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पुलिस गैलेंट्री मेडल से शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के चित्र को हटाने के बाद सियासी दलों ने जताई निराशा
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श्रीनगर। पुलिस जवानों और अधिकारियों को बहादुरी और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए मिलने वाले पुलिस गैलेंट्री मेडल से शेर-ए-कश्मीर शेख अब्दुल्ला का चित्र हटाए जाने के निर्देश के बाद मंगलवार को घाटी के सियासी दलों ने इसकी निंदा की है।
पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला एक कदावर शख्सियत हैं, उनका नाम मेडल से हटाने से उनकी शख्सियत को कोई फर्कनहीं पड़ेगा। मगर जिन लोगों ने ऐसा किया है, मुझे उनकी मानसिकता पर शक हो रहा है। एक ऐसी शख्सियत जिसने जम्मू कश्मीर की तारीख में इतनी अहम भूमिका निभाई है, अपनी जिन्दगी के कई साल यहां के लोगों की खिदमत में बिताए, लोगों के लिए अच्छे कानून लाए और जम्मू कश्मीर को इस मुल्क (हिंदुस्तान) के साथ मिलाने में शेख साहब का बहुत बड़ा हाथ है। आज 70 सालों के बाद उस शख्स की पहचान को यह लोग ख़त्म करना चाहते हैं तो ऐसे लोगों को क्या कहेंगे कि यह उनकी अकल का दिवालियापन है।
वहीं नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, भाजपा की तंजीम आरएसएस का ख्वाब था कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का नाम लोगों के दिलों से हटाया जाए। उसी सिलसिले में पहले अनुच्छेद 370 हटाया, बाकी के अधिकारों को भी छीन लिया। क्या ऐसा करने से शेर-ए-कश्मीर का नाम ख़त्म हो जाएगा। यह इनकी एक बड़ी ग़लतफहमी है। शेर-ए-कश्मीर का योगदान केवल जम्मू कश्मीर तक महदूद नहीं है बल्कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का नाम पूरे देश और विश्व भर में रहेगा। यह एक इतिहास है और यह लोग उसे बदल नहीं सकते।
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पीडीपी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा, शेख मोहम्मद अब्दुल्ला एक कदावर शख्सियत हैं, उनका नाम मेडल से हटाने से उनकी शख्सियत को कोई फर्कनहीं पड़ेगा। मगर जिन लोगों ने ऐसा किया है, मुझे उनकी मानसिकता पर शक हो रहा है। एक ऐसी शख्सियत जिसने जम्मू कश्मीर की तारीख में इतनी अहम भूमिका निभाई है, अपनी जिन्दगी के कई साल यहां के लोगों की खिदमत में बिताए, लोगों के लिए अच्छे कानून लाए और जम्मू कश्मीर को इस मुल्क (हिंदुस्तान) के साथ मिलाने में शेख साहब का बहुत बड़ा हाथ है। आज 70 सालों के बाद उस शख्स की पहचान को यह लोग ख़त्म करना चाहते हैं तो ऐसे लोगों को क्या कहेंगे कि यह उनकी अकल का दिवालियापन है।
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वहीं नेशनल कांफ्रेंस के प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा, भाजपा की तंजीम आरएसएस का ख्वाब था कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का नाम लोगों के दिलों से हटाया जाए। उसी सिलसिले में पहले अनुच्छेद 370 हटाया, बाकी के अधिकारों को भी छीन लिया। क्या ऐसा करने से शेर-ए-कश्मीर का नाम ख़त्म हो जाएगा। यह इनकी एक बड़ी ग़लतफहमी है। शेर-ए-कश्मीर का योगदान केवल जम्मू कश्मीर तक महदूद नहीं है बल्कि शेर-ए-कश्मीर शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का नाम पूरे देश और विश्व भर में रहेगा। यह एक इतिहास है और यह लोग उसे बदल नहीं सकते।
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