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Srinagar News: पॉश व्यावसायिक इलाकों में बेदखली के नोटिस जारी
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जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने वैध लीज़ और किराया न चुकाने का हवाला देकर पोलो व्यू, राजबाग और करन नगर की संपत्तियों को 21 सितंबर तक खाली करने का दिया आदेश
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ग्रीष्मकालीन राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में समय-सीमा समाप्त हो चुके व्यावसायिक पट्टों को निशाना बनाते हुए सरकार ने वैध लीज या नवीनीकरण आदेश के अभाव का हवाला देते हुए नज़ूल (सरकारी) भूमि के कई कब्जाधारियों को बेदखल करने का आदेश दिया है।
जिन संपत्तियों को बेदखली के नोटिस दिए गए हैं, उनमें शहर के पॉश इलाकों जैसे लाल चौक के पास पोलो व्यू, राजबाग और करन नगर की संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों को बेदखली का नोटिस थमाया गया है, उनमें से एक पोलो व्यू स्थित मोही-उद-दीन ट्रस्ट की प्रतिष्ठित सफेद इमारत भी है। सहायक आयुक्त नज़ूल व संपदा अधिकारी श्रीनगर के कार्यालय की ओर से जारी बेदखली आदेश में कब्जाधारियों को 21 सितंबर को या उससे पहले परिसर खाली करने और शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि इस साल पांच अगस्त को ट्रस्ट को एक पूर्व नोटिस जारी कर संपत्ति पर अपने कब्जे के अधिकार को सिद्ध करने के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करने को कहा गया था। ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत सामग्री एक वैध लीज़ या इसके नवीनीकरण को साबित करने में विफल रही। नोटिस में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 1988 की धारा 5(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संपदा अधिकारी ने मोही-उद-दीन ट्रस्ट, रेजीडेंसी रोड, श्रीनगर को उक्त सार्वजनिक परिसर से बेदखल करने का आदेश दिया है। इसमें आगे कहा गया कि मोही-उद-दीन ट्रस्ट को 21 सितंबर को या उससे पहले परिसर को खाली करने और उसका शांतिपूर्ण कब्जा संपदा अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया जाता है।
58 हजार कनाल से अधिक सरकारी जमीन को नजूल भूमि के रूप में वर्गीकृत किया
सरकार ने चेतावनी दी कि निर्दिष्ट समय के भीतर आदेश का पालन न करने पर बेदखली और सार्वजनिक परिसर का कब्जा लेने की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि शहर के राजबाग और करन नगर इलाकों में नज़ूल भूमि पर बने और किराया न चुकाने वाले कुछ अन्य प्रतिष्ठानों को भी बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में 58 हजार कनाल से अधिक सरकारी भूमि को नजूल भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें से हजारों कनाल ज़मीन दशकों पहले लीज़ पर दिए गए प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में आती है। इसमें जम्मू संभाग में 50 हजार कनाल से अधिक और कश्मीर संभाग में सात हजार कनाल से अधिक भूमि शामिल है। श्रीनगर और जम्मू शहरों में 5600 कनाल से अधिक नज़ूल भूमि पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। प्रशासन के इस नए अभियान ने शहर के व्यापारियों और लीज़ धारकों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जिनमें से कई का दावा है कि उनके नवीनीकरण के आवेदन वर्षों से प्रशासन के पास लंबित पड़े हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। ग्रीष्मकालीन राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों में समय-सीमा समाप्त हो चुके व्यावसायिक पट्टों को निशाना बनाते हुए सरकार ने वैध लीज या नवीनीकरण आदेश के अभाव का हवाला देते हुए नज़ूल (सरकारी) भूमि के कई कब्जाधारियों को बेदखल करने का आदेश दिया है।
जिन संपत्तियों को बेदखली के नोटिस दिए गए हैं, उनमें शहर के पॉश इलाकों जैसे लाल चौक के पास पोलो व्यू, राजबाग और करन नगर की संपत्तियां शामिल हैं। इन संपत्तियों को बेदखली का नोटिस थमाया गया है, उनमें से एक पोलो व्यू स्थित मोही-उद-दीन ट्रस्ट की प्रतिष्ठित सफेद इमारत भी है। सहायक आयुक्त नज़ूल व संपदा अधिकारी श्रीनगर के कार्यालय की ओर से जारी बेदखली आदेश में कब्जाधारियों को 21 सितंबर को या उससे पहले परिसर खाली करने और शांतिपूर्ण कब्जा सौंपने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने कहा कि इस साल पांच अगस्त को ट्रस्ट को एक पूर्व नोटिस जारी कर संपत्ति पर अपने कब्जे के अधिकार को सिद्ध करने के लिए दस्तावेजी सबूत पेश करने को कहा गया था। ट्रस्ट की ओर से प्रस्तुत सामग्री एक वैध लीज़ या इसके नवीनीकरण को साबित करने में विफल रही। नोटिस में कहा गया है कि जम्मू-कश्मीर सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम 1988 की धारा 5(1) में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए संपदा अधिकारी ने मोही-उद-दीन ट्रस्ट, रेजीडेंसी रोड, श्रीनगर को उक्त सार्वजनिक परिसर से बेदखल करने का आदेश दिया है। इसमें आगे कहा गया कि मोही-उद-दीन ट्रस्ट को 21 सितंबर को या उससे पहले परिसर को खाली करने और उसका शांतिपूर्ण कब्जा संपदा अधिकारी को सौंपने का निर्देश दिया जाता है।
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58 हजार कनाल से अधिक सरकारी जमीन को नजूल भूमि के रूप में वर्गीकृत किया
सरकार ने चेतावनी दी कि निर्दिष्ट समय के भीतर आदेश का पालन न करने पर बेदखली और सार्वजनिक परिसर का कब्जा लेने की कार्रवाई की जाएगी। मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने बताया कि शहर के राजबाग और करन नगर इलाकों में नज़ूल भूमि पर बने और किराया न चुकाने वाले कुछ अन्य प्रतिष्ठानों को भी बेदखली के नोटिस जारी किए गए हैं। पूरे जम्मू-कश्मीर में 58 हजार कनाल से अधिक सरकारी भूमि को नजूल भूमि के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें से हजारों कनाल ज़मीन दशकों पहले लीज़ पर दिए गए प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में आती है। इसमें जम्मू संभाग में 50 हजार कनाल से अधिक और कश्मीर संभाग में सात हजार कनाल से अधिक भूमि शामिल है। श्रीनगर और जम्मू शहरों में 5600 कनाल से अधिक नज़ूल भूमि पर व्यावसायिक प्रतिष्ठान स्थापित हैं। प्रशासन के इस नए अभियान ने शहर के व्यापारियों और लीज़ धारकों के बीच चिंता पैदा कर दी है, जिनमें से कई का दावा है कि उनके नवीनीकरण के आवेदन वर्षों से प्रशासन के पास लंबित पड़े हैं।
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