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सरकार लोगों में डर का माहौल न बनाए : कर्रा
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के बीच ‘’वंदे मातरम’’ को लेकर विवाद गहरा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयानों और उनके रुख पर तीखा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री के कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने वाले तर्कों की निंदा करते हुए कर्रा ने कहा कि सरकार आम लोगों में डर का माहौल न बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण मतभेद नहीं, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और ऐतिहासिक परंपराओं की रक्षा का बुनियादी सवाल है।
कर्रा ने गठबंधन की मूल भावना याद दिलाते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करना और समावेशी सोच को बचाना था। राष्ट्रगीत विवाद पर उन्होंने 1937 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति और बाद में 1950 में संविधान सभा ने देश की विविधता का सम्मान करते हुए वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को ही अपनाने का फैसला किया था। तब से सरकारी कार्यक्रमों में यही शुरुआती दो छंद गाने की परंपरा चली आ रही है।
प्रदेश अध्यक्ष ने जम्मू-कश्मीर के विशेष और संवेदनशील माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि देश के इस एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य में सरकार का प्राथमिक दायित्व आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करना है। मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जनता पहले से ही कई दबाव झेल रही है, ऐसे में ‘’बात न मानने पर जेल भेजने’’ जैसी बातें कहकर डर को और गहरा किया जा रहा है। कर्रा ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आयोजनों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो छंदों को ही सीमित रखा गया है और किसी नागरिक पर कोई जबरदस्ती नहीं की गई।
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन के बीच ‘’वंदे मातरम’’ को लेकर विवाद गहरा रहा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के बयानों और उनके रुख पर तीखा प्रहार किया है। मुख्यमंत्री के कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने वाले तर्कों की निंदा करते हुए कर्रा ने कहा कि सरकार आम लोगों में डर का माहौल न बनाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई साधारण मतभेद नहीं, बल्कि देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप और ऐतिहासिक परंपराओं की रक्षा का बुनियादी सवाल है।
कर्रा ने गठबंधन की मूल भावना याद दिलाते हुए कहा कि इसका उद्देश्य सांप्रदायिक ताकतों का मुकाबला करना और समावेशी सोच को बचाना था। राष्ट्रगीत विवाद पर उन्होंने 1937 के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि 1937 में कांग्रेस कार्यसमिति और बाद में 1950 में संविधान सभा ने देश की विविधता का सम्मान करते हुए वंदे मातरम के केवल पहले दो छंदों को ही अपनाने का फैसला किया था। तब से सरकारी कार्यक्रमों में यही शुरुआती दो छंद गाने की परंपरा चली आ रही है।
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प्रदेश अध्यक्ष ने जम्मू-कश्मीर के विशेष और संवेदनशील माहौल का जिक्र करते हुए कहा कि देश के इस एकमात्र मुस्लिम-बहुल राज्य में सरकार का प्राथमिक दायित्व आम लोगों की भावनाओं का सम्मान करना है। मुख्यमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि जनता पहले से ही कई दबाव झेल रही है, ऐसे में ‘’बात न मानने पर जेल भेजने’’ जैसी बातें कहकर डर को और गहरा किया जा रहा है। कर्रा ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और तेलंगाना जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी आयोजनों में राष्ट्रगीत के शुरुआती दो छंदों को ही सीमित रखा गया है और किसी नागरिक पर कोई जबरदस्ती नहीं की गई।
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