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भजन अध्ययन सूर्योदय से पहले करें
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नौशेरा ठाकुर द्वारा मे चल रही राम कथा मे उमड़ भीड
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नौशेरा। ठाकुरद्वारा में चल रही श्रीरामचरितमानस कथा में प्रवचन करते हुए श्रीश्री 1008 इंद्रदेवशरानंद सरस्वती ने कहा कि नित्य प्रति यज्ञ हवन करो, जिससे वातावरण शुद्ध होगा। भजन अध्ययन सूर्योदय से पहले करें और विद्यार्थी सुबह के समय ही पढ़ें। ऐसा करने से सबका कल्याण होता है। विद्या भी अधिक मिलती है।
कथा वाचक ने कहा कि राम और सीता का मिलन भी ब्रह्म मुहूर्त में हुआ। इसलिए नित्य प्रति सूर्य उदय से पहले उठें, आपको बहुत लाभ होगा। आज की कथा में जनकपुरी में राजा जनक द्वारा सीता का स्वयंवर रचा गया। इसमें दूर-दूर से मोहर राजा महाराजाओं योद्धाओं का आना हुआ, जिसमें जनक राजा ने यह प्रतिज्ञा ले रखी थी। शिव का दिया हुआ धनुष जिसे सीता उठाती थीं। जो इस धनुष को उठाएगा अपनी बेटी सीता का विवाह में उसके साथ करूंगा। राजा जनक के दरबार में रावण समेत विभिन्न योद्धाओं ने अपनी ताकत लगा दी, मगर कोई भी शिवजी के धनुष को नहीं उठा सका। इतने में राजा जनक रोते हैं, और कहते हैं कि क्या धरती क्षत्रियों से विहीन हो गई है। कोई राजा नहीं रहा जो इस धनुष को उठाएगा। मेरी बेटी की शादी होगी।
इतने में लक्ष्मण क्रोधित होकर अपने स्थान पर उठते हैं और गुरु से कहते हैं कि राजा जनक को यह बात शोभा नहीं देती कि वह हर किसी का अपमान करें। गुरु की आज्ञा पाकर रामजी धनुष को उठाने चले और धनुष का विधिवत पूजन कर प्रणाम करके जब उठाया तो उसके चार टुकड़े हो गए। इसकी सूचना महाराजा दशरथ को दी गई। महाराजा दशरथ जनकपुरी पहुंचे और राम लक्ष्मण सहित चारों भाइयों का विवाह जनकपुरी में हुआ।
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कथा वाचक ने कहा कि राम और सीता का मिलन भी ब्रह्म मुहूर्त में हुआ। इसलिए नित्य प्रति सूर्य उदय से पहले उठें, आपको बहुत लाभ होगा। आज की कथा में जनकपुरी में राजा जनक द्वारा सीता का स्वयंवर रचा गया। इसमें दूर-दूर से मोहर राजा महाराजाओं योद्धाओं का आना हुआ, जिसमें जनक राजा ने यह प्रतिज्ञा ले रखी थी। शिव का दिया हुआ धनुष जिसे सीता उठाती थीं। जो इस धनुष को उठाएगा अपनी बेटी सीता का विवाह में उसके साथ करूंगा। राजा जनक के दरबार में रावण समेत विभिन्न योद्धाओं ने अपनी ताकत लगा दी, मगर कोई भी शिवजी के धनुष को नहीं उठा सका। इतने में राजा जनक रोते हैं, और कहते हैं कि क्या धरती क्षत्रियों से विहीन हो गई है। कोई राजा नहीं रहा जो इस धनुष को उठाएगा। मेरी बेटी की शादी होगी।
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इतने में लक्ष्मण क्रोधित होकर अपने स्थान पर उठते हैं और गुरु से कहते हैं कि राजा जनक को यह बात शोभा नहीं देती कि वह हर किसी का अपमान करें। गुरु की आज्ञा पाकर रामजी धनुष को उठाने चले और धनुष का विधिवत पूजन कर प्रणाम करके जब उठाया तो उसके चार टुकड़े हो गए। इसकी सूचना महाराजा दशरथ को दी गई। महाराजा दशरथ जनकपुरी पहुंचे और राम लक्ष्मण सहित चारों भाइयों का विवाह जनकपुरी में हुआ।
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