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पंडितों को कश्मीर से बाहर तैनात करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कल
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श्रीनगर। कश्मीर घाटी में रह रहे पंडितों समेत तमाम धार्मिक अल्पसंख्यकों को घाटी से बाहर तैनात करने की मांग संबंधी याचिका पर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति की ओर से लिखे गए पत्र को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार कर लिया है।
मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेंगे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मांग की है कि हाईकोर्ट सरकार को घाटी में रह रहे सभी अल्पसंख्यकों का घाटी से बाहर सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास करने के निर्देश जारी करे। टिक्कू के अनुसार कश्मीरी पंडितों समेत तमाम धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान खतरे में हैं, लेकिन सरकार इसकी लगातार अनदेखी कर रही है जबकि घाटी में रह रहे तमाम हिंदू कश्मीर छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश को हस्तक्षेप करना चाहिए।
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अजय पंडिता की हत्या के बाद
क्या नीति अपनाई, बताए सरकार
समिति ने कहा है कि आठ जून 2020 को अजय पंडिता की अनंतनाग में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सरकार ने क्या नीति अपनाई, इसकी जानकारी तलब की जानी चाहिए। इसके बाद से हुईं तमाम लक्षित हत्याओं की जांच एसआईटी गठित कर न्यायिक निगरानी में जांच होनी चाहिए। इसमें संलिप्त अथवा लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, 12 मई 2022 से पहले घाटी से कई रसूखदारों का स्थानांतरण हुआ है। ऐसे लोगों को हालात बिगड़ने की जानकारी थी। इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश जावेद इकबाल वानी सोमवार को इस मामले की सुनवाई करेंगे। संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मांग की है कि हाईकोर्ट सरकार को घाटी में रह रहे सभी अल्पसंख्यकों का घाटी से बाहर सुरक्षित स्थानों पर पुनर्वास करने के निर्देश जारी करे। टिक्कू के अनुसार कश्मीरी पंडितों समेत तमाम धार्मिक अल्पसंख्यकों की जान खतरे में हैं, लेकिन सरकार इसकी लगातार अनदेखी कर रही है जबकि घाटी में रह रहे तमाम हिंदू कश्मीर छोड़ना चाहते हैं। ऐसे में मुख्य न्यायाधीश को हस्तक्षेप करना चाहिए।
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अजय पंडिता की हत्या के बाद
क्या नीति अपनाई, बताए सरकार
समिति ने कहा है कि आठ जून 2020 को अजय पंडिता की अनंतनाग में हत्या कर दी गई थी। इसके बाद सरकार ने क्या नीति अपनाई, इसकी जानकारी तलब की जानी चाहिए। इसके बाद से हुईं तमाम लक्षित हत्याओं की जांच एसआईटी गठित कर न्यायिक निगरानी में जांच होनी चाहिए। इसमें संलिप्त अथवा लापरवाही के जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, 12 मई 2022 से पहले घाटी से कई रसूखदारों का स्थानांतरण हुआ है। ऐसे लोगों को हालात बिगड़ने की जानकारी थी। इस पहलू की भी जांच होनी चाहिए।
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