{"_id":"590f41754f1c1b4754850de1","slug":"forest-fire-near-the-village","type":"story","status":"publish","title_hn":"गांव के पास पहुंची जंगल की आग, रात पर जगे ग्रामीण ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गांव के पास पहुंची जंगल की आग, रात पर जगे ग्रामीण
ब्यूरो/अमर उजाला श्रीनगर।
Updated Sun, 07 May 2017 09:17 PM IST
विज्ञापन
अलकनंदा घाटी में चौरास पट्टी में केंद्रीय गढ़वाल विवि के आवासीय परिसर के समीप लगी आग
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विकास खंड कीर्तिनगर के सिल्काखाल क्षेत्र के जंगलों में धधकती आग शनिवार को तेजी से गांव तक आ पहुंची। भय से ग्रामीण रात भर जगे रहे। विभागीय कर्मी आग पर काबू पाने की कोशिश में जुटे है लेकिन आग की लपटें एक जंगल से दूसरे जंगलों तक तेजी से फैल रही है। एक सप्ताह में अब तक क्षेत्र के 5 हेक्टेयर जंगल आग की भेंट चढ़ चुके है।
विज्ञापन
सिल्काखाल क्षेत्र के महेंद्र व जयधार के जंगल शनिवार को आग से धधक उठे। देर रात जंगल की आग गांव के पास तक पहुंच गई। इससे चिंतित ग्रामीण रात भर नहीं सो पाए। ग्रामीण राजेंद्र सिंह रौथाण ने बताया कि ग्रामीण रात भर गांव की व खेतों में रखी चारापत्ति आदि की सुरक्षा करते रहे। गनीमत रही कि इस दौरान किसी जान माल का नुकसान नहीं हुआ। वहीं चोनीखाल के समीप के जंगल भी विगत कई दिनों से धधक रहे है। विभाग की माने तो दिन को जंगलों की आग बुझा ली जाती है, लेकिन रात को हवा से फिर आग सुलग जा रही है।
विज्ञापन
चट्टानी हिस्सों की आग बुझाना मुश्किल
आग की लपटें एक जंगल से दूसरे जंगल में तेजी से फैल रही है। ऐसे में विभाग कर्मियों के एक जंगल की आग पर काबू पाते ही दूसरे जंगल धधक लग रहे है। वहीं जंगल के कुछ चट्टानी हिस्से ऐसे जहां कर्मी नहीं पहुंच पा रहे है। संसाधन न होने से इन चट्टानी हिस्सों की आग पर काबू पाना विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है।
विज्ञापन
चीड़ की छेती जंगलों पर बरपा रहे कहर
सिल्काखाल क्षेत्र के जयधार, महेंद्र गांव, विवि के चौरास परिसर के समीप, चुन्नी खाल व सेंद्री के जंगलों तथा देवप्रयाग के दशरथाचंल, धरीपोखरी के जंगलों के धधकने से गर्म हवा चल रही है, जिससे आस पास के क्षेत्रों का पारा चढ़ गया है। संसाधनों के अभाव की मार झेल रहा वन विभाग मात्र झापा के सहारे ही आग बुझाने के प्रयास में लगा है। जंगलों की आग को फैलाने में सबसे बड़ा कारण चीड़ के छेती का है। पहाड़ी के ऊपरी भागों में फैले चीड़ के जंगलों में लगी आग से जमीन में गिरे चीड़ के छेती भी सुलग कर पहाड़ी के निचले ढालों की ओर गिर रही है। इस कारण आग कई जगहों पर तेजी से फैल रही है।
सिल्काखाल क्षेत्र में आग बुझाने में 15 कर्मी लगे है। बार-बार जंगलों में आग लगने का मुख्य कारण चीड़ के छेती है। जंगल में जब तक एक जगह आग बुझाई जा रही है। तब तक चीड़ के छेती दूसरी ओर आग सुलगा रहे है। आग बुझाते समय जंगल में जल रही लकड़ियों के ऊपर मिट्टी डाली जा रही है ताकि आग न फैले लेकिन चीड़ के जंगल और छेती समस्या पैदा कर रहे है।
प्रबोध पांडे, विभाग के रेंज अधिकारी