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महबूबा ने एक बार फिर तिरंगे पर कड़वाहट जाहिर की
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श्रीनगर। पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति फिर कड़वाहट जारी की। महबूबा ने ट्विटर पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की एक तस्वीर साझा करते हुए जम्मू-कश्मीर के अलग झंडे को याद किया और भाजपा-आरएसएस पर हमला बोला। कहा कि जम्मू-कश्मीर प्रशासन बेशर्मी से दावे करता है कि कश्मीरी भारतीय ध्वज फहरा रहे हैं।
महबूबा मुफ्ती ने एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिये हमला बोला। उन्होंने ट्वीट में लिखा, जवाहर लाल नेहरू दो झंडों के बीच खड़े थे। एक भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा जम्मू-कश्मीर राज्य का झंडा, जिसे 1952 में सांविधानिक तौर पर अपनाया गया था। इस पर भाजपा के विभाजनकारी एजेंडे को पूरा करने के लिए बुल्डोजर चला दिया गया। भारतीय ध्वज का हर आधारभूत मूल्य भी खतरे में है।
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ऐसा न हो कि हम भूल जाएं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने अक्तूबर 1947 में भारतीय ध्वज को स्वीकार किया था, लेकिन कुछ शर्तों और सांविधानिक गारंटी के साथ, जैसे कि हमारा अपना झंडा होगा और एक अलग संविधान होगा। भाजपा के वैचारिक अभिभावक आरएसएस ने इसे स्वीकार किया था। महबूबा ने लिखा, जम्मू-कश्मीर प्रशासन बेशर्मी से दावे करता है कि कश्मीरी भारतीय झंडा फहरा रहे हैं। सच तो यह है कि उन्हें ऐसा करने की धमकी दी गई या फिर अंजाम भुगतने की।
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महबूबा मुफ्ती ने एक के बाद एक कई ट्वीट के जरिये हमला बोला। उन्होंने ट्वीट में लिखा, जवाहर लाल नेहरू दो झंडों के बीच खड़े थे। एक भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और दूसरा जम्मू-कश्मीर राज्य का झंडा, जिसे 1952 में सांविधानिक तौर पर अपनाया गया था। इस पर भाजपा के विभाजनकारी एजेंडे को पूरा करने के लिए बुल्डोजर चला दिया गया। भारतीय ध्वज का हर आधारभूत मूल्य भी खतरे में है।
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उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, ऐसा न हो कि हम भूल जाएं कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने अक्तूबर 1947 में भारतीय ध्वज को स्वीकार किया था, लेकिन कुछ शर्तों और सांविधानिक गारंटी के साथ, जैसे कि हमारा अपना झंडा होगा और एक अलग संविधान होगा। भाजपा के वैचारिक अभिभावक आरएसएस ने इसे स्वीकार किया था। महबूबा ने लिखा, जम्मू-कश्मीर प्रशासन बेशर्मी से दावे करता है कि कश्मीरी भारतीय झंडा फहरा रहे हैं। सच तो यह है कि उन्हें ऐसा करने की धमकी दी गई या फिर अंजाम भुगतने की।
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