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डल झील के आसमान पर लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों ने दिखाया रोमांच
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श्रीनगर। डल झील के आसमान में लड़ाकू विमानों के रोमांचक करतब और हेलिकॉप्टरों की हैरतअंगेज कलाबाजियों ने दिल जीत लिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से वायुसेना के जवानों का हौसला बढ़ाया। मौका था मेगा एयर शो का। इसमें सूर्यकिरण एक्रोबेटिक्स टीम के करतब, पैरामोटर और पावर्ड हैंग ग्लाइडर डिस्प्ले, मिग 21 बाइसन से फ्लाईपास्ट, एसयू 30 एयरक्राफ्ट ने एक्रोबेटिक्स एयर डिस्प्ले दिया।
आजादी के अमृत महोत्सव के तहत रविवार को श्रीनगर में डल झील के किनारे मेगा एयर शो आयोजित किया गया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम का आयोजन एसकेआईसीसी से शुभारंभ किया। भारतीय वायु सेना में नौकरी के अवसरों के बारे में युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए शो की थीम ‘गिव विंग्स टु योर ड्रीम्स’ रखी गई थी। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल बीआर कृष्णा भी मौजूद रहे।
एयर शो में सबसे पहले पैरा मोटर डिस्प्ले हुआ, जिसके बाद भारतीय वायुसेना की आकाश गंगा टीम ने डल झील के ऊपर एमआई 17 हेलीकॉप्टर ड्राप किया। इस दौरान हवा में अलग-अलग करतब दिखाए गए। टीम के सदस्यों ने भारतीय तिरंगे को भी डल झील के ऊपर फहराया और दर्शकों की वाहवाही लूटी। इसके अलावा चिनूक हेलिकॉप्टर ने भी डल झील के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया। हेलिकॉप्टर की गड़गड़ाहट से झील के स्थिर पानी में भी हरकत आ गई।
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ट्विन इंजन और डबल रोटर वाला यह हेलिकॉप्टर काफी समय तक एक ही स्थान पर उड़ने की क्षमता रखता है। यह हेलिकॉप्टर 10 टन वजन लेकर हवा में उड़ सकता है। यह दुर्गम इलाकों में भी ऑपरेशन के लिए कारगर है। इस हेलिकॉप्टर को 2015 में भारत ने अमेरिका से खरीदा था। 2019 में चार चिनूक हेलिकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।
मिग-21 बाइसन
स्वोर्ड आर्म्स स्क्वार्डन के मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमानों ने भी एयर शो में भाग लिया। मिग-21 बाइसन आधुनिक हथियारों से लैस मिग-21 सिरीज का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान है। इसका उपयोग इंटरसेप्टर के रूप में किया जाता है। भारतीय वायुसेना ने पहली बार 1960 में मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था। कारगिल युद्ध के बाद से वायुसेना ने अपने बेड़े से पुराने मिग-21 विमानों को हटाकर इसी उन्नत मिग-21 बाइसन को शामिल किया है। मिग-21 बाइसन में एक बड़ा सर्च एंड ट्रैक रडार लगा है जो रडार नियंत्रित मिसाइल को संचालित करता है और रडार गाइडेड मिसाइलों का रास्ता तय करता है। मिग-21 बाइसन सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है जो लंबाई में 15.76 मीटर और चौड़ाई में 5.15 मीटर है। बिना हथियारों के ये करीब 5200 किलो का होता है, जबकि असलहा लोड होने के बाद करीब 8,000 किलोग्राम तक के वजन के साथ उड़ान भर सकता है। मिग-21 एक हल्का सिंगल पायलट लड़ाकू विमान है और 18 हजार मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसकी स्पीड अधिकतम 2,230 किलोमीटर प्रति घंटा यानी 1204 नॉट्स तक हो सकती है। ये आसमान से आसमान में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ और बम ले जा सकने में सक्षम है। बता दें कि यह मिग-21 बाइसन ही था जिसने पाकिस्तान के एफ 16 विमान को निशाना बनाया था।
सुखोई-30
फ्लाइंग लैंसर्स स्क्वॉर्डन के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने विक्ट्री फार्मेशन, त्रिशूल फार्मेशन, वर्टिकल चार्ली आदि जैसी कलाबाजियां दिखाईं। यह एक रूसी लड़ाकू विमान है जो वायु से वायु एवं वायु से धरती पर आक्रमण करने में सक्षम है। बता दें कि सुखोई विमान 3000 किलोमीटर तक हमला कर सकता है, जबकि इसकी क्रूज रेंज 3200 किलोमीटर तक है और कॉम्बैट रेडियस 1500 किलोमीटर है। वजन में भारी होने के बावजूद यह लड़ाकू विमान अपनी तेज गति के लिये जाना जाता है। यह विमान आकाश में 2100 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज रफ्तार से फर्राटा भर सकता है। आज के एयर शो के दौरान भी इस तेज रफ़्तार लड़ाकू विमान ने 15 सेकेंड में मंच को पार किया।
सूर्यकिरण एक्रोबेटिक टीम
पूरे शो का खास आकर्षण का केंद्र रही वायुसेना की सूर्यकिरण एक्रोबेटिक टीम। टीम ने डल झील के ऊपर अपने करतब दिखाए। जैसे ही सफेद और लाल रंग वाले 9 हॉक विमान डल के ऊपर से फ्लाई पास्ट कर स्मोक छोड़ते हुए दिखे तो वहां मौजूद लोगों खासकर बच्चों ने तालियों से उनका स्वागत किया। सूर्यकिरण टीम ने तुम्ब्लिंग, रोलिंग, लूप्स, डाइव्ज आदि कलाबाजियां दिखाईं और काफी समय तक दशकों को रोमांचित किया। आखिर में सूर्यकिरण टीम के दो विमानों ने स्मोक से हार्ट की फार्मेशन बनाई।
सूर्यकिरण टीम के पायलट स्क्वार्डन लीडर दीपांकर गर्ग ने बताया कि उनकी टीम हॉक मार्क 132 एयरक्राफ्ट इस्तेमाल में लाती है। यह एक लड़ाकू विमान है और साथ ही साथ यह एक ट्रेनिंग विमान भी है। गर्ग के अनुसार सूर्यकिरण टीम 1996 में स्थापित हुई थी। 2011 तक उनके द्वारा किरण विमान इस्तेमाल में लाए जा रहे थे। 2011 में किन्ही कारणों से बंद कर दिया गया। 2015 से हॉक विमान ही इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। किरण विमान इंडियन मेड था और हॉक विमान यूके मेड है। उन्होंने कहा कि यह अच्छा अनुभव था डल झील के ऊपर एप कतज़्व्य दिखाने का। दीपांकर गर्ग ने कहा कि आज के इस शो में 10000 के करीब लोग शामिल हुए जिनमें से 5000 विभिन्न स्कूलों के छात्र थे। इस शो के दौरान भारतीय वायुसेना के इतिहास से जुड़ी एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा ने भी मधुर धुनों से समां बांधा।
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आजादी के अमृत महोत्सव के तहत रविवार को श्रीनगर में डल झील के किनारे मेगा एयर शो आयोजित किया गया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कार्यक्रम का आयोजन एसकेआईसीसी से शुभारंभ किया। भारतीय वायु सेना में नौकरी के अवसरों के बारे में युवाओं में जागरूकता बढ़ाने के लिए शो की थीम ‘गिव विंग्स टु योर ड्रीम्स’ रखी गई थी। इस अवसर पर भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग इन चीफ एयर मार्शल बीआर कृष्णा भी मौजूद रहे।
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एयर शो में सबसे पहले पैरा मोटर डिस्प्ले हुआ, जिसके बाद भारतीय वायुसेना की आकाश गंगा टीम ने डल झील के ऊपर एमआई 17 हेलीकॉप्टर ड्राप किया। इस दौरान हवा में अलग-अलग करतब दिखाए गए। टीम के सदस्यों ने भारतीय तिरंगे को भी डल झील के ऊपर फहराया और दर्शकों की वाहवाही लूटी। इसके अलावा चिनूक हेलिकॉप्टर ने भी डल झील के ऊपर से फ्लाई पास्ट किया। हेलिकॉप्टर की गड़गड़ाहट से झील के स्थिर पानी में भी हरकत आ गई।
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ट्विन इंजन और डबल रोटर वाला यह हेलिकॉप्टर काफी समय तक एक ही स्थान पर उड़ने की क्षमता रखता है। यह हेलिकॉप्टर 10 टन वजन लेकर हवा में उड़ सकता है। यह दुर्गम इलाकों में भी ऑपरेशन के लिए कारगर है। इस हेलिकॉप्टर को 2015 में भारत ने अमेरिका से खरीदा था। 2019 में चार चिनूक हेलिकॉप्टरों को भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था।
मिग-21 बाइसन
स्वोर्ड आर्म्स स्क्वार्डन के मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमानों ने भी एयर शो में भाग लिया। मिग-21 बाइसन आधुनिक हथियारों से लैस मिग-21 सिरीज का सबसे उन्नत लड़ाकू विमान है। इसका उपयोग इंटरसेप्टर के रूप में किया जाता है। भारतीय वायुसेना ने पहली बार 1960 में मिग-21 विमानों को अपने बेड़े में शामिल किया था। कारगिल युद्ध के बाद से वायुसेना ने अपने बेड़े से पुराने मिग-21 विमानों को हटाकर इसी उन्नत मिग-21 बाइसन को शामिल किया है। मिग-21 बाइसन में एक बड़ा सर्च एंड ट्रैक रडार लगा है जो रडार नियंत्रित मिसाइल को संचालित करता है और रडार गाइडेड मिसाइलों का रास्ता तय करता है। मिग-21 बाइसन सुपरसोनिक लड़ाकू जेट विमान है जो लंबाई में 15.76 मीटर और चौड़ाई में 5.15 मीटर है। बिना हथियारों के ये करीब 5200 किलो का होता है, जबकि असलहा लोड होने के बाद करीब 8,000 किलोग्राम तक के वजन के साथ उड़ान भर सकता है। मिग-21 एक हल्का सिंगल पायलट लड़ाकू विमान है और 18 हजार मीटर तक की ऊंचाई पर उड़ सकता है। इसकी स्पीड अधिकतम 2,230 किलोमीटर प्रति घंटा यानी 1204 नॉट्स तक हो सकती है। ये आसमान से आसमान में मार करने वाली मिसाइलों के साथ-साथ और बम ले जा सकने में सक्षम है। बता दें कि यह मिग-21 बाइसन ही था जिसने पाकिस्तान के एफ 16 विमान को निशाना बनाया था।
सुखोई-30
फ्लाइंग लैंसर्स स्क्वॉर्डन के सुखोई-30 लड़ाकू विमानों ने विक्ट्री फार्मेशन, त्रिशूल फार्मेशन, वर्टिकल चार्ली आदि जैसी कलाबाजियां दिखाईं। यह एक रूसी लड़ाकू विमान है जो वायु से वायु एवं वायु से धरती पर आक्रमण करने में सक्षम है। बता दें कि सुखोई विमान 3000 किलोमीटर तक हमला कर सकता है, जबकि इसकी क्रूज रेंज 3200 किलोमीटर तक है और कॉम्बैट रेडियस 1500 किलोमीटर है। वजन में भारी होने के बावजूद यह लड़ाकू विमान अपनी तेज गति के लिये जाना जाता है। यह विमान आकाश में 2100 किलोमीटर प्रति घंटा की तेज रफ्तार से फर्राटा भर सकता है। आज के एयर शो के दौरान भी इस तेज रफ़्तार लड़ाकू विमान ने 15 सेकेंड में मंच को पार किया।
सूर्यकिरण एक्रोबेटिक टीम
पूरे शो का खास आकर्षण का केंद्र रही वायुसेना की सूर्यकिरण एक्रोबेटिक टीम। टीम ने डल झील के ऊपर अपने करतब दिखाए। जैसे ही सफेद और लाल रंग वाले 9 हॉक विमान डल के ऊपर से फ्लाई पास्ट कर स्मोक छोड़ते हुए दिखे तो वहां मौजूद लोगों खासकर बच्चों ने तालियों से उनका स्वागत किया। सूर्यकिरण टीम ने तुम्ब्लिंग, रोलिंग, लूप्स, डाइव्ज आदि कलाबाजियां दिखाईं और काफी समय तक दशकों को रोमांचित किया। आखिर में सूर्यकिरण टीम के दो विमानों ने स्मोक से हार्ट की फार्मेशन बनाई।
सूर्यकिरण टीम के पायलट स्क्वार्डन लीडर दीपांकर गर्ग ने बताया कि उनकी टीम हॉक मार्क 132 एयरक्राफ्ट इस्तेमाल में लाती है। यह एक लड़ाकू विमान है और साथ ही साथ यह एक ट्रेनिंग विमान भी है। गर्ग के अनुसार सूर्यकिरण टीम 1996 में स्थापित हुई थी। 2011 तक उनके द्वारा किरण विमान इस्तेमाल में लाए जा रहे थे। 2011 में किन्ही कारणों से बंद कर दिया गया। 2015 से हॉक विमान ही इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं। किरण विमान इंडियन मेड था और हॉक विमान यूके मेड है। उन्होंने कहा कि यह अच्छा अनुभव था डल झील के ऊपर एप कतज़्व्य दिखाने का। दीपांकर गर्ग ने कहा कि आज के इस शो में 10000 के करीब लोग शामिल हुए जिनमें से 5000 विभिन्न स्कूलों के छात्र थे। इस शो के दौरान भारतीय वायुसेना के इतिहास से जुड़ी एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। सिम्फनी ऑर्केस्ट्रा ने भी मधुर धुनों से समां बांधा।