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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Srinagar News ›   Among the culprits of Pahalgam, two are Pakistanis and one is from the valley, reward of Rs 20 lakh.

Kashmir Terrorist Attack : पहलगाम के गुनहगारों की हुई पहचान, दो पाकिस्तानी और एक घाटी का, 20-20 लाख का इनाम

Fri, 25 Apr 2025 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर
अमर उजाला नेटवर्क, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 25 Apr 2025 05:22 AM IST
सार

हमलावरों में पाकिस्तान का हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान और अली भाई उर्फ तल्हा भाई के साथ ही अनंतनाग जिले का अब्दुल हुसैन थोकर शामिल था, पुलिस ने इनकी पहचान उजागर की।

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Among the culprits of Pahalgam, two are Pakistanis and one is from the valley, reward of Rs 20 lakh.
तीनों आतंकियों की जारी की गई तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पहलगाम हमले में पाकिस्तानी आतंकियों के साथ स्थानीय आतंकी भी शामिल था। जारी किए गए तीन आतंकियों के स्केच की पहचान कर ली गई है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने तीनों की पहचान उजागर की है। तीनों आतंकी लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े हैं। 

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इसमें पाकिस्तानी हाशिम मूसा उर्फ सुलेमान और अली भाई उर्फ तल्हा भाई के साथ ही जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले का निवासी अब्दुल हुसैन थोकर शामिल है। तीनों के कोड नेम- मूसा, यूनुस और आसिफ थे। तीनों पुंछ में आतंकवादी घटनाओं में शामिल थे। तीनों पर 20-20 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
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अधिकारियों के अनुसार मृतक पर्यटकों में से एक की पत्नी के पहचान करने पर बिजबिहाड़ा निवासी आदिल थोकर उर्फ आदिल गुरी की भूमिका सामने आई है। पुलिस के अनुसार आतंकियों की सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी। बायसरन हमले की लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) ने इसकी जिम्मेदारी ली थी। 
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प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नरसंहार करने वाले आतंकवादियों की संख्या पांच से सात तक हो सकती है और उन्हें पाकिस्तान में प्रशिक्षित दो स्थानीय लोगों से सहायता मिली थी। बता दें कि एनआईए भी इस मामले की जांच कर रही है।

सीमा पर तनाव बढ़ने और कुछ बड़ा होने की आशंका से घिरे लोग
पहलगाम में पर्यटकों पर हमले और केंद्र सरकार के सख्त फैसलों के बाद सीमावर्ती इलाकों के लोग तनाव बढ़ने की आशंका से घिरे हैं। हीरानगर, पुंछ, अरनिया, आरएसपुरा समेत जम्मू व श्रीनगर संभाग के सीमावर्ती इलाकों में लोगों के भीतर खौफ भी बढ़ा है और प्रशासन की हलचल भी। वहीं सर्च ऑपरेशन भी तेज हुए हैं। लोग कुछ बड़ा होने की आशंका से घिरे हैं। 

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, सीमा पर बीएसएफ की गतिविधियां भी बढ़ी हैं। कई इलाकों में लगे मोर्टार की सफाई भी करते देखे गए हैं जवान। सीमा सुरक्षा बल के जवानों और प्रशासन ने ग्रामीणों के साथ बैठकें करनी शुरू कर दी हैं। इन सब आशंकाओं के बीच अमर उजाला की टीम ने सीमावर्ती इलाकों के लोगों से बात की और उनकी आशंकाओं और चिंताओं को जाना। पेश है अमर उजाला टीम की एक रिपोर्ट।

बीते चार साल से सुकून था...पर अब अनहोनी डरा रही
सीमावर्ती पुंछ जिले में सावजियां से लेकर बालाकोट तक की 110 किमी लंबी नियंत्रण रेखा पर बसे गांवों में रहने वाले ग्रामीण कुछ बड़ा होने की आशंका से ग्रस्त हैं। नियंत्रण रेखा पर बन रहे इन हालातों के वे पाकिस्तान को ही कोस रहे हैं।

नियंत्रण रेखा पर स्थित गांव जलास सलोत्री, जिनके बीच पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्र तेत्रिनोट की मात्र 100 मीटर दूरी है, दोनों के बीच केवल पुलस्तय नदी बह रही है। इन गांव के ग्रामीण केतन बाली, पुरुषोत्तम लाल, शादी लाल, लक्की कुमार, अमन डाबर आदि का कहना है कि पिछले चार वर्षों से नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी बंद होने से हम लोग काफी सुकून में थे। 

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गांव में विकास भी तेजी से हो रहा था। पिछले एक महीने से पाकिस्तानी सेना की तरफ से हमारे क्षेत्र में दो से तीन बार गोलीबारी की घटना को अंजाम दिया गया था, तो हमें हालात बिगड़ने की शंका होने लगी थी। कहते हैं कि एक बार पाकिस्तान के साथ आर-पार की जंग जरूरी है। कारगिल के समय हम लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा था। केतन बाली का कहना है कि अब तो केंद्र सरकार ने गांव में अच्छी खासी संख्या में बंकर बनवाए हैं, जिससे अब हम लोग गांव में भी सुरक्षित रह सकते हैं।

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