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इस बार भी नहीं होगा मां खीर भवानी का मेला
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तुलमुला/गांदरबल। कश्मीर में सदियों से चले आ रहे मां खीर भवानी के मेले पर लगातार दूसरे वर्ष भी कोरोना की मार पड़ी है। कोरोना के चलते इस वर्ष भी मेला आयोजित नहीं होगा। जिला उपायुक्त के अनुसार कोरोना के चलते मेला नहीं होगा लेकिन जो कोई श्रद्धालु यहां पहुंचेगा, उसे कोविड प्रोटोकॉल के अनुसार दर्शन करने की अनुमति दी जाएगी। मेला शुक्रवार को है, लेकिन प्रशासन की तरफ से आयोजित नहीं होने का कोई आदेश जारी न करने से श्रद्धालु काफी निराश हैं। मंदिर में पहुंचने पर लोगों को पता चल रहा है कि मेला नहीं होगा। बता दें कि 90 के दशक के बाद से कश्मीर में बिगड़े हालातों के दौर में भी मेले का आयोजन होता रहा है।
माता राजन्य देवी जिन्हें माता खीर भवानी के नाम से भी बुलाया जाता है, का मेला शुक्रवार को मनाया जाना था। इसको लेकर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में तैयारियों को वीरवार को अंतिम रूप दिया गया। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर किया जाता है। विभाग की तरफ से मंदिर परिसर में बने गेस्ट हाउस और सराय में सैनिटाइजेशन का काम किया गया है। मंदिर के आसपास बने झल कुंड और नदी की भी सफाई का काम पूरा किया गया, लेकिन प्रशासन द्वारा मेले को लेकर कोई भी औपचारिक बयान जारी न करने को लेकर हजारों श्रद्धालु असमंजस में दिखे। उनका कहना है कि अगर मेले का आयोजन नहीं किया जाना था तो उसको लेकर स्पष्ट रूप से बयान जारी किया जाना चाहिए था, क्योंकि हजारों श्रद्धालु साल भर इस मेले में शामिल होने के लिए इंतजार में रहते हैं। इस बीच कुछ श्रद्धालु जम्मू से यहां पहुंच चुके हैं। जम्मू के रविंदर कौल ने बताया कि वह दो दिन पहले यहां पहुंच गए हैं। सरकार ने अनुमति नहीं दी है, लेकिन अगर कोई आता है उसे प्रोटोकॉल के तहत मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। वहीं एक अन्य कश्मीरी पंडित ओमकारनाथ शास्त्री ने कहा कि इन हालातों में मेले का आयोजन काफी मुश्किल है। उन्होंने निराशा जताई कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा में जाने पर पाबंदी है लेकिन शराब की दुकानें खुली हैं और वहां कोई एसओपी का पालन नहीं हो रहा है। जम्मू से अनुपम भान ने फोन पर बताया कि सरकार को सीधे तौर पर बयान जारी करना चाहिए था ताकि कश्मीर से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
जिला उपायुक्त की मैनेेजमेंट कमेटी से बैठक
वहीं गांदरबल जिले की जिला उपायुक्त कृतिका ज्योत्सना ने मेला खीर भवानी मैनेजमेंट कमेटी के साथ बैठक की, जिसमें कार्यक्रम को लेकर विचार विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि डीडीएमए की ओर से जो भी दिशा निर्देश हैं उनका पालन करते हुए श्रद्धालुओं को अनुमति दी जाएगी। पूरी तरह से एसओपी का पालन कराया जाएगा। इसके लिए मजिस्ट्रेट भी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। जो कोई श्रद्धालु आएगा उसे प्रोटोकॉल के तहत अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या हर वर्ष की तरह भव्य मेला आयोजित करने की अनुमति है तो उन्होंने कहा कि जो हालात बने हुए हैं ऐसे में उस तरह का आयोजन करने की अनुमति नहीं है।
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दो दिन पहले ही भजन कीर्तन शुरू हो जाते थे
बता दें, हर वर्ष यहां एक भव्य मेला लगता रहा है। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग आम तौर पर मेले से एक दो दिन पहले ही यहां डेरा डाल लेते हैं। मंदिर परिसर में चिनार की ठंडी छांव तले चारों ओर कश्मीरी पारंपरिक धुन और भजन कीर्तन करते हैं। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं लेकिन इस बार भी यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। बता दें कि वर्ष 2011 में करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने इस मंदिर में दर्शन किए थे।
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माता राजन्य देवी जिन्हें माता खीर भवानी के नाम से भी बुलाया जाता है, का मेला शुक्रवार को मनाया जाना था। इसको लेकर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में तैयारियों को वीरवार को अंतिम रूप दिया गया। मेले का आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर किया जाता है। विभाग की तरफ से मंदिर परिसर में बने गेस्ट हाउस और सराय में सैनिटाइजेशन का काम किया गया है। मंदिर के आसपास बने झल कुंड और नदी की भी सफाई का काम पूरा किया गया, लेकिन प्रशासन द्वारा मेले को लेकर कोई भी औपचारिक बयान जारी न करने को लेकर हजारों श्रद्धालु असमंजस में दिखे। उनका कहना है कि अगर मेले का आयोजन नहीं किया जाना था तो उसको लेकर स्पष्ट रूप से बयान जारी किया जाना चाहिए था, क्योंकि हजारों श्रद्धालु साल भर इस मेले में शामिल होने के लिए इंतजार में रहते हैं। इस बीच कुछ श्रद्धालु जम्मू से यहां पहुंच चुके हैं। जम्मू के रविंदर कौल ने बताया कि वह दो दिन पहले यहां पहुंच गए हैं। सरकार ने अनुमति नहीं दी है, लेकिन अगर कोई आता है उसे प्रोटोकॉल के तहत मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी। वहीं एक अन्य कश्मीरी पंडित ओमकारनाथ शास्त्री ने कहा कि इन हालातों में मेले का आयोजन काफी मुश्किल है। उन्होंने निराशा जताई कि मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा में जाने पर पाबंदी है लेकिन शराब की दुकानें खुली हैं और वहां कोई एसओपी का पालन नहीं हो रहा है। जम्मू से अनुपम भान ने फोन पर बताया कि सरकार को सीधे तौर पर बयान जारी करना चाहिए था ताकि कश्मीर से बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।
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जिला उपायुक्त की मैनेेजमेंट कमेटी से बैठक
वहीं गांदरबल जिले की जिला उपायुक्त कृतिका ज्योत्सना ने मेला खीर भवानी मैनेजमेंट कमेटी के साथ बैठक की, जिसमें कार्यक्रम को लेकर विचार विमर्श किया गया। उन्होंने बताया कि डीडीएमए की ओर से जो भी दिशा निर्देश हैं उनका पालन करते हुए श्रद्धालुओं को अनुमति दी जाएगी। पूरी तरह से एसओपी का पालन कराया जाएगा। इसके लिए मजिस्ट्रेट भी ड्यूटी पर तैनात रहेंगे। जो कोई श्रद्धालु आएगा उसे प्रोटोकॉल के तहत अंदर जाने की अनुमति दी जाएगी। यह पूछे जाने पर कि क्या हर वर्ष की तरह भव्य मेला आयोजित करने की अनुमति है तो उन्होंने कहा कि जो हालात बने हुए हैं ऐसे में उस तरह का आयोजन करने की अनुमति नहीं है।
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दो दिन पहले ही भजन कीर्तन शुरू हो जाते थे
बता दें, हर वर्ष यहां एक भव्य मेला लगता रहा है। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोग आम तौर पर मेले से एक दो दिन पहले ही यहां डेरा डाल लेते हैं। मंदिर परिसर में चिनार की ठंडी छांव तले चारों ओर कश्मीरी पारंपरिक धुन और भजन कीर्तन करते हैं। कश्मीरी पंडित समुदाय के लोगों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। हर वर्ष हजारों की संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं लेकिन इस बार भी यहां सन्नाटा पसरा हुआ है। बता दें कि वर्ष 2011 में करीब दो लाख श्रद्धालुओं ने इस मंदिर में दर्शन किए थे।