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सड़कें सील की जा सकती हैं लेकिन मारे गए लोगों की याद नहीं मिटाई जा सकती : मीरवाइज
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मीरवाइज ने 13 जुलाई को मृतकों को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि, पाबंदियों की निंदा की
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने सोमवार को एक्स पर की पोस्ट में कहा कि हम गहरे जज्बात और सम्मान के साथ अपने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने 95 साल पहले इसी दिन अपनी सर्वोच्च कुर्बानी देकर न्याय, सम्मान और मानवाधिकारों के लिए लोगों के संघर्ष की नींव रखी थी। एक ऐसा संघर्ष जो आज भी जारी है।
यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को मृतकों को श्रद्धांजलि देने और फातिहा पढ़ने से जबरदस्ती रोका जा रहा है। मजार-ए-शुहदा, नक्शबंद साहिब जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। श्रीनगर की जामा मस्जिद के आस-पास पाबंदियां लगा दी गई हैं और मुझे एक बार फिर घर में नजरबंद कर दिया गया है। कब्रिस्तान सील किए जा सकते हैं, सड़कें बंद की जा सकती हैं और लोगों को कैद किया जा सकता है, लेकिन मारे गए लोग हमारे दिलों में और हमारी सामूहिक यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं। अल्लाह उन्हें और जम्मू-कश्मीर के सभी शहीदों को जन्नत में सबसे ऊंचा मकाम अता करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। मीरवाइज-ए-कश्मीर डॉ. मौलवी मोहम्मद उमर फारूक ने सोमवार को एक्स पर की पोस्ट में कहा कि हम गहरे जज्बात और सम्मान के साथ अपने मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते हैं, जिन्होंने 95 साल पहले इसी दिन अपनी सर्वोच्च कुर्बानी देकर न्याय, सम्मान और मानवाधिकारों के लिए लोगों के संघर्ष की नींव रखी थी। एक ऐसा संघर्ष जो आज भी जारी है।
यह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को मृतकों को श्रद्धांजलि देने और फातिहा पढ़ने से जबरदस्ती रोका जा रहा है। मजार-ए-शुहदा, नक्शबंद साहिब जाने वाले सभी रास्ते बंद कर दिए गए हैं। श्रीनगर की जामा मस्जिद के आस-पास पाबंदियां लगा दी गई हैं और मुझे एक बार फिर घर में नजरबंद कर दिया गया है। कब्रिस्तान सील किए जा सकते हैं, सड़कें बंद की जा सकती हैं और लोगों को कैद किया जा सकता है, लेकिन मारे गए लोग हमारे दिलों में और हमारी सामूहिक यादों में हमेशा जिंदा रहते हैं। अल्लाह उन्हें और जम्मू-कश्मीर के सभी शहीदों को जन्नत में सबसे ऊंचा मकाम अता करे।
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