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राजोेरी-पुंछ में आतंकियों की तलाश में जुटीं सुरक्षा एजेंसियां
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राजोरी। राजोेरी और पुंछ जिले के जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश में सुरक्षा एजेंसियां जुटीं हुई हैं। सुरक्षा और खुफिया ग्रिड कई आतंकवादी संगठनों के संभावित मार्गों का पता लगाने के लिए जांच कर रहे हैं। इन जिलों के जंगलों में पिछले चार महीनों में आतंकवादी गतिविधियों में बढ़ोतरी हुई है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बल दोनों सीमावर्ती जिलों को आतंकवाद मुक्त क्षेत्र के रूप में देख रहे थे, जहां किसी भी आतंकवादी की कोई उपस्थिति नहीं थी। साथ ही सुरक्षा बल इस बात से भी बेखबर नहीं हैं कि दोनों जिलों के अलग-अलग इलाकों का इस्तेमाल आतंकवादी संगठनों द्वारा घुसपैठ के बाद कश्मीर जाने के लिया भी किया जाता रहा है।
इस वर्ष जुलाई से लेकर अब तक आतंकवादियों के साथ करीब नौ मुठभेड़ हुई हैं। इनमें सेना के करीब 12 जवान शहीद हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने दो जिलों में अचानक से आतंकवादी आवाजाही में वृद्धि को गंभीर सुरक्षा चिंता के रूप में लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवादी संगठनों का लक्ष्य इन क्षेत्रों में आतंकवाद को फिर से जिंदा करना है। पिछले कुछ वर्षों में देखी गई प्रवृत्ति के अनुसार आतंकवादी राजोेरी और पुंछ क्षेत्रों में ज्यादा समय नहीं बिताते रहे हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य घाटी रहा है, लेकिन इस साल यह देखा गया है कि आतंकवादी यहां सीमावर्ती जिलों के क्षेत्रों में अधिक समय बिता रहे हैं, जोकि चिंताजनक है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पिछले तीन से चार महीनों के दौरान कुछ आतंकवादी समूह राजोरी और पुंछ के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय हैं। विभिन्न स्थानों पर कई मुठभेड़ और सुरक्षाबलों द्वारा देखे गए पैरों के निशान स्पष्ट रूप से बताते हैं कि दोनों जिलों में आतंकवादी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
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आतंकियों के छिपे होने की दो
संभावनाएं नजर आ रहीं
खुफिया एजेंसियां और सुरक्षाबल दोनों जिलों में आतंकवादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए गए ऐसे संभावित मार्गों का अनुसरण करने में लगे हैं, जिन्हें आतंकवाद मुक्त मार्ग माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों को दो संभावनाएं नजर आ रही हैं। एक ताजा घुसपैठ हो सकती है, जहां आतंकवादी ग्रुप जो हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पार कर राजोरी-पुंछ में पहुंचे हैं। दूसरी संभावना है कि ये आतंकवादी घाटी में मौजूद थे, लेकिन घाटी में सख्ती बढ़ने पर अब पीर पांचाल के पहाड़ी रास्तों का प्रयोग कर इन जिलों में छिपे हुए हैं। इन दोनों संभावनाओं पर जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों और एजेंसियों के बीच इस आशंका को भी साझा किया गया है कि दोनों जिलों में आतंकवादियों के छोटे-छोटे दो या दो से अधिक ग्रुप सक्रिय हो सकते हैं, जो एक से दूसरे क्षेत्र में आ जा रहे हैं। बता दें कि 17 अक्टूबर को राजोेरी-पुंछ रेंज के पुलिस डीआईजी विवेक गुप्ता ने मीडिया कर्मियों को बताया था कि सुरक्षा बल पिछले दो से तीन महीनों से राजोेरी और पुंछ के इलाकों में आतंकवादियों पर नजर रखे हैं।
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इस वर्ष जुलाई से लेकर अब तक आतंकवादियों के साथ करीब नौ मुठभेड़ हुई हैं। इनमें सेना के करीब 12 जवान शहीद हुए हैं। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों ने दो जिलों में अचानक से आतंकवादी आवाजाही में वृद्धि को गंभीर सुरक्षा चिंता के रूप में लिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आतंकवादी संगठनों का लक्ष्य इन क्षेत्रों में आतंकवाद को फिर से जिंदा करना है। पिछले कुछ वर्षों में देखी गई प्रवृत्ति के अनुसार आतंकवादी राजोेरी और पुंछ क्षेत्रों में ज्यादा समय नहीं बिताते रहे हैं, क्योंकि उनका लक्ष्य घाटी रहा है, लेकिन इस साल यह देखा गया है कि आतंकवादी यहां सीमावर्ती जिलों के क्षेत्रों में अधिक समय बिता रहे हैं, जोकि चिंताजनक है। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो पिछले तीन से चार महीनों के दौरान कुछ आतंकवादी समूह राजोरी और पुंछ के सीमावर्ती जिलों में सक्रिय हैं। विभिन्न स्थानों पर कई मुठभेड़ और सुरक्षाबलों द्वारा देखे गए पैरों के निशान स्पष्ट रूप से बताते हैं कि दोनों जिलों में आतंकवादी अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं।
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आतंकियों के छिपे होने की दो
संभावनाएं नजर आ रहीं
खुफिया एजेंसियां और सुरक्षाबल दोनों जिलों में आतंकवादी संगठनों द्वारा इस्तेमाल किए गए ऐसे संभावित मार्गों का अनुसरण करने में लगे हैं, जिन्हें आतंकवाद मुक्त मार्ग माना जाता था। सुरक्षा एजेंसियों को दो संभावनाएं नजर आ रही हैं। एक ताजा घुसपैठ हो सकती है, जहां आतंकवादी ग्रुप जो हाल के महीनों में नियंत्रण रेखा पार कर राजोरी-पुंछ में पहुंचे हैं। दूसरी संभावना है कि ये आतंकवादी घाटी में मौजूद थे, लेकिन घाटी में सख्ती बढ़ने पर अब पीर पांचाल के पहाड़ी रास्तों का प्रयोग कर इन जिलों में छिपे हुए हैं। इन दोनों संभावनाओं पर जांच जारी है। सूत्रों के अनुसार सुरक्षा बलों और एजेंसियों के बीच इस आशंका को भी साझा किया गया है कि दोनों जिलों में आतंकवादियों के छोटे-छोटे दो या दो से अधिक ग्रुप सक्रिय हो सकते हैं, जो एक से दूसरे क्षेत्र में आ जा रहे हैं। बता दें कि 17 अक्टूबर को राजोेरी-पुंछ रेंज के पुलिस डीआईजी विवेक गुप्ता ने मीडिया कर्मियों को बताया था कि सुरक्षा बल पिछले दो से तीन महीनों से राजोेरी और पुंछ के इलाकों में आतंकवादियों पर नजर रखे हैं।
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