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केवल सरकारी खर्च से नहीं आएगी स्वच्छता, नागरिकों को खुद निभानी होगी जिम्मेदारी : मनदीप कौर
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संवाद न्यूज एजेंसी
श्रीनगर। आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त सचिव मनदीप कौर ने स्पष्ट किया है कि केवल भारी बजट खर्च करके स्वच्छता अभियानों को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक खुद अपनी जिम्मेदारी मानकर घरों में खाद बनाने जैसी आदतें नहीं अपनाएंगे, तब तक धरातल पर कोई स्थायी बदलाव नहीं आ सकता। श्रीनगर दौरे के दौरान उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए शुरू किए गए स्वच्छता इंटर्नशिप कार्यक्रम की जानकारी दी। इसका उद्देश्य बच्चों को स्वच्छता योद्धा बनाकर घरों में कचरा प्रबंधन की ठोस शुरुआत करना है।
आयुक्त सचिव ने कहा कि पिछले दस वर्षों से स्वच्छता पर लगातार विमर्श हो रहा है, लेकिन वास्तविक सवाल यह है कि कितने लोगों ने इसे अपने घरों में व्यावहारिक रूप से लागू किया है। उन्होंने बताया कि बच्चों के माध्यम से परिवारों के व्यवहार में बदलाव लाने के मकसद से जम्मू में इस इंटर्नशिप की शुरुआत की गई है, ताकि बच्चे अपने अभिभावकों को घरों और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित कर सकें। उन्होंने कहा कि जब तक घरेलू स्तर पर कचरे का निपटारा नहीं होगा, तब तक हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि श्रीनगर की 16-17 लाख की आबादी पर केवल 3,000 से 4,000 सफाई कर्मचारी हैं, ऐसे में हर काम के लिए नगर निगम पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने प्लास्टिक के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि पर्यटकों के मन में कश्मीर की छवि एक साफ-सुथरे प्रदेश के रूप में भी बनानी चाहिए।
श्रीनगर की राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि कचरा संग्रहण व्यवस्था बेहतर होने के बावजूद कचरा प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की कमी के चलते रैंकिंग प्रभावित होती रही है। शहर की सड़कों पर कचरा तो नहीं दिखता, लेकिन प्रसंस्करण की जटिल समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। अब इसका समाधान निकाल लिया गया है।
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श्रीनगर। आवास एवं शहरी विकास विभाग की आयुक्त सचिव मनदीप कौर ने स्पष्ट किया है कि केवल भारी बजट खर्च करके स्वच्छता अभियानों को सफल नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि जब तक आम नागरिक खुद अपनी जिम्मेदारी मानकर घरों में खाद बनाने जैसी आदतें नहीं अपनाएंगे, तब तक धरातल पर कोई स्थायी बदलाव नहीं आ सकता। श्रीनगर दौरे के दौरान उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए शुरू किए गए स्वच्छता इंटर्नशिप कार्यक्रम की जानकारी दी। इसका उद्देश्य बच्चों को स्वच्छता योद्धा बनाकर घरों में कचरा प्रबंधन की ठोस शुरुआत करना है।
आयुक्त सचिव ने कहा कि पिछले दस वर्षों से स्वच्छता पर लगातार विमर्श हो रहा है, लेकिन वास्तविक सवाल यह है कि कितने लोगों ने इसे अपने घरों में व्यावहारिक रूप से लागू किया है। उन्होंने बताया कि बच्चों के माध्यम से परिवारों के व्यवहार में बदलाव लाने के मकसद से जम्मू में इस इंटर्नशिप की शुरुआत की गई है, ताकि बच्चे अपने अभिभावकों को घरों और आसपास के क्षेत्र को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रेरित कर सकें। उन्होंने कहा कि जब तक घरेलू स्तर पर कचरे का निपटारा नहीं होगा, तब तक हजारों करोड़ रुपये खर्च करने का कोई नतीजा नहीं निकलेगा। उन्होंने कहा कि श्रीनगर की 16-17 लाख की आबादी पर केवल 3,000 से 4,000 सफाई कर्मचारी हैं, ऐसे में हर काम के लिए नगर निगम पर निर्भर नहीं रहा जा सकता। इसके साथ ही उन्होंने प्लास्टिक के इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए कहा कि पर्यटकों के मन में कश्मीर की छवि एक साफ-सुथरे प्रदेश के रूप में भी बनानी चाहिए।
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श्रीनगर की राष्ट्रीय स्वच्छता रैंकिंग पर चर्चा करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि कचरा संग्रहण व्यवस्था बेहतर होने के बावजूद कचरा प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) की कमी के चलते रैंकिंग प्रभावित होती रही है। शहर की सड़कों पर कचरा तो नहीं दिखता, लेकिन प्रसंस्करण की जटिल समस्या लंबे समय से बनी हुई थी। अब इसका समाधान निकाल लिया गया है।
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