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कंचक पूजन और साख विसर्जन के साथ हुआ नवरात्र का समापन
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पुंछ में चैत्र नवरात्री की दुर्गा अष्टमी पर कन्या पूजन करते श्रदालू
- फोटो : POONCH
राजोरी। कंजक पूजन और साख विसर्जन के साथ नवरात्र का समापन हो गया। शनिवार को अष्टमी के दिन श्रद्धालुओं ने सुबह से ही बहती जलधाराओं में पवित्र साख का विसर्जन किया और कंजक पूजन किया।
वहीं, कोरोना के कारण अब मंदिरों में कम दिखने वाली श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा देखा गया। शहर के मध्य बहने वाले सखतोई नाले और प्राचीन बावलियों पर सुबह से ही साख का विसर्जन करने वालों का तांता लगा रहा। जवाहर नगर स्थित संतोषी माता मंदिर, भोली माता मंदिर के साथ-साथ पलमा स्थित संतोषी माता के दरबार में भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंच कर पूजा अर्चना की। नहर पर साख विसर्जन करने आईं ज्योति देवी, अंजू शर्मा आदि ने बताया कि परंपरा के अनुसार नवरात्र के पहले दिन साख लगाई जाती है। इसकी पूजा की जाती है। साख की लंबाई को मां के प्रति श्रद्धा के साथ उनकी कृपा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने कंजक पूजन कर हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। नवरात्र पर्व के अष्टमी के दिन भी मंदिरों में भारी संख्या में भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए।
शनिवार दुर्गा अष्टमी पर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते लोग।
नौशेरा। दुर्गा अष्टमी का पर्व नौशेरा व आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यहां बीती शुक्रवार की रात को ऐतिहासिक गड़ी वाला माता मंदिर में विशाल जागरण का आयोजन हुआ। जिसमें रातभर माता का जागरण चला। जागरण में भक्त जमकर नाचे और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। सुबह आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। हवन के बाद कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन हुआ। इस मौके पर एडीसी नौशेरा सुखदेव सिंह समयाल, एडिशनल एसपी अमित वर्मा, थाना प्रभारी राजेश जसरोटिया ने मां के द्वार पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया। सुबह से शाम तक भंडारे में भीड़ रही। वहीं भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित माता मंगला के दरबार में भी भीड़ उमड़ी। यहां भी शुक्रवार रात्रि देवी जागरण व शनिवार को हवन के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। मंदिर में भक्तों ने माता के दर्शन किए और जयकारे लगाए।
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कन्या पूजन पर सामने आई कन्याओं की कमी
पुंछ। नवरात्र के दौरान शनिवार को अष्टमी पर कन्या पूजन पर कई मोहल्लों में लोगों को कन्याओं की कमी का सामने आई। कई परिवारों को जहां घंटों कन्याओं के आने का इंतजार करना पड़ा। तो कई परिवारों को दूसरे मोहल्लों में जाकर कन्याओं को गाड़ियों में बिठा कर घरों में पूजन हेतु लाना पड़ा।
इतना ही नहीं कई परिवारों के घरों में पूजन हेतु एक भी कन्या नहीं मिलने पर उन्हें मंदिरों में जाकर कन्या पूजन करना पड़ा। इसके चलते लोगों को देश ही नहीं जिले में भी लड़कों के अनुपात लड़कियां की जनसंख्या में आ रही कमी और कन्या भ्रूण हत्या अभिशाप है, इस बात की समझ आई। इस अवसर पर कुछ लोगों का यहां तक कहना था कि अगर ऐसे ही समाज में एक बच्चा और वो भी बेटा ही हो की सोच बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब कन्या पूजन के लिए एक भी कन्या नहीं मिलेगी।
बीजी माता की साख को मेंढरी नदी में प्रवाहित किया
मेंढर। उपजिले में शनिवार को दुर्गा अष्टमी पर कंजक पूजन किया गया और सायं के समय घरों तथा मंदिरों में बीजी माता की साख को मेंढरी नदी में प्रवाहित किया गया।
नवरात्र के चलते पूरे नगर में भक्तिमय माहौल बना रहा और घरों तथा मंदिरों में सुबह शाम भजन कीर्तन और दिन को सत्संग होते रहे। शनिवार को दुर्गा अष्टमी पर कंजके देते हुए गृहणियां रूबी रानी, शोभा रानी, नीरू बाली, सुनंदा बाली, शांति बाला, नीलम रानी और पूनम रानी का कहना था कि माता के नवरात्र के चलते हमारे घरों में काफी रौनक रही। जैसे माता रानी साक्षात रूप में हमारे घरों में विराजमान रही हो और आज अष्टमी के दिन कंजक पूजन कर सायं को माता रानी की साख को नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा, जिसका पालन करना पड़ेगा और इस आशा के साथ कि अब अश्विन के नवरात्र का इंतजार करेंगी। आज दुर्गा अष्टमी पर पंडित आशीष ने कहा कि मेंढर में हर घर और हर मंदिर में माता का पूजन बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ किया गया है माहौल पुरी तरह भक्तिमय बना रहा।
मंदिरों में उमड़ी भीड़, हुआ कन्या पूजन
पुंछ। आठ दिनों से चल रहे चैत्र नवरात्र पर शनिवार को कन्या पूजन हुआ। वहीं माता के मंदिरों में भारी भीड़ जुटी। शनिवार को दिनभर बच्चियां हाथों में प्रसाद लिए इधर से उधर जाती नजर आईं। सुबह तड़के से ही हर तरफ दुर्गा अष्टमी की धूम दिखी। नगर के सभी मंदिरों के साथ प्राचीन काली माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। आठ दिनों से नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु मंदिरों में माता का दर्शन-पूजन करते दिखे। सनातन धर्म अनुयायियों के घरों में हलवा, पूड़ी बनने पर सुगंध से पूरा नगर महक उठा। लोगों ने कन्याओं को अपने घरों में बुलाकर उनका पूजन किया और हलवा, पूड़ी, चने, नारियल का भोग लगाने के बाद दक्षिणा देकर विदा किया। यह क्रम दोपहर तक जारी रहा। कन्या पूजन के कारण आज अधिकतर बच्चियां स्कूल भी नहीं गईं। दोपहर बाद कन्याएं आपस में पूजन में प्राप्त पैसों को लेकर मुकाबला करते दिखाई दीं। संवाद
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वहीं, कोरोना के कारण अब मंदिरों में कम दिखने वाली श्रद्धालुओं की संख्या में भी इजाफा देखा गया। शहर के मध्य बहने वाले सखतोई नाले और प्राचीन बावलियों पर सुबह से ही साख का विसर्जन करने वालों का तांता लगा रहा। जवाहर नगर स्थित संतोषी माता मंदिर, भोली माता मंदिर के साथ-साथ पलमा स्थित संतोषी माता के दरबार में भी काफी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंच कर पूजा अर्चना की। नहर पर साख विसर्जन करने आईं ज्योति देवी, अंजू शर्मा आदि ने बताया कि परंपरा के अनुसार नवरात्र के पहले दिन साख लगाई जाती है। इसकी पूजा की जाती है। साख की लंबाई को मां के प्रति श्रद्धा के साथ उनकी कृपा का प्रतीक माना जाता है। वहीं, शहर के विभिन्न मंदिरों में भी श्रद्धालुओं ने कंजक पूजन कर हलवा, पूड़ी और चने का प्रसाद बांटा। नवरात्र पर्व के अष्टमी के दिन भी मंदिरों में भारी संख्या में भक्तों ने माता रानी के दर्शन किए।
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शनिवार दुर्गा अष्टमी पर भंडारे में प्रसाद ग्रहण करते लोग।
नौशेरा। दुर्गा अष्टमी का पर्व नौशेरा व आसपास के क्षेत्रों में शनिवार को बड़ी धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यहां बीती शुक्रवार की रात को ऐतिहासिक गड़ी वाला माता मंदिर में विशाल जागरण का आयोजन हुआ। जिसमें रातभर माता का जागरण चला। जागरण में भक्त जमकर नाचे और जयकारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। सुबह आरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया। हवन के बाद कन्या पूजन और भंडारे का आयोजन हुआ। इस मौके पर एडीसी नौशेरा सुखदेव सिंह समयाल, एडिशनल एसपी अमित वर्मा, थाना प्रभारी राजेश जसरोटिया ने मां के द्वार पर माथा टेककर आशीर्वाद लिया। सुबह से शाम तक भंडारे में भीड़ रही। वहीं भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर स्थित माता मंगला के दरबार में भी भीड़ उमड़ी। यहां भी शुक्रवार रात्रि देवी जागरण व शनिवार को हवन के बाद भंडारे का आयोजन हुआ। मंदिर में भक्तों ने माता के दर्शन किए और जयकारे लगाए।
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कन्या पूजन पर सामने आई कन्याओं की कमी
पुंछ। नवरात्र के दौरान शनिवार को अष्टमी पर कन्या पूजन पर कई मोहल्लों में लोगों को कन्याओं की कमी का सामने आई। कई परिवारों को जहां घंटों कन्याओं के आने का इंतजार करना पड़ा। तो कई परिवारों को दूसरे मोहल्लों में जाकर कन्याओं को गाड़ियों में बिठा कर घरों में पूजन हेतु लाना पड़ा।
इतना ही नहीं कई परिवारों के घरों में पूजन हेतु एक भी कन्या नहीं मिलने पर उन्हें मंदिरों में जाकर कन्या पूजन करना पड़ा। इसके चलते लोगों को देश ही नहीं जिले में भी लड़कों के अनुपात लड़कियां की जनसंख्या में आ रही कमी और कन्या भ्रूण हत्या अभिशाप है, इस बात की समझ आई। इस अवसर पर कुछ लोगों का यहां तक कहना था कि अगर ऐसे ही समाज में एक बच्चा और वो भी बेटा ही हो की सोच बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं जब कन्या पूजन के लिए एक भी कन्या नहीं मिलेगी।
बीजी माता की साख को मेंढरी नदी में प्रवाहित किया
मेंढर। उपजिले में शनिवार को दुर्गा अष्टमी पर कंजक पूजन किया गया और सायं के समय घरों तथा मंदिरों में बीजी माता की साख को मेंढरी नदी में प्रवाहित किया गया।
नवरात्र के चलते पूरे नगर में भक्तिमय माहौल बना रहा और घरों तथा मंदिरों में सुबह शाम भजन कीर्तन और दिन को सत्संग होते रहे। शनिवार को दुर्गा अष्टमी पर कंजके देते हुए गृहणियां रूबी रानी, शोभा रानी, नीरू बाली, सुनंदा बाली, शांति बाला, नीलम रानी और पूनम रानी का कहना था कि माता के नवरात्र के चलते हमारे घरों में काफी रौनक रही। जैसे माता रानी साक्षात रूप में हमारे घरों में विराजमान रही हो और आज अष्टमी के दिन कंजक पूजन कर सायं को माता रानी की साख को नदी में प्रवाहित कर दिया जाएगा, जिसका पालन करना पड़ेगा और इस आशा के साथ कि अब अश्विन के नवरात्र का इंतजार करेंगी। आज दुर्गा अष्टमी पर पंडित आशीष ने कहा कि मेंढर में हर घर और हर मंदिर में माता का पूजन बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ किया गया है माहौल पुरी तरह भक्तिमय बना रहा।
मंदिरों में उमड़ी भीड़, हुआ कन्या पूजन
पुंछ। आठ दिनों से चल रहे चैत्र नवरात्र पर शनिवार को कन्या पूजन हुआ। वहीं माता के मंदिरों में भारी भीड़ जुटी। शनिवार को दिनभर बच्चियां हाथों में प्रसाद लिए इधर से उधर जाती नजर आईं। सुबह तड़के से ही हर तरफ दुर्गा अष्टमी की धूम दिखी। नगर के सभी मंदिरों के साथ प्राचीन काली माता मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटी। आठ दिनों से नवरात्रि का व्रत रखने वाले श्रद्धालु मंदिरों में माता का दर्शन-पूजन करते दिखे। सनातन धर्म अनुयायियों के घरों में हलवा, पूड़ी बनने पर सुगंध से पूरा नगर महक उठा। लोगों ने कन्याओं को अपने घरों में बुलाकर उनका पूजन किया और हलवा, पूड़ी, चने, नारियल का भोग लगाने के बाद दक्षिणा देकर विदा किया। यह क्रम दोपहर तक जारी रहा। कन्या पूजन के कारण आज अधिकतर बच्चियां स्कूल भी नहीं गईं। दोपहर बाद कन्याएं आपस में पूजन में प्राप्त पैसों को लेकर मुकाबला करते दिखाई दीं। संवाद