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डीसी राजोरी ने जिले में कोविड प्रयासों का जायजा लिया
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राजोरी। जिले में कोरोना की रोकथाम के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी लेने के लिए उपायुक्त राजेश कुमार शवन ने मंगलवार को संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन महामारी का मुकाबला करने के लिए अपनी पूरी क्षमता से काम कर रहा है, लेकिन कीमती जीवन को बचाने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की आवश्यकता है। कोरोना की चुनौतियों से सतर्कतापूर्वक लड़ना है और इस पर लगाम लगाने के लिए टीकाकरण ही स्थायी समाधान है।
उपायुक्त ने बताया कि जिले में 45 से अधिक आयु के टीकाकरण लगभग 75 प्रतिशत के करीब हैं। ऐसे में छूटे हुए लाभार्थियों की सूची तैयार करने और उन्हें जल्द से जल्द टीका लगाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर की टीमें घर-घर जाकर सर्वे करें और लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। साथ ही हर दिन के काम की रिपोर्ट शाम चार बजे तक दें। जिन पीड़ितों के घर में आइसोलेट होने की जगह नहीं है, उन्हें पंचायत में बनाए गए कोरोना देखभाल केंद्रों में स्थानांतरित करें। प्रत्येक पंचायत में एक स्कूल को कोविड नियंत्रण कक्ष का रूप देने की जरूरत है, ताकि सभी संक्रमितों का पूरा ब्यौरा विस्तार से रखा जा सके।
आईईसी गतिविधियों के संबंध में उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को अपनी स्थानीय भाषाओं जैसे गोजरी, पहाड़ी, हिंदी, उर्दू, आदि में कोविड नियमों के बारे में आम जनता के बीच व्यापक जागरूकता पैदा करने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने एक जिला एक उत्पाद योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की और कृषि एवं पशुपालन विभाग के संबंधित अधिकारियों को जिले में दूध और इसके उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा, ताकि जिले को चिन्हित उत्पादों में निर्यात हब बनाया जा सके।
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उपायुक्त ने बताया कि जिले में 45 से अधिक आयु के टीकाकरण लगभग 75 प्रतिशत के करीब हैं। ऐसे में छूटे हुए लाभार्थियों की सूची तैयार करने और उन्हें जल्द से जल्द टीका लगाने की जरूरत है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर की टीमें घर-घर जाकर सर्वे करें और लोगों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करें। साथ ही हर दिन के काम की रिपोर्ट शाम चार बजे तक दें। जिन पीड़ितों के घर में आइसोलेट होने की जगह नहीं है, उन्हें पंचायत में बनाए गए कोरोना देखभाल केंद्रों में स्थानांतरित करें। प्रत्येक पंचायत में एक स्कूल को कोविड नियंत्रण कक्ष का रूप देने की जरूरत है, ताकि सभी संक्रमितों का पूरा ब्यौरा विस्तार से रखा जा सके।
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आईईसी गतिविधियों के संबंध में उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को अपनी स्थानीय भाषाओं जैसे गोजरी, पहाड़ी, हिंदी, उर्दू, आदि में कोविड नियमों के बारे में आम जनता के बीच व्यापक जागरूकता पैदा करने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने एक जिला एक उत्पाद योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की भी समीक्षा की और कृषि एवं पशुपालन विभाग के संबंधित अधिकारियों को जिले में दूध और इसके उत्पादों का उत्पादन बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा, ताकि जिले को चिन्हित उत्पादों में निर्यात हब बनाया जा सके।
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