jammu kashmir: हस्तशिल्प-हथकरघा विभाग ने आठ सेवाओं को किया ऑनलाइन, कारीगरों और बुनकरों को मिलेगा लाभ
हस्तशिल्प और हथकरघा, कश्मीर के निदेशक महमूद शाह ने कहा, इस कदम का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी और हितधारकों को बिना किसी परेशानी के सुविधा प्रदान करना है। निदेशक ने सभी जिला कार्यालयों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी आवेदनों को समयबद्ध तरीके से संसाधित किया जाना चाहिए।
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कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा निदेशक ने शुक्रवार को कारीगरों, बुनकरों, प्रशिक्षुओं और अन्य हितधारकों के लिए 8 ऑनलाइन सेवाओं का शुभारंभ किया। इन सेवाओं को सिंगल विंडो सिस्टम के साथ एकीकृत किया गया है, जिसका उद्देश्य वन अम्ब्रेला-सिंगल विंडो सिस्टम के तहत सभी हस्तशिल्प और हथकरघा सेवाएं प्रदान करना है।
अधिकारी ने बताया कि इस प्रणाली का उद्देश्य कारीगरों और अन्य हितधारकों को समयबद्ध तरीके से डिजिटल मंजूरी और अन्य लाभ प्राप्त करने की सुविधा प्रदान करना है। इस संबंध में कश्मीर के हस्तशिल्प और हथकरघा विभाग ने पूरी कागज रहित प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए विभाग के कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किया था।
विभाग ने को कानी-शॉल कारीगरों का पंजीकरण किया जो विभाग के प्रशिक्षु हैं और उनके कारीगर कार्ड ऑनलाइन बनाए गए हैं। यह निर्देश दिया गया कि अब से सभी प्रशिक्षुओं को सिंगल विंडो सिस्टम के संबंध में अलग से प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का उपयोग करने और इसका लाभ उठाने के बारे में पूरी तरह से जागरूक हों।
हस्तशिल्प और हथकरघा, कश्मीर के निदेशक महमूद शाह ने कहा, इस कदम का उद्देश्य व्यापार करने में आसानी और हितधारकों को बिना किसी परेशानी के सुविधा प्रदान करना है। निदेशक ने सभी जिला कार्यालयों को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सभी आवेदनों को समयबद्ध तरीके से संसाधित किया जाना चाहिए।
सिस्टम की मजबूती और पारदर्शिता पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए। ये सेवाएं रैपिड असेस्मेंट सिस्टम (आरएएस) के साथ भी एकीकृत हैं। आरएएस इंटरफेस का उद्देश्य नागरिकों को सरकार की ई-सेवा का लाभ उठाने के बाद सेवा की गुणवत्ता के बारे में त्वरित प्रतिक्रिया प्रदान करने में सक्षम बनाना है।
आरएएस की विश्लेषणात्मक विशेषताएं प्रणाली में सुधार और सेवाओं के बेहतर वितरण में एकीकृत विभागों की मदद करती हैं। गौरतलब है कि एक समर्पित शिकायत निवारण प्रकोष्ठ (जीआरसी) भी स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य किसी भी हितधारक द्वारा दर्ज की गई शिकायतों को देखना और निर्धारित समय के भीतर आवश्यकता के अनुसार इसका निवारण करना है।