन मुद्दों के उचित स्तर पर समाधान का आश्वासन दिया।
फ्लोरीकल्चर और एरोमा मिशन की प्रगति साझा की
कार्यक्रम में डॉ. सौरभ सरन (वैज्ञानिक-एफ) ने टेक्नोलॉजी बिजनेस इनक्यूबेटर पर प्रस्तुति दी। वहीं, डॉ. शाहिद रसूल (वैज्ञानिक-ई) ने फ्लोरीकल्चर मिशन और डॉ. सुफला गुप्ता (वैज्ञानिक-एफ) ने एरोमा मिशन के तहत किसानों की आय बढ़ाने और सुगंधित फसलों के वैल्यू-एडिशन पर संस्थान द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। कार्यक्रम का समापन अतिथियों के सम्मान और एआईसी-आईआईआईएम के सीईओ डॉ. शाहिद जिब्रान द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ।