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छह माह बाद खुले स्कूल लेकिन वहुत कंम संख्या में स्कूलों में पहुंचे विधार्थी
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सुंदरबनी। मार्च से कोरोना से बचने के लिए सरकार की तरफ से बंद किए गए स्कूलों को सोमवार से खोलने के आदेश हुए। इसके बाद हाई तथा हायर सेकेंडरी स्कूलों के बंद ताले तो खुल गए, जिसमें स्कूल स्टाफ की उपस्थिति पूरी रही, लेकिन छात्र-छात्राओं की संख्या बहुत कम रही।
हालांकि कुछ छात्र-छात्राएं स्कूलों में प्रवेश कराने के लिए जरूर आए, लेकिन औपचारिक तौर पर स्कूल में पढ़ाई करने के लिए कोई भी छात्र नहीं आया। वहीं सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को खोलने तथा छात्र-छात्राओं को स्कूलों में भेजने के लिए अभिभावकों द्वारा लिखित तौर पर बच्चों की जिम्मेदारी लेने की शर्त रखने के कारण अधिकांश अभिभावक बच्चों को स्कूलों में भेजने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी वैश्विक महामारी के चलते वह बच्चों को स्कूलों में कैसे भेजें। इस संबंध में अधिकांश अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की वह भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं, लेकिन इसके साथ ही वह बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते हैं।
उनका कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा उनसे लिखित लेकर स्कूलों में बच्चों की भेजने की शर्त उनकी समझ से बाहर है।
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हालांकि कुछ छात्र-छात्राएं स्कूलों में प्रवेश कराने के लिए जरूर आए, लेकिन औपचारिक तौर पर स्कूल में पढ़ाई करने के लिए कोई भी छात्र नहीं आया। वहीं सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से स्कूलों को खोलने तथा छात्र-छात्राओं को स्कूलों में भेजने के लिए अभिभावकों द्वारा लिखित तौर पर बच्चों की जिम्मेदारी लेने की शर्त रखने के कारण अधिकांश अभिभावक बच्चों को स्कूलों में भेजने से कतरा रहे हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी वैश्विक महामारी के चलते वह बच्चों को स्कूलों में कैसे भेजें। इस संबंध में अधिकांश अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की वह भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं, लेकिन इसके साथ ही वह बच्चों की जान जोखिम में नहीं डाल सकते हैं।
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उनका कहना है कि शिक्षा विभाग द्वारा उनसे लिखित लेकर स्कूलों में बच्चों की भेजने की शर्त उनकी समझ से बाहर है।