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मां खीर भवानी के जल कुंड का पानी हुआ लाल
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तुलमुला/ गांदरबल। मध्य कश्मीर के गांदरबल जिले में स्थित माता खीर भवानी के जल कुंड के पानी का रंग लाल हो गया है। स्थानीय कश्मीरी पंडितों के अनुसार यह एक खतरे का संकेत है। उनके अनुसार जब भी कश्मीर घाटी में कोई भी विपदा आती है तो इसका संकेत जल कुंड के रंग बदलने से मिलता है।
बता दें कि जिले के तुलमुला गांव में स्थित माता खीर भवानी के इस मंदिर की खास बात यहां का जल कुंड है। भक्तों के अलावा स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां के जल कुंड में पानी के रंग से लोगों को आने वाले समय का ज्ञान हो जाता है। पानी का रंग लाल, पीला या काला होना किसी बड़ी समस्या के आने का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफ़ेद, नीला या हल्का रंग अच्छाई के प्रतीक माने जाते हैं। भक्तों ने भी जल कुंड के रंग में परिवर्तन होते स्वयं देखा है। खासकर 90 के दशक में जब कश्मीर घाटी में हालात खराब थे।
गांदरबल के एक स्थानीय कश्मीरी पंडित कुलदीप ने कहा, धीरे-धीरे ऐसा लग रहा है कि माता हम पर कृपा बनाएगी लेकिन आज से दो दिन पहले जल कुंड का पानी काफी गुड़े लाल रंग का हो गया। जल कुंड का रंग काला और लाल होना सही संकेत नहीं है। कुलदीप के अनुसार हरा, नीला और बाकी रंग अच्छे संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि जब 90 के दशक में हालात खराब हुए थे तब भी इसका रंग काला हुआ था। उस समय पंडितों का कश्मीर में नरसंहार हुआ था और उनका यहां से पलायन हुआ था। आज फिर से यहां बेगुनाहों का खून बहाया जा रहा है तो इस जल कुंड का रंग हमें सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। वहीं एक अन्य महिला भक्त अनुराधा ने बताया कि उन्हें 10-15 दिन हो गए यहां पर, लेकिन कुंड के पानी का रंग सही नहीं है। इससे पहले जब रंग बदला था तो कोरोना फैलना शुरू हुआ। अब फिर से रंग बदल गया है। ऐसा लगता है फिर से हालात खराब होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि जब भी कोई विपदा आने वाली होती है तो इस कुंड के पानी का रंग बदलता रहता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पानी का रंग लाल है, जोकि खतरे का संकेत है।
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बता दें कि जिले के तुलमुला गांव में स्थित माता खीर भवानी के इस मंदिर की खास बात यहां का जल कुंड है। भक्तों के अलावा स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यहां के जल कुंड में पानी के रंग से लोगों को आने वाले समय का ज्ञान हो जाता है। पानी का रंग लाल, पीला या काला होना किसी बड़ी समस्या के आने का प्रतीक माना जाता है, जबकि सफ़ेद, नीला या हल्का रंग अच्छाई के प्रतीक माने जाते हैं। भक्तों ने भी जल कुंड के रंग में परिवर्तन होते स्वयं देखा है। खासकर 90 के दशक में जब कश्मीर घाटी में हालात खराब थे।
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गांदरबल के एक स्थानीय कश्मीरी पंडित कुलदीप ने कहा, धीरे-धीरे ऐसा लग रहा है कि माता हम पर कृपा बनाएगी लेकिन आज से दो दिन पहले जल कुंड का पानी काफी गुड़े लाल रंग का हो गया। जल कुंड का रंग काला और लाल होना सही संकेत नहीं है। कुलदीप के अनुसार हरा, नीला और बाकी रंग अच्छे संकेत देते हैं। उन्होंने कहा कि जब 90 के दशक में हालात खराब हुए थे तब भी इसका रंग काला हुआ था। उस समय पंडितों का कश्मीर में नरसंहार हुआ था और उनका यहां से पलायन हुआ था। आज फिर से यहां बेगुनाहों का खून बहाया जा रहा है तो इस जल कुंड का रंग हमें सतर्क रहने का संकेत दे रहा है। वहीं एक अन्य महिला भक्त अनुराधा ने बताया कि उन्हें 10-15 दिन हो गए यहां पर, लेकिन कुंड के पानी का रंग सही नहीं है। इससे पहले जब रंग बदला था तो कोरोना फैलना शुरू हुआ। अब फिर से रंग बदल गया है। ऐसा लगता है फिर से हालात खराब होने वाले हैं। उन्होंने कहा कि जब भी कोई विपदा आने वाली होती है तो इस कुंड के पानी का रंग बदलता रहता है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से पानी का रंग लाल है, जोकि खतरे का संकेत है।
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