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Srinagar News: जान जोखिम में डाल लकड़ी का फट्टा रखकर अधूरे पुल से गुजरते हैं लोग
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बांदीपोरा में लकड़ी का पट्टा लगाकर अधूरे पुल से गुजरते लोग। संवाद
- हर समय मंडरा रहा हादसे का खतरा, बांदीपोरा और गांदरबल जिलों को जोड़ता पुल
- झेलम नदी पर बनाया जा रहा पैदल शादीपोरा पुल 13 साल बाद भी अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। जिले के शादीपोरा-सुंबल क्षेत्र में झेलम नदी पर बन रहा पैदल पुल का निर्माण 13 साल से अधूरा पड़ा है। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जान जोखिम में डालकर लकड़ी का फट्टा रखकर अधूरे पुल से गुजरने को मजबूर हैं। इससे हर समय हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि परियोजना अभी पूरी तरह से कार्यात्मक नहीं है क्योंकि दो प्रवेश सीढ़ियां अधूरी हैं। लोगों का कहना है कि एक बार ये सीढ़ियां बन जाएंगी तो पुल सार्वजनिक उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा जिससे लोग सुरक्षित और आराम से नदी पार कर सकेंगे। यह पैदल पुल बांदीपोरा और गांदरबल जिलों को जोड़ता है। इतना ही नहीं यह संपर्क उन हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो काम, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए झेलम नदी पार करने के लिए इस पर निर्भर हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों को लंबित कार्य के बारे में सूचित किया है लेकिन उनकी अपीलों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने परियोजना की सरकारी उपेक्षा पर निराशा व्यक्त की जिसे उन्होंने दैनिक आवागमन और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताया। लोगों ने एक बार फिर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने डीसी इंदु कंवल चिब से व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच करने की मांग की। साथ ही यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि लंबित परियोजना बिना देरी के पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि पूरा होना पुल का निर्माण आम जनता के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आएगा और वर्षों की मुश्किलों का अंत करेगा।
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वहीं इस संबंध में आरएंडबी विभाग के अधिकारी ने बताया कि यह पुल अभी निर्माणाधीन है। दो केबल अभी तक लगानी बाकी हैं। शेष काम के लिए तकनीकी विशेषज्ञ लगे हुए हैं। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि परियोजना विभागीय निगरानी में चल रही है और इसे 20 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है।
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- झेलम नदी पर बनाया जा रहा पैदल शादीपोरा पुल 13 साल बाद भी अधूरा
संवाद न्यूज एजेंसी
बांदीपोरा। जिले के शादीपोरा-सुंबल क्षेत्र में झेलम नदी पर बन रहा पैदल पुल का निर्माण 13 साल से अधूरा पड़ा है। इससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लोग जान जोखिम में डालकर लकड़ी का फट्टा रखकर अधूरे पुल से गुजरने को मजबूर हैं। इससे हर समय हादसे का खतरा मंडराता रहता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का लगभग 90 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि परियोजना अभी पूरी तरह से कार्यात्मक नहीं है क्योंकि दो प्रवेश सीढ़ियां अधूरी हैं। लोगों का कहना है कि एक बार ये सीढ़ियां बन जाएंगी तो पुल सार्वजनिक उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएगा जिससे लोग सुरक्षित और आराम से नदी पार कर सकेंगे। यह पैदल पुल बांदीपोरा और गांदरबल जिलों को जोड़ता है। इतना ही नहीं यह संपर्क उन हजारों लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो काम, शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल और अन्य आवश्यक जरूरतों के लिए झेलम नदी पार करने के लिए इस पर निर्भर हैं।
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स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि उन्होंने कई बार उच्च अधिकारियों को लंबित कार्य के बारे में सूचित किया है लेकिन उनकी अपीलों को गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने परियोजना की सरकारी उपेक्षा पर निराशा व्यक्त की जिसे उन्होंने दैनिक आवागमन और कनेक्टिविटी के लिए महत्वपूर्ण बताया। लोगों ने एक बार फिर जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने डीसी इंदु कंवल चिब से व्यक्तिगत रूप से मामले की जांच करने की मांग की। साथ ही यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया कि लंबित परियोजना बिना देरी के पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि पूरा होना पुल का निर्माण आम जनता के लिए महत्वपूर्ण राहत लेकर आएगा और वर्षों की मुश्किलों का अंत करेगा।
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वहीं इस संबंध में आरएंडबी विभाग के अधिकारी ने बताया कि यह पुल अभी निर्माणाधीन है। दो केबल अभी तक लगानी बाकी हैं। शेष काम के लिए तकनीकी विशेषज्ञ लगे हुए हैं। अधिकारी ने आश्वासन दिया कि परियोजना विभागीय निगरानी में चल रही है और इसे 20 मार्च तक पूरा होने की उम्मीद है।