फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Relief to mobile magistrate from Supreme Court stay on administrative action

श्रीनगर: मोबाइल मजिस्ट्रेट को सुप्रीम कोर्ट से राहत, प्रशासनिक कार्रवाई पर रोक

Sun, 01 May 2022 01:51 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो Updated Sun, 01 May 2022 01:51 AM IST
सार

सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्यवाही न चलाई जाए।
 

विज्ञापन
Relief to mobile magistrate from Supreme Court stay on administrative action
highcourt srinagar - फोटो : फाइल

विस्तार

सर्वोच्च न्यायालय ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट की ओर से जारी निर्देश पर रोक लगाकर याचिकाकर्ता मजिस्ट्रेट को राहत दी है। हाईकोर्ट ने स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट इलेक्ट्रिसिटी यूनिट-3 पट्टन महमूद अनवर अलनसीर पर किसी भी तरह की कार्रवाई पर रोक लगाकर याचिका का निपटारा कर दिया।

विज्ञापन


इस मामले में न्यायिक अधिकारी अलनसीर पर आरोप था कि उन्होंने एक मौत मामले में सेशंस कोर्ट की कार्यवाही को अपनी ही अदालत में शुरू कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की प्रशासनिक कार्यवाही न चलाई जाए।
विज्ञापन


यह मामला आजाद अहमद लोन नाम शख्स की वर्ष 2011 में हुई मौत से संबंधित है। इसमें मजिस्ट्रेट ने पाया था कि आरपीसी की धारा 302 और 120-बी के तहत दर्ज मामलों में मृतक का पोस्टमार्टम अनिवार्य है। मजिस्ट्रेट ने कहा था कि मृतक को जहां से फंदे पर लटका बताया गया, उससे ज्यादा लंबाई तो मृतक की थी। ऐसे में यह मामला आत्महत्या का कैसे हो सकता है। मृतक के परिजनों ने कोर्ट से अपील करते हुए कहा था कि इसमें आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट ने इस मामले में नए सिरे से जांच कर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए। जब यह मामला हाईकोर्ट में पहुंचा तो उच्च न्यायालय ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने पुलिस से रिपोर्ट लेकर स्थिति का विश्लेषण करने के बजाय पुलिस को एफआईआर दर्ज कर स्टेटस रिपोर्ट देने के निर्देश दे दिए। हाईकोर्ट ने पाया कि इस मामले को सीजेएम की अदालत से स्पेशल मोबाइल मजिस्ट्रेट इलेक्ट्रिसिटी को रेफर के पास शिफ्ट कर दिया गया, जहां गवाहों के बयान दर्ज करने की कार्यवाही शुरू कर दी गई।


कानूनी प्रावधानों के अनुसार गवाहों के बयानों से जुड़ी प्रक्रिया सत्र न्यायालय में होनी थी, लिहाजा मोबाइल मजिस्ट्रेट ने अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। इसके लिए मोबाइल मजिस्ट्रेट के खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही चलाई जाए। हाईकोर्ट के इसी निर्देश को मजिस्ट्रेट की ओर से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed