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J&K Election: यूसुफ तारिगामी ने जम्मू कश्मीर में चुनाव न होने पर केंद्र से मांगा स्पष्टीकरण
Fri, 12 Aug 2022 01:56 PM IST
kumar गुलशन कुमार
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
Published by: kumar गुलशन कुमार
Updated Fri, 12 Aug 2022 01:56 PM IST
सार
माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने कहा कि अगर केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो उसे भारत के लोगों को ऐसा न करने का कारण बताना चाहिए।
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युसूफ तारिगामी (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
श्रीनगर में माकपा नेता मोहम्मद यूसुफ तारिगामी ने केंद्र से देश के लोगों को विश्वास में लेने और यह बताने के लिए कहा कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव वादे के मुताबिक क्यों नहीं हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक केंद्र शासित प्रदेश के मौजूदा ढांचे के तहत चुनाव जम्मू-कश्मीर के सभी 'मुसीबतों' के लिए रामबाण नहीं हैं, एक निर्वाचित सरकार लोगों को कुछ राहत प्रदान करेगी।
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यूसुफ तारिगामी जोकि पीपुल्स अलायन्स फॉर गुपकार डिक्लेरेशन (पीएजीडी) के प्रवक्ता भी हैं, ने कहा कि केंद्र की वर्तमान सरकार यह दावा करती है कि जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति लौट आई है और सभी गलतियां ठीक कर दी गई हैं। फिर, चुनाव में देरी क्यों हो रही है? उन्होंने कहा कि पहले बहाना दिया गया था कि चुनाव से पहले परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जानी थी। उन्होंने अपने एजेंडे का पालन करने के लिए निर्वाचन क्षेत्रों को फिर से तैयार करते हुए हरकिरी (आत्महत्या) की। फिर भी, वे चुनाव कराने की स्थिति में नहीं हैं।
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माकपा नेता ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सदन के पटल पर जम्मू-कश्मीर में न केवल चुनाव कराने बल्कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रतिबद्ध किया है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार चुनाव कराने में सक्षम नहीं है, तो उसे भारत के लोगों को ऐसा न करने का कारण बताना चाहिए।
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बता दें नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को कहा था कि अनुच्छेद 370 को रद्द करने और परिसीमन आयोग के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों को 'जैरीमेंडरिंग' (चुनाव से पहले की चालबाजी बनाना) करने के बाद भी भाजपा में मतदाताओं का सामना करने की हिम्मत नहीं है। उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल पर किए गए ट्वीट में लिखा 'अनुच्छेद 370 को पूरी तरह से कमजोर करना, जम्मू-कश्मीर राज्य का विभाजन और डाउनग्रेडिंग, एक सीमित परिसीमन आयोग के माध्यम से निर्वाचन क्षेत्रों का जेरीमैंडरिंग, सुरक्षा को वापिस लेकर नेशनल कांफ्रेंस जैसी पार्टियों की मूवमेंट और गतिविधियों को कम करना और अभी भी भाजपा जम्मू-कश्मीर में मतदाताओं का सामना करने की हिम्मत नहीं है।'
गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में इस साल विधानसभा चुनाव होने की संभावना नहीं है क्योंकि चुनाव आयोग ने अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख 25 नवंबर निर्धारित की है।