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संघर्ष विराम के उल्लंघन पर अंकुश से लोगों में खुशी, लेकिन पाकिस्तान पर भरोसा नहीं
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राजोरी। भारत और पाकिस्तान नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर गोलाबारी नहीं करने पर राजी हो गए हैं। दोनों देशों में पुराने समझौतों को फिर से अमल में लाने में सहमति बनी है। एलओसी पर गोलाबारी नहीं करने के दोनों देशों के संयुक्त बयान से नियंत्रण रेखा से सटे गांवों के लोगों में खुशी की लहर है, लेकिन लोगों को अभी भी पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है।
जिले के नियंत्रण रेखा से जुड़े लोगों ने बताया कि पिछले करीब दो दशक से पाकिस्तानी सेना बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करके रिहायशी इलाकों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाती आ रही है। गोलाबारी में सैकड़ों जवान और नागरिक शहीद हुए हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इसके अलावा गोलीबारी के दौरान लोगों को घरों से निकलकर बंकरों मे पनाह लेनी पड़ती है। मकानों को भी नुकसान पहुंचता है। खेती के काम रुक जाते हैं।
गोलीबारी का सबसे बुरा प्रभाव स्कूल कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। गोलीबारी के चलते कई कई दिन स्कूल-कॉलेज बंद रहते हैं। कई बार तो पाकिस्तानी सेना ने स्कूलों को निशाना बनाया। लोगों के मुताबिक अब यदि गोलाबारी बंद होती है तो इससे नियंत्रण रेखा के लोगों को राहत मिलेगी, बच्चों की पढ़ाई पर भी असर नहीं पड़ेगा। अब किसान सीजन में फसल भी आसानी से लगा और काट सकेंगे।
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जिले के नियंत्रण रेखा से जुड़े लोगों ने बताया कि पिछले करीब दो दशक से पाकिस्तानी सेना बार-बार संघर्ष विराम का उल्लंघन करके रिहायशी इलाकों और सैन्य चौकियों को निशाना बनाती आ रही है। गोलाबारी में सैकड़ों जवान और नागरिक शहीद हुए हैं और सैकड़ों की संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। इसके अलावा गोलीबारी के दौरान लोगों को घरों से निकलकर बंकरों मे पनाह लेनी पड़ती है। मकानों को भी नुकसान पहुंचता है। खेती के काम रुक जाते हैं।
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गोलीबारी का सबसे बुरा प्रभाव स्कूल कॉलेज जाने वाले विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ता है। गोलीबारी के चलते कई कई दिन स्कूल-कॉलेज बंद रहते हैं। कई बार तो पाकिस्तानी सेना ने स्कूलों को निशाना बनाया। लोगों के मुताबिक अब यदि गोलाबारी बंद होती है तो इससे नियंत्रण रेखा के लोगों को राहत मिलेगी, बच्चों की पढ़ाई पर भी असर नहीं पड़ेगा। अब किसान सीजन में फसल भी आसानी से लगा और काट सकेंगे।
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