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मनुष्य जीवन क्षणभंगुर
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नौशेरा। कम्यूनिटी हॉल कालाकोट में दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वाधान में जारी शिव कथा के चौथे दिन आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी सुमेधा भारती श्रद्धालुओं को प्रभु शिव के अद्भुत स्वरूप और श्रृंगार के पीछे छिपे आध्यात्मिक रहस्यों से परिचित करवाया।
साध्वी ने बताया कि भगवान शिव के शरीर पर भस्म लगाना मानव जीवन की क्षणभंगुरता और महानता को दिखाता है। मनुष्य जीवन क्षणभंगुर है। इस जीवन का उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति करना है। अत: जीवन के समाप्त होने से पहले पहले ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होकर ईश्वर रूपी लक्ष्य को प्राप्त करें।
प्रभु शिव के मस्तक पर सुशोभित तृतीया नेत्र प्रत्येक मानव के भृकुटी में स्थित ईश्वर दर्शन करने का माध्यम दिव्य नेत्र का प्रतीक है। शास्त्रों में वर्णित है, गीता में भी भगवान कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन मेरे दर्शन के लिए दिव्य चक्षु नितांत आवश्यक है। व्यक्ति ईश्वर दर्शन की जिज्ञासा लेकर पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्म ज्ञान दीक्षा को प्राप्त कर प्रभु का दर्शन करता है। यही भारतीय संस्कृति की सनातन प्रक्त्रिस्या है।
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साध्वी जगदीश भारती, साध्वी ज्योति भारती ने राष्ट्रभक्ति, ईश्वर भक्ति से परिपूर्ण भजनों का गायन किया। रंग दे बसंती चोला भजन पर सारी संगत झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान स्वामी सुचेतानंद स्वामी, सुकर्मा नंद, स्वामी हरिदास आनंद, यसुवर्धन, नेका नेता अशोक शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, भाजपा नेता दीपक शर्मा, मदनलाल, तिलक राज मौजूद रहे।
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साध्वी ने बताया कि भगवान शिव के शरीर पर भस्म लगाना मानव जीवन की क्षणभंगुरता और महानता को दिखाता है। मनुष्य जीवन क्षणभंगुर है। इस जीवन का उद्देश्य ईश्वर प्राप्ति करना है। अत: जीवन के समाप्त होने से पहले पहले ईश्वर भक्ति के मार्ग पर अग्रसर होकर ईश्वर रूपी लक्ष्य को प्राप्त करें।
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प्रभु शिव के मस्तक पर सुशोभित तृतीया नेत्र प्रत्येक मानव के भृकुटी में स्थित ईश्वर दर्शन करने का माध्यम दिव्य नेत्र का प्रतीक है। शास्त्रों में वर्णित है, गीता में भी भगवान कृष्ण कहते हैं कि हे अर्जुन मेरे दर्शन के लिए दिव्य चक्षु नितांत आवश्यक है। व्यक्ति ईश्वर दर्शन की जिज्ञासा लेकर पूर्ण सतगुरु की शरण में जाकर ब्रह्म ज्ञान दीक्षा को प्राप्त कर प्रभु का दर्शन करता है। यही भारतीय संस्कृति की सनातन प्रक्त्रिस्या है।
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साध्वी जगदीश भारती, साध्वी ज्योति भारती ने राष्ट्रभक्ति, ईश्वर भक्ति से परिपूर्ण भजनों का गायन किया। रंग दे बसंती चोला भजन पर सारी संगत झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान स्वामी सुचेतानंद स्वामी, सुकर्मा नंद, स्वामी हरिदास आनंद, यसुवर्धन, नेका नेता अशोक शर्मा, सुरेंद्र शर्मा, भाजपा नेता दीपक शर्मा, मदनलाल, तिलक राज मौजूद रहे।