फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   jammu kashmir news

Srinagar News: ऑनलाइन धोखाधड़ी मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने से इन्कार

विज्ञापन
jammu kashmir news
हाईकोर्ट ने 8.73 लाख रुपये से ज्यादा के ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में दायर याचिका खारिज की, कहा - जांच जरूरी
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने 8.73 लाख रुपये से ज्यादा के लेनदेन वाले कथित सिम स्वैप और ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी के मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस संजय धर की खंडपीठ ने कहा कि इन आरोपों से गंभीर अपराध का पता चलता है और इनकी जांच जरूरी है।
यह याचिका यवनिका उर्फ अंशु ने दायर की थी, जिसमें निशात पुलिस स्टेशन श्रीनगर में दर्ज एफआईआर को चुनौती दी गई थी। यह एफआईआर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में दर्ज जीरो एफआईआर के श्रीनगर ट्रांसफर होने के बाद दर्ज की गई थी।
विज्ञापन

पीड़ित के पिता की शिकायत के अनुसार, ऋत्विक गुप्ता 24 अगस्त से 2 सितंबर 2024 के बीच ट्रेकिंग के लिए जम्मू-कश्मीर गए थे और अपर ब्रेन, निशात के हॉस्टल में रुके थे। आरोप है कि वहां रहने के दौरान याचिकाकर्ता और एक अन्य आरोपी ने पीड़ित से दोस्ती की और जब उसने कुछ देर के लिए अपना मोबाइल फोन बिना निगरानी के छोड़ दिया तो उन्होंने उसका सिम कार्ड बदलकर दूसरा प्रीपेड जियो सिम लगा दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि आरोपियों ने पीड़ित के असली सिम कार्ड का इस्तेमाल कर वन-टाइम पासवर्ड जेनरेट किए, जिससे वे उसके बैंक खातों से 8,73,661 रुपये निकाल लिए। उन पर पीड़ित की पहचान का इस्तेमाल कर क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और लोन के लिए आवेदन करने का भी आरोप है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि एफआईआर एक मनगढ़ंत और विरोधाभासी कहानी पर आधारित थी और इसमें किसी अपराध के होने का पता नहीं चलता था।
याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर आरोपों को सही माना जाए तो उनसे साफ पता चलता है कि बीएनएस और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट के तहत संज्ञेय अपराध हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि आरोप सच हैं या झूठ, यह जांच का विषय है, न कि एफआईआर को रद्द करने की कार्यवाही में तय करने का मामला।

कोर्ट ने कहा, जब यह साफ हो जाए कि जिस एफआईआर को चुनौती दी गई है, उसमें संज्ञेय अपराध होने की बात कही गई है तो जांच एजेंसी का यह कानूनी कर्तव्य है कि वह मामले की जांच करे। कोर्ट जांच एजेंसी को उसका कानूनी कर्तव्य निभाने से नहीं रोक सकता। यह मानते हुए कि दखल देने का कोई आधार नहीं है, कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed