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अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा हर पहाड़ी का जन्मसिद्ध अधिकार :
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राजोरी। पहाड़ी कार्यकर्ता अमित शर्मा ने सोमवार को केंद्र सरकार से पहाड़ी जनजाति के लोगों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग की। कहा कि केंद्र सरकार ने पहाड़ी लोगों को एसटी का दर्जा देने के खोखले वादे किए। जमीन पर कुछ भी ठोस नहीं किया।
हमारी मांग को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उनके शासन में 4 प्रतिशत आरक्षण पहले जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी लोगों को दिया गया था। हमने मोदी सरकार को यह आरक्षण प्रदान करने का धन्यवाद दिया। पहाड़ी समुदाय और हमें पूरा विश्वास है कि यह शासन पहाड़ी लोगों की लंबे समय से लंबित और वास्तविक मांग को पूरा करेगा और उन्हें अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण प्रदान करेगा। शर्मा ने कहा कि पहाड़ी जनजाति के लोग राजोरी, पुंछ, करनाह, उड़ी, अनंतनाग, बारामुला और कुपवाड़ा जैसे स्थानों के निवासी हैं। राज्य में इनकी कुल आबादी 10-20 लाख है। एसटी का दर्जा देने के लिए पहाड़ियों की मांग की उत्पत्ति इस तर्क पर आधारित है कि वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में गुज्जर और बक्करवाल आबादी के साथ रहते हैं।
उपरोक्त सभी बिंदुओं से यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रत्येक पहाड़ी का जन्मसिद्ध अधिकार है और सरकार को इस मामले को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत पहाड़ी जनजाति को जल्द से जल्द आरक्षण देना चाहिए।
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हमारी मांग को जल्द से जल्द पूरा किया जाए। उनके शासन में 4 प्रतिशत आरक्षण पहले जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी लोगों को दिया गया था। हमने मोदी सरकार को यह आरक्षण प्रदान करने का धन्यवाद दिया। पहाड़ी समुदाय और हमें पूरा विश्वास है कि यह शासन पहाड़ी लोगों की लंबे समय से लंबित और वास्तविक मांग को पूरा करेगा और उन्हें अनुसूचित जनजाति के तहत आरक्षण प्रदान करेगा। शर्मा ने कहा कि पहाड़ी जनजाति के लोग राजोरी, पुंछ, करनाह, उड़ी, अनंतनाग, बारामुला और कुपवाड़ा जैसे स्थानों के निवासी हैं। राज्य में इनकी कुल आबादी 10-20 लाख है। एसटी का दर्जा देने के लिए पहाड़ियों की मांग की उत्पत्ति इस तर्क पर आधारित है कि वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में गुज्जर और बक्करवाल आबादी के साथ रहते हैं।
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उपरोक्त सभी बिंदुओं से यह स्पष्ट है कि अनुसूचित जनजाति का दर्जा प्रत्येक पहाड़ी का जन्मसिद्ध अधिकार है और सरकार को इस मामले को ध्यान में रखते हुए अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत पहाड़ी जनजाति को जल्द से जल्द आरक्षण देना चाहिए।
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