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J&K: राजोरी में एक माह में 44 लोगों ने की आत्महत्या की कोशिश, जहर और फंदे के बीच उलझा सवाल, कब सुधरेगा समाज?

Wed, 11 Jun 2025 11:59 AM IST
निकिता गुप्ता रवि वर्मारा अमर उजाला, नेटवर्क राजोरी
रवि वर्मारा अमर उजाला, नेटवर्क राजोरी Published by: निकिता गुप्ता Updated Wed, 11 Jun 2025 11:59 AM IST
सार

राजोरी में मई महीने में 44 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया, जो राष्ट्रीय औसत से छह गुना अधिक है। इनमें अधिकांश मामले शादीशुदा महिलाओं से जुड़े हैं, जिनमें ससुराल पक्ष की प्रताड़ना प्रमुख कारण रही।

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44 people attempted suicide in Rajori in one month
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

 राजोरी आत्महत्या के प्रयासों के मामले में देश में पहले नंबर पर है। यहां की आत्महत्या दर राष्ट्रीय औसत से 6 गुना से ज्यादा है। इस सूची में 13 से 65 वर्ष तक की उम्र के लोग शामिल हैं। प्रशासनिक स्तर पर तैयार कराए गए आंकड़ों के मुताबिक मई में 44 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया, जिनमें से अधिकांश मामले शादीशुदा महिलाओं से जुड़े हुए हैं।

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आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इससे पहले भी आत्महत्या के मामले सामने आते थे। पर अचानक जब यह ट्रेंड बढ़ने लगा तो प्रशासन ने आंकड़े एकत्र करना शुरू किया। इसमें पाया गया कि मई के महीने में (1 मई से 31 मई तक) 44 लोगों ने आत्महत्या का प्रयास किया। आंकड़ों के अनुसार इनमें 13 वर्ष से 65 वर्ष तक के लोग शामिल हैं। इन 44 मामलों में सबसे अधिक शादीशुदा महिलाओं से जुड़े हुए पाए गए।

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ससुराल की प्रताड़ना बनी आत्महत्या का मुख्य कारण
पुलिस की जांच में पाया गया कि शादीशुदा महिलाओं की ओर से आत्महत्या के ज्यादातर प्रयास ससुराल की ओर से अत्याचारों के चलते सामने आए। ससुराल में पति या सास-ससुर की प्रताड़ना से तंग आकर या घरेलू कलह के कारण महिलाओं ने आत्महत्या का प्रयास किया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार अधिकांश मामलों में आत्महत्या करने वालों ने घरों में रखी गई चूहा मार दवाई या अनाज भंडारण के लिए इस्तेमाल की जाने वाली अन्य हल्की जहरीली वस्तुएं खाईं। जहर खाने के बाद आत्महत्या का दूसरा सामान्य तरीका फंदा था। जहर खाने वालों में से अधिकांश को समय पर अस्पताल पहुंचाकर बचा लिया गया, लेकिन फंदा लगाने वालों को नहीं बचाया जा सका।

राजोरी में आत्महत्या के प्रयासों की दर सबसे अधिक
राजोरी में आत्महत्या दर सर्वाधिकचूंकि हमारे पास राजोरी की वार्षिक आत्महत्या दर नहीं बल्कि प्रयासों की दर है, सीधी तुलना संभव नहीं। फिर भी मई माह के आधार पर आत्महत्या के प्रयासों की दर 6.85 प्रति लाख निकलकर आई है, जो वार्षिक राष्ट्रीय औसत आत्महत्या दर के मासिक हिसाब से काफी अधिक है। मासिक राष्ट्रीय औसत आत्महत्या दर 1.075 प्रति लाख है। 2022 में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के अनुसार 1.71 लाख लोगों ने आत्महत्या की, जो प्रति लाख 12.4 की दर है। यह आंकड़ा अभी तक का सर्वाधिक है।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ
आत्महत्या के मामलों पर अंकुश लगाने में परिवार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। परिवार को चाहिए कि वे अपने सदस्यों की हर गतिविधि पर नजर रखें। घर में क्लेश से बचें। खासकर किशोर अवस्था से गुजर रहे बच्चों के बदलते व्यवहार पर ध्यान देना और उन्हें अपनी बात कहने का मौका देना जरूरी है। डॉ. इकबाल मलिक, मनोचिकित्सक और बीएमओ कालाकोट

महिलाओं को आज भी अपने बारे में सोचने की ज्यादा आजादी नहीं है। वे दूसरों के परिप्रेक्ष्य से जीती हैं। अपनी तमन्नाओं और दूसरों की अपेक्षाओं के बीच फंसीं महिलाएं दोहरे बोझ की शिकार हैं, जो उनकी खुदकुशी की बड़ी वजह हो सकती है। सोशल मीडिया पर वे दुनिया को बदलते देख रही हैं और उसका हिस्सा बनना चाहती हैं, लेकिन चरित्र' और परिवार की इज्जत के नाम पर उन पर अनावश्यक दबाव बना दिया जाता है। वे अवसाद की शिकार हो जाती हैं। हालात ऐसे बन जाते हैं कि कई बार उन्हें मौत जीवन से बेहतर लगती है। प्रो. विश्वरक्षा, विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र, जम्मू विश्वविद्यालय।

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