इंतजार खत्म: 55 दिनों के सन्नाटे के बाद कश्मीर में लौटी रौनक, पहलगाम हमले के बाद पहली बार खुले ये..पर्यटन स्थल
जम्मू-कश्मीर में उपराज्यपाल के निर्देश पर सुरक्षा व्यवस्था के बीच 55 दिनों बाद पहलगाम, श्रीनगर और अनंतनाग सहित आठ पर्यटन स्थल दोबारा खोल दिए गए हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इंतजार आज खत्म हुआ। बंद पड़े प्रदेश के पर्यटन स्थलों और पार्कों को आज खोल दिया गया है। पहले चरण में जम्मू व कश्मीर संभाग के आठ-आठ पर्यटन स्थलों को खोला गया । इसका आदेश बीते शनिवार को उपराज्यपाल ने दिया था। वे अमरनाथ तैयारियों का जायजा ले रहे थे और इसी दौरान पहलगाम बेस कैंप गए थे।
उन्होंने जिन स्थलों को खोलने का आदेश दिया था, उसमें कश्मीर संभाग की बेताब घाटी, पहलगाम बाजार के पास के पार्क, अनंतनाग के वेरीनाग, कोकरनाग और अच्छाबल बार्क शामिल हैं। इसके अलावा श्रीनगर में बादामवारी पार्क, निगीन के पास डक पार्क, हजरतबल के पास तकदीर पार्क खोले जाएंगे। जम्मू संभाग में कठुआ का सरथल और धागर, रियासी में देवी पिंडी, सैयद बाबा और सुला पार्क, डोडा में गुलडंडा व जय घाटी और उधमपुर में पंचेरी शामिल हैं।
कश्मीर में पहलगाम हमले के बाद बंद श्रीनगर, पहलगाम और अनंतनाग के आठ स्थल आज खाेले गए। अमर उजाला की टीम ने सभी स्थलों का जायजा लिया। लगभग सभी स्थल खुले मिले।
बादामवाड़ी पार्क में लौटी रौनक
श्रीनगर में बादामवाड़ीपार्क, निगीन में डक पार्क और हजरतबल में तकदीर पार्क को मंगलवार को खोला गया। अमर उजाला टीम बादामवारी पार्क पहुंची तो यहां दरवाजा खुला था। यहां मौजूद लोगों ने बताया कि इस पार्क में पहले पर्यटक और स्थानीय लोग आते थे। बंद होने के बाद स्थानीय लोग सुबह की सैर के लिए भी नहीं आ पा रहे थे। फिर से खाेलने के फैसले से हम खुश हैं। निगीन में डक पार्क और हजरतबल में तकदीर पार्क पर्यटकों के लिए बंद हैं, लेकिन स्थानीय लोग यहां सैर करने के लिए आते हैं। मंगलवार से यह पर्यटकों के लिए खुल गए।
पहलगाम में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। यहां सुरक्षाकर्मी तो बढ़ाए ही गए हैं, ड्रोन से भी निगरानी की जा रही है। सोमवार को यहां चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात दिखाई दिए। बेताब घाटी में ड्रोन से सर्च ऑपरेशन चल रहा था, वहीं आसपास के पार्कों में भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। यहां थोड़े-बहुत ही पर्यटक आ रहे हैं, घाटी के खुल जाने के बाद पर्यटकों के बढ़ने की उम्मीद है।
अनंतनाग में पर्यटकों का इंतजार खत्म हुआ
बेरीनाग, कोकरनाग और अच्छाबल पार्कों को खोल दिया गया। सोमवार को जब अमर उजाला टीम पहुंची थी तो तीनों पार्कों में सन्नाटा नजर आया। यहां के लोगों का कहना था कि जब से पार्क बंद हुए हैं, यही हाल है। उन्हें पार्कों के फिर से खुलने की खुशी है। उम्मीद है कि अब फिर से यहां पर्यटक आएंगे। उनका स्वागत करने के लिए हम बेहद उत्साहित हैं।
सरथल और ढग्गर में शुरू हुआ पर्यटन
पर्यटक बोले-सुविधाएं बढ़ाई जाएंकठुआ। जम्मू-कश्मीर के सरथल और ढग्गर पर्यटन स्थलों पर हाल ही में पर्यटकों की आवाजाही शुरू हो गई है। प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर ये इलाके अब लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं, लेकिन आधारभूत सुविधाओं की कमी अब भी बड़ी समस्या बनी हुई है।
पर्यटक दूर-दूर से यहां पहुंच तो रहे हैं, लेकिन सड़क, मोबाइल नेटवर्क, ठहरने की व्यवस्था और सफाई जैसी सुविधाओं की कमी से उन्हें कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली से बनी घूमने आए अजय शर्मा ने कहा कि सरथल का नजारा बेहद खूबसूरत है। इसके बाद उन्होंने ढग्गर के बारे में सुनकर हमने वहां का रूख किया लेकिन वहां जाने के रास्ते खराब हैं। मोबाइल नेटवर्क बिल्कुल नहीं मिलता। जम्मू से आईं निधि कौर ने कहा कि ढग्गर की हरियाली और झरना बहुत अच्छा लगा, लेकिन वहां आवासीय और शौचालय आदि सुविधाएं बिल्कुल नहीं हैं।
अमित कुमार ने कहा कि यहां की वादियां कमाल की हैं, लेकिन अधूरी सड़कें सफर में जल्दी थका देतीं हैं। सरकार को सड़क और संचार सेवा समेत सभी सुविधाएं बढ़ानी चाहिए। स्थानीय लोगों ने सरकार से इन स्थलों पर जरूरी सुविधाएं जल्द विकसित करने की मांग की है ताकि पर्यटन को बढ़ावा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल सकें।
सुला पार्क भी कर रहा सैलानियों का इंतजार
कटड़ा मार्ग पर स्थित सुला पार्क में स्थानीय लोग तो आते ही है वहीं श्री माता वैष्णो देवी कटरा से श्री शिवखोड़ी धाम की तरफ आने जाने वाले वाहन भी रुकते है। श्रद्धालु पार्क में पहुंच जहां की सुंदरता के प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेते है। पार्क के भीतर ठंडे पानी के टीम स्विमिंग पुल भी बने है जिन का पानी काफी ठंडा है इस में नहाने से लोग गर्मी से राहत पाते है। जारी गर्मियों में पार्क में काफी लोग आते है जिस में स्थानीय लोग भी काफी संख्या में होते है।