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Srinagar News: एलओसी से सटे गांवों में जाकर लोगों की खैरियत पूछ रहे सेना के जवान
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बांदीपोरा में खैरियत पेट्रोल के दौरान लोगों की खैरियत लेते सेना के जवान। संवाद
- सर्दियों में बर्फबारी की तैयारियों से लोगों जुड़ी चिंताएं दूर करने में जुटी सेना की खैरियत पेट्रोलिंग टीम
- स्थानीय लोगों ने ली एक राहत की सांस, सेना की पहल की सराहना की
भट शहजाद
बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) से सटी गुरेज घाटी में सीमावर्ती इलाकों में सेना के जवानों की एक टोली स्थानीय लोगों की खैर-खैरियत पूछते नजर आई।
सामान्य पेट्रोलिंग की तरह हाथों में हथियार लिए जवानों ने एक बुजुर्ग के गले लगकर पूछा, चाचा क्या हाल है ... सर्दियों में यहां रुकोगे या नीचे जाओगे ? मुस्कुराते हुए चाचा बोले, नहीं यहीं रहूंगा। सैन्य अधिकारी ने कहा, सर्दियों का स्टॉक जमा कर लिया है लकड़ियां, राशन, आदि। कोई दिक्कत आए तो हमें बताना। यह सेना की खैरियत पेट्रोलिंग टीम है जो स्थानीय लोगों के बीच जाकर उनकी खैर-खैरियत पूछ रही है ताकि उन्हें किसी चीज की जरूरत पड़ने पर उन्हें उपलब्ध कराई जा सके।
बता दें कि आने वाले दिनों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। चिल्लेकलां के 40 दिन भी शुरु हो रहे हैं। इससे पहले सेना की राणा बटालियन के अधिकारी और जवान जिले के गांव-गांव जाकर लोगों से उनका हाल पूछ रहे हैं और उनके द्वारा सर्दियों के लिए की गई तैयारियों के बारे में भी पूछ रहे हैं। इतना ही नहीं वो उन्हें आश्वासन भी दे रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर वह हमेशा उनके साथ हैं।
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इस दौरान स्थानीय लोगों ने सर्दियों की तैयारियों से जुड़ी चिंताएं बताईं जिसमें भारी बर्फबारी और लंबे समय तक अलग-थलग रहने के दौरान जरूरी चीजों तक पहुंच शामिल थी। सेना के जवानों ने धैर्य से शिकायतें सुनीं और ग्रामीणों को संबंधित सिविल अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। खास बात यह है कि भारी बर्फबारी के कारण हर सर्दी में गुरेज घाटी कम से कम तीन से चार महीने तक बाकी दुनिया से कटी रहती है जिससे सीमावर्ती निवासियों के लिए पहले से तैयारी करना बहुत जरूरी हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने सेना के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जब कभी भी हमें जरूरत पड़ती है तो जवान हर समय मदद के लिए तैयार रहते हैं। एक स्थानीय मोहम्मद सुल्तान ने कहा कि सेना के जवान घर-घर जाकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं और सर्दियों से पहले इमरजेंसी के समय पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाते हैं। उन्होंने राणा बटालियन की इस पहल की भी तारीफ की कि वे सीधे समुदाय से जुड़कर लोगों की चिंताओं को पहले से ही दूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से एलओसी के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा और भरोसे की भावना आती है।
सुल्तान ने आगे कहा कि खैरियत पेट्रोलिंग टीम न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने के लिए सेना की वचनबद्धता को दर्शाती है बल्कि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की भलाई और कल्याण के प्रति भी उसकी प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने कहा, हमारे लिए तो सेना के जवान ही हैं जो खुशी और गम में हमारे साथ हैं। संवाद
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- स्थानीय लोगों ने ली एक राहत की सांस, सेना की पहल की सराहना की
भट शहजाद
बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले में लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) से सटी गुरेज घाटी में सीमावर्ती इलाकों में सेना के जवानों की एक टोली स्थानीय लोगों की खैर-खैरियत पूछते नजर आई।
सामान्य पेट्रोलिंग की तरह हाथों में हथियार लिए जवानों ने एक बुजुर्ग के गले लगकर पूछा, चाचा क्या हाल है ... सर्दियों में यहां रुकोगे या नीचे जाओगे ? मुस्कुराते हुए चाचा बोले, नहीं यहीं रहूंगा। सैन्य अधिकारी ने कहा, सर्दियों का स्टॉक जमा कर लिया है लकड़ियां, राशन, आदि। कोई दिक्कत आए तो हमें बताना। यह सेना की खैरियत पेट्रोलिंग टीम है जो स्थानीय लोगों के बीच जाकर उनकी खैर-खैरियत पूछ रही है ताकि उन्हें किसी चीज की जरूरत पड़ने पर उन्हें उपलब्ध कराई जा सके।
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बता दें कि आने वाले दिनों में बर्फबारी की संभावना जताई गई है। चिल्लेकलां के 40 दिन भी शुरु हो रहे हैं। इससे पहले सेना की राणा बटालियन के अधिकारी और जवान जिले के गांव-गांव जाकर लोगों से उनका हाल पूछ रहे हैं और उनके द्वारा सर्दियों के लिए की गई तैयारियों के बारे में भी पूछ रहे हैं। इतना ही नहीं वो उन्हें आश्वासन भी दे रहे हैं कि जरूरत पड़ने पर वह हमेशा उनके साथ हैं।
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इस दौरान स्थानीय लोगों ने सर्दियों की तैयारियों से जुड़ी चिंताएं बताईं जिसमें भारी बर्फबारी और लंबे समय तक अलग-थलग रहने के दौरान जरूरी चीजों तक पहुंच शामिल थी। सेना के जवानों ने धैर्य से शिकायतें सुनीं और ग्रामीणों को संबंधित सिविल अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाकर हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। खास बात यह है कि भारी बर्फबारी के कारण हर सर्दी में गुरेज घाटी कम से कम तीन से चार महीने तक बाकी दुनिया से कटी रहती है जिससे सीमावर्ती निवासियों के लिए पहले से तैयारी करना बहुत जरूरी हो जाता है।
स्थानीय लोगों ने सेना के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि जब कभी भी हमें जरूरत पड़ती है तो जवान हर समय मदद के लिए तैयार रहते हैं। एक स्थानीय मोहम्मद सुल्तान ने कहा कि सेना के जवान घर-घर जाकर लोगों की शिकायतें सुनते हैं और सर्दियों से पहले इमरजेंसी के समय पूरा समर्थन देने का भरोसा दिलाते हैं। उन्होंने राणा बटालियन की इस पहल की भी तारीफ की कि वे सीधे समुदाय से जुड़कर लोगों की चिंताओं को पहले से ही दूर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से एलओसी के दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों में सुरक्षा और भरोसे की भावना आती है।
सुल्तान ने आगे कहा कि खैरियत पेट्रोलिंग टीम न सिर्फ सीमाओं की रक्षा करने के लिए सेना की वचनबद्धता को दर्शाती है बल्कि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों की भलाई और कल्याण के प्रति भी उसकी प्रतिबद्धता को दिखाती है। उन्होंने कहा, हमारे लिए तो सेना के जवान ही हैं जो खुशी और गम में हमारे साथ हैं। संवाद