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Srinagar News: पत्रकारिता और कश्मीरियत पर हुई बात, बच्चों की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
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श्रीनगर के एसकेआईसीसी में लगे चिनार पुस्तक मेले में युवा। संवाद
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- चिनार पुस्तक महोत्सव के तीसरे अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला करेंगे संवाद
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित चिनार पुस्तक महोत्सव में बड़ी संख्या में शामिल लोगों का उत्साह देखने को मिला। घाटी के विद्यार्थियों, शिक्षकों, पुस्तक प्रेमियों एवं उनके परिवारों की उपस्थिति से महोत्सव परिसर गुलजार रहा। दूसरे दिन ऑथर्स कॉर्नर में साहित्यिक सत्रों की शुरुआत हुई, जबकि चिल्ड्रन्स कॉर्नर में कार्यशालाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
महोत्सव के साहित्यिक सत्रों का शुभारंभ बियॉन्ड द हेडलाइंस : जर्नलिज्म एज स्टोरीटेलिंग विषय पर आयोजित समूह चर्चा से हुआ। इसमें वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। जावेद मलिक द्वारा संचालित इस चर्चा में विद्यार्थियों को पत्रकारिता की दुनिया के खास और दुर्लभ तथ्यों की झलक मिली। विशेषज्ञों की बातचीत में यह समझने का अवसर मिला कि खबरें किस प्रकार लिखी और प्रस्तुत की जाती हैं।
शामिल वक्ताओं ने बदलते मीडिया परिदृश्य पर विचार साझा करते हुए प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती प्रकृति, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव तथा डिजिटल युग में पत्रकारों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
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ऑथर्स कॉर्नर में आयोजित एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र उर्दू, कश्मीरियत और साझा सांस्कृतिक परंपरा की समृद्ध विरासत विषय पर केंद्रित था। खुसरो फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयोजक डॉ. हफीज़ुर रहमान द्वारा संचालित इस चर्चा में कश्मीर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात विद्वान प्रो. मुफ्ती मुदस्सिर फारूकी तथा बिड़ला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की अकादमिक प्रमुख आसिया कादिर ने अपने विचार रखे।
कश्मीर की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए प्रो. फारूकी ने सूफी परंपरा, ऋषि परंपरा और घाटी की साझा सांस्कृतिक विरासत के गहरे संबंधों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि कश्मीर की साझा सांस्कृतिक चेतना सदियों से संवाद और पारस्परिक सम्मान की भावना से विकसित हुई है तथा विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द स्थापित करने में ऋषियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
भाषा की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए आसिया कादिर ने कहा कि अनेक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं को अन्य भारतीय भाषाओं के साथ-साथ उर्दू को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस सत्र में शामिल विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाषा, पहचान तथा कश्मीर की साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर सार्थक संवाद का लाभ लिया।
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में दूसरे दिन श्रीनगर तथा आसपास के क्षेत्रों से आए 2,500 से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक एवं मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया। सुबह के सत्र में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की आर्ट सफारी कार्यशाला के अंतर्गत बच्चों ने रंग-बिरंगी कागजी तितलियां बनाकर अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया।
महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार का मुख्य आकर्षण अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एसी के साथ विशेष संवाद सत्र होगा। इसके साथ ही बच्चों के लिए विविध कार्यशालाएं, साहित्यिक चर्चाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित चिनार पुस्तक महोत्सव में बड़ी संख्या में शामिल लोगों का उत्साह देखने को मिला। घाटी के विद्यार्थियों, शिक्षकों, पुस्तक प्रेमियों एवं उनके परिवारों की उपस्थिति से महोत्सव परिसर गुलजार रहा। दूसरे दिन ऑथर्स कॉर्नर में साहित्यिक सत्रों की शुरुआत हुई, जबकि चिल्ड्रन्स कॉर्नर में कार्यशालाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां लगातार आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
महोत्सव के साहित्यिक सत्रों का शुभारंभ बियॉन्ड द हेडलाइंस : जर्नलिज्म एज स्टोरीटेलिंग विषय पर आयोजित समूह चर्चा से हुआ। इसमें वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। जावेद मलिक द्वारा संचालित इस चर्चा में विद्यार्थियों को पत्रकारिता की दुनिया के खास और दुर्लभ तथ्यों की झलक मिली। विशेषज्ञों की बातचीत में यह समझने का अवसर मिला कि खबरें किस प्रकार लिखी और प्रस्तुत की जाती हैं।
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शामिल वक्ताओं ने बदलते मीडिया परिदृश्य पर विचार साझा करते हुए प्रिंट, टेलीविजन और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती प्रकृति, सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव तथा डिजिटल युग में पत्रकारों की जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की।
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ऑथर्स कॉर्नर में आयोजित एक अन्य महत्वपूर्ण सत्र उर्दू, कश्मीरियत और साझा सांस्कृतिक परंपरा की समृद्ध विरासत विषय पर केंद्रित था। खुसरो फाउंडेशन, नई दिल्ली के संयोजक डॉ. हफीज़ुर रहमान द्वारा संचालित इस चर्चा में कश्मीर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात विद्वान प्रो. मुफ्ती मुदस्सिर फारूकी तथा बिड़ला ओपन माइंड्स इंटरनेशनल स्कूल की अकादमिक प्रमुख आसिया कादिर ने अपने विचार रखे।
कश्मीर की समृद्ध सभ्यतागत विरासत पर प्रकाश डालते हुए प्रो. फारूकी ने सूफी परंपरा, ऋषि परंपरा और घाटी की साझा सांस्कृतिक विरासत के गहरे संबंधों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि कश्मीर की साझा सांस्कृतिक चेतना सदियों से संवाद और पारस्परिक सम्मान की भावना से विकसित हुई है तथा विभिन्न समुदायों के बीच सौहार्द स्थापित करने में ऋषियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
भाषा की भूमिका पर अपने विचार रखते हुए आसिया कादिर ने कहा कि अनेक भाषाओं का ज्ञान व्यक्ति के दृष्टिकोण को व्यापक बनाता है और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करता है। उन्होंने युवाओं को अन्य भारतीय भाषाओं के साथ-साथ उर्दू को भी अपनाने के लिए प्रेरित किया। इस सत्र में शामिल विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाषा, पहचान तथा कश्मीर की साझा सांस्कृतिक परंपराओं पर सार्थक संवाद का लाभ लिया।
चिल्ड्रन्स कॉर्नर में दूसरे दिन श्रीनगर तथा आसपास के क्षेत्रों से आए 2,500 से अधिक विद्यार्थियों ने विभिन्न रचनात्मक एवं मनोरंजक गतिविधियों में भाग लिया। सुबह के सत्र में राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की आर्ट सफारी कार्यशाला के अंतर्गत बच्चों ने रंग-बिरंगी कागजी तितलियां बनाकर अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया।
महोत्सव के तीसरे दिन सोमवार का मुख्य आकर्षण अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला, एसी के साथ विशेष संवाद सत्र होगा। इसके साथ ही बच्चों के लिए विविध कार्यशालाएं, साहित्यिक चर्चाएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी।