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166 विद्यार्थियों के बैठने के लिए मात्र दो कमरे
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राजोरी। राजोेरी जिले के थन्नामंडी शिक्षा जोन में एक सरकारी हाई स्कूल ऐसा भी है जो शिक्षा विभाग की उपेक्षा झेल रहा है और बच्चे इसका खामियाजा भुगत रहे हैं। स्कूल में वर्तमान में 166 छात्रों के बैठने के लिए सिर्फ दो कक्षाएं ही हैं। अधिकांश बच्चे खुले आसमान के नीचे बैठ कर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। जानकारी के अनुसार थन्नामंडी के भंगाई गांव स्थित सरकारी मिडिल स्कूल का कई साल पहले दर्जा बढ़ाकर हाई स्कूल में अपग्रेड किया गया था, लेकिन आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करने में विभाग ने ध्यान नहीं दिया।
स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि भवन में मौजूदा तीन कमरे हैं, जिनमें से एक कमरा आधिकारिक कार्य के लिए नामित है। जबकि दो कमरे पहली से 10वीं कक्षा के 166 छात्रों के बैठने के लिए है। जिस कमरे में कक्षा लगती है उसी कमरे में मिड डे मील का राशन भी रखा है। स्कूल के हेडमास्टर के अनुसार यहां तक कि स्कूल में खेल का मैदान भी नहीं है। होता तो खुले में कक्षाएं संचालित हो जातीं। मजबूर होकर स्कूल के पीछे गैलरी में कक्षा लगानी पड़ती है।
सर्दी के मौसम और जब बारिश होती है तो कक्षाएं संचालित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मजबूर होकर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। यहां तक कि शिक्षकों के पास भी खाली समय में बैठने के लिए जगह नहीं है। 15-20 छात्रों को एक समय में एक कमरे में समायोजित किया जाता है, जबकि अन्य छात्रों को पढ़ाई के लिए बरामदे में बैठने के लिए कहा जाता है। हेडमास्टर ने बताया कि मौजूदा भवन की हालत भी खस्ता है। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ रहा है और भवन धीरे-धीरे जर्जर हो रहा है। वहीं एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि क्षेत्र के संबंधित सरपंचों से इस मामले में उच्च अधिकारियों से बात करने को कहा गया, मगर कुछ नहीं हुआ।
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स्कूल के हेडमास्टर ने बताया कि भवन में मौजूदा तीन कमरे हैं, जिनमें से एक कमरा आधिकारिक कार्य के लिए नामित है। जबकि दो कमरे पहली से 10वीं कक्षा के 166 छात्रों के बैठने के लिए है। जिस कमरे में कक्षा लगती है उसी कमरे में मिड डे मील का राशन भी रखा है। स्कूल के हेडमास्टर के अनुसार यहां तक कि स्कूल में खेल का मैदान भी नहीं है। होता तो खुले में कक्षाएं संचालित हो जातीं। मजबूर होकर स्कूल के पीछे गैलरी में कक्षा लगानी पड़ती है।
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सर्दी के मौसम और जब बारिश होती है तो कक्षाएं संचालित करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मजबूर होकर बच्चों की छुट्टी करनी पड़ती है। यहां तक कि शिक्षकों के पास भी खाली समय में बैठने के लिए जगह नहीं है। 15-20 छात्रों को एक समय में एक कमरे में समायोजित किया जाता है, जबकि अन्य छात्रों को पढ़ाई के लिए बरामदे में बैठने के लिए कहा जाता है। हेडमास्टर ने बताया कि मौजूदा भवन की हालत भी खस्ता है। दीवारों का प्लास्टर भी उखड़ रहा है और भवन धीरे-धीरे जर्जर हो रहा है। वहीं एक स्थानीय निवासी ने दावा किया कि क्षेत्र के संबंधित सरपंचों से इस मामले में उच्च अधिकारियों से बात करने को कहा गया, मगर कुछ नहीं हुआ।
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