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कश्मीर में तेजी से बढ़ रहा नैतिक पतन, माता-पिता बच्चों पर रखें कड़ी नजर : ग्रैंड मुफ्ती
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने घाटी में तेजी से बढ़ते नैतिक पतन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अभिभावकों, धर्मगुरुओं और समाज से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा दिखाने के लिए शिक्षा, रोजगार और इस्लामी मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है।
ग्रैंड मुफ्ती ने कुछ गंभीर सामाजिक विकृतियों और युवतियों के गलत रास्तों पर जाने संबंधी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय इनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा बच्चों की गतिविधियों पर माता-पिता को नजर रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों पर शारीरिक दंड देने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें समझा-बुझाकर काउंसलिंग के जरिए सही और गलत का अंतर बताया जाना चाहिए। सामाजिक बुराइयों की जड़ में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का जिक्र करते हुए मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा कि युवाओं में बढ़ता तनाव और पारिवारिक दबाव उन्हें नशे तथा अन्य हानिकारक रास्तों की ओर धकेल रहा है। उन्होंने बैत-उल-माल, जकात और खैरात के पारदर्शी इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि उचित सत्यापन के बाद जरूरतमंदों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जानी चाहिए।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के ग्रैंड मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने घाटी में तेजी से बढ़ते नैतिक पतन पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने अभिभावकों, धर्मगुरुओं और समाज से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सही दिशा दिखाने के लिए शिक्षा, रोजगार और इस्लामी मूल्यों से जोड़ना बेहद जरूरी हो गया है।
ग्रैंड मुफ्ती ने कुछ गंभीर सामाजिक विकृतियों और युवतियों के गलत रास्तों पर जाने संबंधी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं को नजरअंदाज करने के बजाय इनकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा बच्चों की गतिविधियों पर माता-पिता को नजर रखनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चों पर शारीरिक दंड देने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि उन्हें समझा-बुझाकर काउंसलिंग के जरिए सही और गलत का अंतर बताया जाना चाहिए। सामाजिक बुराइयों की जड़ में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी का जिक्र करते हुए मुफ्ती नासिर-उल-इस्लाम ने कहा कि युवाओं में बढ़ता तनाव और पारिवारिक दबाव उन्हें नशे तथा अन्य हानिकारक रास्तों की ओर धकेल रहा है। उन्होंने बैत-उल-माल, जकात और खैरात के पारदर्शी इस्तेमाल पर जोर देते हुए कहा कि उचित सत्यापन के बाद जरूरतमंदों तक आर्थिक मदद पहुंचाई जानी चाहिए।
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