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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Bappa enshrined with great fanfare in Kashmir temples conch shells and gongs resounded

खौफ पर भारी नजर आई भक्ति: मंदिरों में धूमधाम से विराजे बप्पा, गूंजे शंख और घड़ियाल, धमकियों के बीच गणेश धुन

Tue, 15 Sep 2026 01:02 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर
अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर Published by: Digvijay Singh Updated Tue, 15 Sep 2026 01:02 AM IST
सार

घाटी में गूंजते शंख और घंटियों की मधुर ध्वनि इस बात की गवाही दे रही है कि आस्था किसी भी खौफ या खतरे से कहीं ऊपर है। 

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Bappa enshrined with great fanfare in Kashmir temples conch shells and gongs resounded
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

घाटी में गूंजते शंख और घंटियों की मधुर ध्वनि इस बात की गवाही दे रही है कि आस्था किसी भी खौफ या खतरे से कहीं ऊपर है। कश्मीरी हिंदुओं को मिल रही लगातार आतंकी धमकियों के बावजूद सोमवार को कश्मीर के मंदिरों में गणेश चतुर्थी का जो उल्लास देखने को मिला उसने यह साफ कर दिया कि यहां के लोगों की श्रद्धा डिगने वाली नहीं है। खौफ पर भक्ति भारी नजर आई और पूरा माहौल गणपति बप्पा मोरिया के जयकारों से गूंज उठा।

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गणेश चतुर्थी, जिसे कश्मीर में स्थानीय लोग विनायक त्चोरम पन पूजा के नाम से पुकारते हैं, की रौनक श्रीनगर के ऐतिहासिक गणपत्यार, इंदिरा नगर और कुलगाम के वेस्सू में विशेष रूप से देखने को मिली। श्रीनगर के हब्बाकदल स्थित कश्मीर के सबसे प्राचीन गणपत्यार के सिद्धि विनायक मंदिर में सुबह-सुबह मंत्रोच्चार और हवन के बीच एक अलग ही ऊर्जा महसूस की गई। श्रीनगर के उपायुक्त अक्षय लाबरू ने हवन में पूर्णाहुति देकर बप्पा की प्रतिमा की स्थापना की। सात दिनों तक चलने वाले इस अनुष्ठान का समापन 20 सितंबर को विसर्जन के साथ होगा।
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खौफ के दौर में भी नहीं टूटी परंपरा
कश्मीरी पंडित मोहित भान बताते हैं कि 90 के दशक के उस सबसे भयानक और कठिन दौर में भी, जब घाटी से बड़े पैमाने पर पलायन हुआ, यहां रह रहे कश्मीरी पंडितों और प्रबंध समिति ने पूजा की इस पावन परंपरा को कभी टूटने नहीं दिया। दिलचस्प बात यह है कि कश्मीर में मूर्तिकार न होने के कारण बप्पा की इको-फ्रेंडली प्रतिमा विशेष रूप से पुणे से लाई जाती है। इस वर्ष भी इन तीनों प्रमुख स्थानों पर समारोह के लिए श्री भाऊ साहेब रंगारी ट्रस्ट पुणे के अध्यक्ष पुनीत बालन के सहयोग से यह भव्य आयोजन किया जा रहा है।
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महाराजा गुलाब सिंह के स्वप्न से जुड़ा है इतिहास
इस मंदिर का इतिहास बेहद रोचक और चमत्कारी है। स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, महाराजा गुलाब सिंह को स्वप्न में भगवान गणेश ने दर्शन देकर झेलम दरिया के किनारे से प्रतिमा निकालने का संकेत दिया था। इसके बाद दरिया के घाट पर यह मूर्ति स्थापित की गई। दरिया के घाट को कश्मीरी भाषा में यारबल कहा जाता है। इसी कारण इस स्थान का नाम गणपत्यार पड़ा। एक समय था जब कश्मीरी पंडित इस घाट को गंगा के समान पवित्र मानकर यहां स्नान करते थे और शिवरात्रि का कलश भरने के लिए भी यहीं से जल ले जाया जाता था।


सपने में आए बप्पा और अर्पित हुआ मुकुट
इस बार बप्पा की प्रतिमा एक और खास वजह से चर्चा में है। एक श्रद्धालु महिला ने बताया कि कश्मीरी पंडित इंदरजी को स्वप्न में स्वयं बप्पा ने दर्शन देकर मुकुट बनवाने के लिए कहा था। इसी अद्भुत स्वप्न के बाद प्रतिमा के लिए एक विशेष मुकुट तैयार कराया गया, जिसे सोमवार को पूरे विधि-विधान के साथ भगवान गणेश के शीश पर सुशोभित कर दिया गया।

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