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Ladakh: लद्दाख में इसरो ने किया हाई-एल्टीट्यूड एक्सपेरिमेंट, धरती पर अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों का परीक्षण
Tue, 14 Apr 2026 11:32 AM IST
Nikita Gupta
जैनब संधू, संवाद न्यूज एजेंसी, लेह
जैनब संधू, संवाद न्यूज एजेंसी, लेह
Published by: Nikita Gupta
Updated Tue, 14 Apr 2026 11:32 AM IST
सार
लद्दाख के उच्च-ऊंचाई क्षेत्र में इसरो ने ‘मिशन मित्र’ के तहत अंतरिक्ष जैसी परिस्थितियों में मानव व्यवहार और सहनशक्ति का सफल परीक्षण किया।
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लद्दाख में इसरो का मिशन मित्र
- फोटो : Protoplanet
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विस्तार
भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए इसरो ने लद्दाख में अपने उच्च-ऊंचाई अनुसंधान अभियान मिशन मित्र को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह पांच दिवसीय मिशन लेह के निकट लिकिर गांव के आसपास लगभग 4,000 मीटर की ऊंचाई पर संचालित किया गया, जिसका उद्देश्य गगनयात्री (अंतरिक्ष यात्रियों) और ग्राउंड टीम के प्रदर्शन का अध्ययन करना था।
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मिशन मित्र (अंतरोपयोगीता लक्षणों का मानचित्रण एवं प्रतिक्रिया मूल्यांकन) का उद्देश्य अंतरिक्ष मिशनों के दौरान आने वाली चुनौतियों जैसे हाइपोक्सिया (ऑक्सीजन की कमी), अत्यधिक ठंड, एकांत और सीमित संसाधन का यथासंभव वास्तविक अनुकरण करना था। इस मिशन से प्राप्त वैज्ञानिक डेटा भारत के महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम और भविष्य के दीर्घकालिक अंतरिक्ष अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
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यह मिशन इसरो और भारतीय वायु सेना के अंतर्गत इंस्टीट्यूट ऑफ एयरोस्पेस मेडिसिन द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किया गया, जबकि बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप प्रोटोप्लानेट ने इसकी लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की। पांच दिनों के दौरान प्रतिभागियों को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन से प्रेरित एक सख्त समय-सारिणी के तहत रखा गया, जिसमें हर गतिविधि सुबह उठने से लेकर मेडिकल डेटा लॉगिंग तक सटीक समय पर की गई।
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मिशन के बारे में जानकारी देते हुए इसरो के ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर के ग्रुप डायरेक्टर ए.के. सिन्हा ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य उच्च दबाव और अपरिचित परिस्थितियों में मानव व्यवहार का अध्ययन करना था। विभिन्न पृष्ठभूमि के लोगों को एक साथ रखकर उनकी आपसी समझ, अनुकूलन क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता का आकलन किया गया। उन्होंने कहा, यदि दल के सदस्य या ग्राउंड स्टाफ एक-दूसरे के साथ तालमेल नहीं बिठा पाते, तो मिशन में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
वास्तविक परिस्थितियों का अनुकरण करने के लिए सीमित भोजन और पानी, संचार में देरी, और अधूरी जानकारी जैसे कई चुनौतीपूर्ण परिदृश्य तैयार किए गए। प्रतिभागियों को संसाधनों का कुशल प्रबंधन करते हुए स्वतंत्र निर्णय लेने पड़े। इस दौरान रात का तापमान -11°C से -14°C तक पहुंच गया, जिससे परिस्थितियां और अधिक कठिन हो गईं।
पूरे मिशन की निगरानी डॉक्टरों, मनोवैज्ञानिकों और इंजीनियरों की एक विशेषज्ञ टीम द्वारा की गई, जबकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 24x7 बचाव दल तैनात रहा।
इसरो ने जोर दिया कि किसी भी मानव अंतरिक्ष मिशन की सफलता के लिए तकनीकी तैयारी के साथ-साथ संचार कौशल, मानसिक दृढ़ता, टीमवर्क और तनाव प्रबंधन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। लद्दाख का उच्च-ऊंचाई वाला क्षेत्र इस प्रकार के परीक्षणों के लिए एक आदर्श प्राकृतिक प्रयोगशाला के रूप में उभर रहा है।
आगे की योजनाओं के तहत इसरो इस वर्ष के अंत में त्सो कार स्थित हार्ड एनालॉग स्टेशन पर एक और मिशन आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। मिशन मित्र के निष्कर्षों का विश्लेषण करने में समय लगेगा और इन्हें आंतरिक उपयोग के साथ-साथ प्रतिष्ठित वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित किया जाएगा।
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन की दिशा में बढ़ते कदमों के बीच, मिशन मित्र जैसे प्रयास यह दर्शाते हैं कि देश तकनीकी क्षमता के साथ-साथ मानव सहनशक्ति को भी सुदृढ़ कर अंतरिक्ष अन्वेषण की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार है।