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ईश्वर को जाने बिना प्रेम व विश्वास स्थिर नहीं हो सकता : साध्वी गरिमा भारती
Sun, 16 Feb 2025 12:58 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
संवाद न्यूज एजेंसी, राजौरी
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:58 AM IST
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राजोरी के कालाकोट में आयोजित राम कथा के दौरान मौजूद महिला श्रद्धालु। संवाद
- फोटो : rajauri
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से स्पोर्ट्स ग्राउंड कालाकोट में श्री राम कथा अमृत का आयोजन
राजोरी/नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से स्पोर्ट्स ग्राउंड कालाकोट में श्री राम कथा अमृत का आयोजन किया गया। इस कथा में साध्वी गरिमा भारती ने प्रभु श्री राम के वन गमन प्रसंग पर प्रवचन प्रस्तुत किया।
साध्वी ने बताया कि प्रभु श्री राम का वन गमन हमें यह सिखाता है कि जीवन में सुख-दुख दोनों आते हैं और सच्चा भक्त वही है जो इन्हें प्रभु का कृपा प्रसाद मानकर स्वीकार करता है।
साध्वी ने बताया कि सच्चा प्रेम और विश्वास तभी स्थिर होता है जब हम ईश्वर का साक्षात्कार कर लेते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि जब तक हम ईश्वर को जान नहीं लेते, तब तक हमारा विश्वास और प्रेम स्थिर नहीं हो सकता। इसलिए हमें एक सच्चे सतगुरु की शरण में जाना चाहिए, जो हमें ईश्वर का साक्षात्कार कराएं। कथा के समापन पर प्रभु श्री राम की मंगल आरती की गई। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, महमूद तनवीर, अशोक शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, तिलक राज, ओम प्रकाश शर्मा, सुखदेव सिंह व जुगेश रैना सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। संवाद
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राजोरी/नौशेरा। दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से स्पोर्ट्स ग्राउंड कालाकोट में श्री राम कथा अमृत का आयोजन किया गया। इस कथा में साध्वी गरिमा भारती ने प्रभु श्री राम के वन गमन प्रसंग पर प्रवचन प्रस्तुत किया।
साध्वी ने बताया कि प्रभु श्री राम का वन गमन हमें यह सिखाता है कि जीवन में सुख-दुख दोनों आते हैं और सच्चा भक्त वही है जो इन्हें प्रभु का कृपा प्रसाद मानकर स्वीकार करता है।
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साध्वी ने बताया कि सच्चा प्रेम और विश्वास तभी स्थिर होता है जब हम ईश्वर का साक्षात्कार कर लेते हैं। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी कहा है कि जब तक हम ईश्वर को जान नहीं लेते, तब तक हमारा विश्वास और प्रेम स्थिर नहीं हो सकता। इसलिए हमें एक सच्चे सतगुरु की शरण में जाना चाहिए, जो हमें ईश्वर का साक्षात्कार कराएं। कथा के समापन पर प्रभु श्री राम की मंगल आरती की गई। इस अवसर पर स्वामी सुचेतानंद, स्वामी महेश्वरानंद, महमूद तनवीर, अशोक शर्मा, पुरुषोत्तम शर्मा, तिलक राज, ओम प्रकाश शर्मा, सुखदेव सिंह व जुगेश रैना सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे। संवाद
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