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सात दशक बाद भी नगर के निकटवर्ती गांव कनूईयां बी के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित
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पुंछ। नगर के निकटवर्ती पहाड़ी पर बसे गांव कनूईयां-बी के लोग सात दशक के बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। गांव निवासियों में पूर्व सरकारों एवं स्थानीय नेताओं के प्रति रोष है। लोगों ने जिला प्रशासन एवं उपराज्यपाल प्रशासन से गांव में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र, मोबाइल नेटवर्क की सुविधाएं प्रदान कराने की मांग करते हुए आरोप लगाया कि गांव में हर बार चुनाव के पहले वोट मांगने के लिए सभी दल के नेता चक्कर लगाते हैं। चुनाव के बाद कोई मुड़ कर नहीं देखता है।
इसके कारण गांव में सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गांव निवासियों मोहम्मद अकबर, फैज अहमद, नसीर हुसैन आदि का कहना है कि वर्ष 1947 के पहले हमारे बुजुर्ग जीवन यापन करते थे। हमें भी वैसा ही जीवन यापन करना पड़ रहा है। पांच हजार से अधिक जनसंख्या होने के बावजूद गांव के लिए आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। एक संपर्क सड़क का एक दशक पहले काम शुरू हुआ था। जो आज भी कटाई तक ही सीमित है। गांव में बिजली पानी की खस्ता हालत है। बिजली की अधिकतर तारें पेड़ों से बंधी हैं। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा डिस्पेंसरी तक नहीं है। इसके कारण हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
गांव में छोटे-मोटे रोग से पीड़ितों को चार किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है। इसके साथ ही आज के दौर में गांव में कोई भी मोबाइल नेटवर्क तक नहीं आता है, जिसके कारण हम लोग किसी से फोन पर संपर्क तक नहीं कर पाते हैं और न ही हमारे बच्चे इस कोरोना महामारी में ऑनलाइन पढ़ाई ही कर पा रहे हैं। हमने कई बार गांव में मोबाइल टावर लगवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारी जिला प्रशासन और उपराज्यपाल से मांग है कि हमारे गांव में मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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इसके कारण गांव में सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। गांव निवासियों मोहम्मद अकबर, फैज अहमद, नसीर हुसैन आदि का कहना है कि वर्ष 1947 के पहले हमारे बुजुर्ग जीवन यापन करते थे। हमें भी वैसा ही जीवन यापन करना पड़ रहा है। पांच हजार से अधिक जनसंख्या होने के बावजूद गांव के लिए आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं कराया गया है। एक संपर्क सड़क का एक दशक पहले काम शुरू हुआ था। जो आज भी कटाई तक ही सीमित है। गांव में बिजली पानी की खस्ता हालत है। बिजली की अधिकतर तारें पेड़ों से बंधी हैं। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अथवा डिस्पेंसरी तक नहीं है। इसके कारण हमें परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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गांव में छोटे-मोटे रोग से पीड़ितों को चार किलोमीटर तक पैदल जाना पड़ता है। इसके साथ ही आज के दौर में गांव में कोई भी मोबाइल नेटवर्क तक नहीं आता है, जिसके कारण हम लोग किसी से फोन पर संपर्क तक नहीं कर पाते हैं और न ही हमारे बच्चे इस कोरोना महामारी में ऑनलाइन पढ़ाई ही कर पा रहे हैं। हमने कई बार गांव में मोबाइल टावर लगवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि हमारी जिला प्रशासन और उपराज्यपाल से मांग है कि हमारे गांव में मूलभूत सुविधाएं प्रदान की जाएं।
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