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देश के पहले जियोथर्मल प्रोजेक्ट से फूटने लगे प्राकृतिक ऊर्जा के फव्वारे
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लेह/जम्मू। ठंडा मरुस्थल कहे जाने वाले लद्दाख में देश की पहली जियोथर्मल परियोजना से जुड़ी अच्छी खबर आई है। ऑयल एंड नेचुरल गैस कारपोरेशन (ओएनजीसी) के इंजीनियरों को ड्रिलिंग के दौरान 35 मीटर की गहराई पर ही 100 डिग्री तापमान मिल गया है। यहां 100 टन जियोथर्मल ऊर्जा प्रति घंटे निकल रही है। पहले चरण के उत्साहित नतीजों से देश की इस पहली परियोजना से निकट भविष्य में ऊर्जा के बड़े स्रोत को विकसित करने में मदद मिलेगी।
लद्दाख की पुगा घाटी में इस परियोजना पर लद्दाख प्रशासन, ओएनजीसी और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह मिलकर काम कर रहे हैं। ओएनजीसी ने देश भर में नौ साइटें चिह्नित की हैं, लेकिन जियोथर्मल ऊर्जा के लिए लद्दाख से शुरुआत की गई है। फरवरी 2021 में एमओयू होने के बाद हाल ही में काम शुरू किया गया है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पुगा घाटी में गर्म पानी के चश्मे मौजूद हैं। जमीन में खोदाई करने पर जियोथर्मल ऊर्जा के बड़े भंडार का दोहन किया जा सकता है। ओएनजीसी ने एक मेगावाट क्षमता की इस पायलट परियोजना पर काम शुरू किया है, लेकिन अगले चरणों में इसे 200 मेगावाट क्षमता से भी अधिक ले जाने की योजना है। अधिकारी के अनुसार ड्रिलिंग कार्य 35 मीटर की गहराई पर पहुंचा है और यहां प्रतिघंटा 100 टन ऊर्जा निकल रही है। यह उत्साहजनक है।
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गर्म पानी के स्वीमिंग पूल
का मजा ले सकेंगे पर्यटक
ऊर्जा दोहन के अलावा पुगा घाटी में गर्म पानी के स्वीमिंग पूल बनाने की भी योजना है। लद्दाख में साल भर कड़ाके की ठंड रहती है। हीटिंग सिस्टम के लिए ही लद्दाख प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च करता है। पुगा घाटी में सल्फर युक्त पानी का इस्तेमाल स्वीमिंग पूल और ऊर्जा का इस्तेमाल रूम हीटिंग के लिए किया जाएगा। इसके अलावा लद्दाख को साल भर चौबीसो घंटे बिजली की आपूर्ति भी संभव हो जाएगी।
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कार्बन न्यूट्रल लद्दाख का सपना होगा साकार
लद्दाख को देश का पहला कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने के लिए प्रयाए किए जा रहे हैं। इसमें केंद्र सरकार की भी मदद ली जा रही है। इस दिशा में जियोथर्मल ऊर्जा और भी अहम होगी। इससे प्राकृतिक रूप से तैयार प्रदूषण रहित ऊर्जा मिलेगी, जिससे लद्दाख की विशेष जलवायु को बनाए रखना भी संभव हो जाएगा।
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लद्दाख की पुगा घाटी में इस परियोजना पर लद्दाख प्रशासन, ओएनजीसी और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद लेह मिलकर काम कर रहे हैं। ओएनजीसी ने देश भर में नौ साइटें चिह्नित की हैं, लेकिन जियोथर्मल ऊर्जा के लिए लद्दाख से शुरुआत की गई है। फरवरी 2021 में एमओयू होने के बाद हाल ही में काम शुरू किया गया है। परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि पुगा घाटी में गर्म पानी के चश्मे मौजूद हैं। जमीन में खोदाई करने पर जियोथर्मल ऊर्जा के बड़े भंडार का दोहन किया जा सकता है। ओएनजीसी ने एक मेगावाट क्षमता की इस पायलट परियोजना पर काम शुरू किया है, लेकिन अगले चरणों में इसे 200 मेगावाट क्षमता से भी अधिक ले जाने की योजना है। अधिकारी के अनुसार ड्रिलिंग कार्य 35 मीटर की गहराई पर पहुंचा है और यहां प्रतिघंटा 100 टन ऊर्जा निकल रही है। यह उत्साहजनक है।
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गर्म पानी के स्वीमिंग पूल
का मजा ले सकेंगे पर्यटक
ऊर्जा दोहन के अलावा पुगा घाटी में गर्म पानी के स्वीमिंग पूल बनाने की भी योजना है। लद्दाख में साल भर कड़ाके की ठंड रहती है। हीटिंग सिस्टम के लिए ही लद्दाख प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च करता है। पुगा घाटी में सल्फर युक्त पानी का इस्तेमाल स्वीमिंग पूल और ऊर्जा का इस्तेमाल रूम हीटिंग के लिए किया जाएगा। इसके अलावा लद्दाख को साल भर चौबीसो घंटे बिजली की आपूर्ति भी संभव हो जाएगी।
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कार्बन न्यूट्रल लद्दाख का सपना होगा साकार
लद्दाख को देश का पहला कार्बन न्यूट्रल प्रदेश बनाने के लिए प्रयाए किए जा रहे हैं। इसमें केंद्र सरकार की भी मदद ली जा रही है। इस दिशा में जियोथर्मल ऊर्जा और भी अहम होगी। इससे प्राकृतिक रूप से तैयार प्रदूषण रहित ऊर्जा मिलेगी, जिससे लद्दाख की विशेष जलवायु को बनाए रखना भी संभव हो जाएगा।