{"_id":"6133cf808ebc3e7a1b2550c6","slug":"education-poonch-news-jmu242962163","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरकारी शिक्षक अषीश गुप्ता ने जान की परवाही किए बिना कोरोना काल में भी जगाए रखी शिक्षा की अलख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरकारी शिक्षक अषीश गुप्ता ने जान की परवाही किए बिना कोरोना काल में भी जगाए रखी शिक्षा की अलख
विज्ञापन
पुंछ के सरकारी शिक्षक अषीश गुप्ता जिन्होने कोरोना में भी जगाए रखी शिक्षा की अलख
- फोटो : POONCH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुंछ। दो वर्ष से कोरोना में एक तरफ जहां सब कुछ रुक सा गया है। वहीं संक्रमण के डर से अधिकतर लोग घरों में रहने को प्राथमिकता दे रहे हैं। सभी शिक्षण संस्थान बंद पड़े हैं। इससे बच्चों विशेष कर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो कर रह गई है।
ऐसे में पुंछ नगर में रहने वाले सरकारी स्कूल के शिक्षक अशीश गुप्ता ने कोरोना काल में अपनी एवं परिवार की जान की परवाह किए बिना शिक्षा की अलख जगाए रखी है। खनेतर कलसां प्राइमरी स्कूल में तैनात अशीश गुप्ता बच्चों को पढ़ाने को भगवान की पूजा की तरह मानते हैं। इसके लिए इस कोरोना काल में भी वह हर दिन करीब 35 किलोमीटर स्कूटी चला कर दूरदराज स्थित स्कूल पहुंचते रहे और वहां के बच्चे जो कि ऑनलाइन कक्षाएं लगाने में असमर्थ थे, उन्हें उनके घरों के आसपास दो-दो चार-चार की संख्या में पढ़ाई कराने के काम को अंजाम देते रहे। अशीश ने कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षा से वंचित हो रहे नगर के गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए अपने ही घर में सामुदायिक कक्षाएं चलाने का काम चलाए रखा। इसके पिछले ही हफ्ते शिक्षा विभाग की तरफ से जारी सभी प्रकार की सामुदायिक कक्षाओं को स्थगित करने के आदेश के बाद बंद किया गया है।
अशीश गुप्ता की तरफ से कोरोना काल में अपने घर में गरीब बच्चों के लिए चलाई जाने वाले सामुदायिक कक्षाओं को उन्होंने ह्यूमेनिटी क्लास का नाम दिया। इस सामुदायिक कक्षा में आने वाले बच्चों को अशीश गुप्ता की तरफ से अपनी जेब से ही कापी, पेन पेंसिल एवं अन्य सामान भी प्रदान किया। अशीश का कहना है कि मेरे पास एक ही पूंजी है वह मेरा शिक्षा का ज्ञान और मुझे उसे बच्चों में बांटने में बड़ा ही आनंद आता है। मैं कभी भी स्कूल से गैर हाजिर नहीं रहा हूं। कोरोना के चलते स्कूल बंद किए गए और ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई तो मुझे लगा कि जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है उनके बच्चों की शिक्षा कैसे होगी। यह सोच कर मैंने नियमित स्कूल जाना जारी रखा। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उसके घरों के आसपास दो-चार की संख्या में पढ़ाने का काम जारी रखा। गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती देख अपने ही घर में सामुदायिक कक्षा शुरू की। इसमें मेरी पत्नी शिवानी गुप्ता ने भी सहयोग किया। अशीश गुप्ता के कोरोना काल में भी शिक्षा की अलख जागाए रखने की प्रशंसा करते हुए नगर निवासियों दर्शन कुमार, निश्चिंत कुमार, धर्र्मेंद्र शास्त्री, कमल दीप आदि का कहना है कि अशीश गुप्ता ऐसे शिक्षक हैं जो निस्वार्थ भाव से शिक्षा का ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं। वो अपने अधिकतर समय को बच्चों को शिक्षित करने का ही काम करते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
ऐसे में पुंछ नगर में रहने वाले सरकारी स्कूल के शिक्षक अशीश गुप्ता ने कोरोना काल में अपनी एवं परिवार की जान की परवाह किए बिना शिक्षा की अलख जगाए रखी है। खनेतर कलसां प्राइमरी स्कूल में तैनात अशीश गुप्ता बच्चों को पढ़ाने को भगवान की पूजा की तरह मानते हैं। इसके लिए इस कोरोना काल में भी वह हर दिन करीब 35 किलोमीटर स्कूटी चला कर दूरदराज स्थित स्कूल पहुंचते रहे और वहां के बच्चे जो कि ऑनलाइन कक्षाएं लगाने में असमर्थ थे, उन्हें उनके घरों के आसपास दो-दो चार-चार की संख्या में पढ़ाई कराने के काम को अंजाम देते रहे। अशीश ने कोरोना काल में स्कूल बंद होने के कारण शिक्षा से वंचित हो रहे नगर के गरीब परिवारों के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के लिए अपने ही घर में सामुदायिक कक्षाएं चलाने का काम चलाए रखा। इसके पिछले ही हफ्ते शिक्षा विभाग की तरफ से जारी सभी प्रकार की सामुदायिक कक्षाओं को स्थगित करने के आदेश के बाद बंद किया गया है।
विज्ञापन
अशीश गुप्ता की तरफ से कोरोना काल में अपने घर में गरीब बच्चों के लिए चलाई जाने वाले सामुदायिक कक्षाओं को उन्होंने ह्यूमेनिटी क्लास का नाम दिया। इस सामुदायिक कक्षा में आने वाले बच्चों को अशीश गुप्ता की तरफ से अपनी जेब से ही कापी, पेन पेंसिल एवं अन्य सामान भी प्रदान किया। अशीश का कहना है कि मेरे पास एक ही पूंजी है वह मेरा शिक्षा का ज्ञान और मुझे उसे बच्चों में बांटने में बड़ा ही आनंद आता है। मैं कभी भी स्कूल से गैर हाजिर नहीं रहा हूं। कोरोना के चलते स्कूल बंद किए गए और ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गई तो मुझे लगा कि जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं है उनके बच्चों की शिक्षा कैसे होगी। यह सोच कर मैंने नियमित स्कूल जाना जारी रखा। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को उसके घरों के आसपास दो-चार की संख्या में पढ़ाने का काम जारी रखा। गरीब परिवार के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती देख अपने ही घर में सामुदायिक कक्षा शुरू की। इसमें मेरी पत्नी शिवानी गुप्ता ने भी सहयोग किया। अशीश गुप्ता के कोरोना काल में भी शिक्षा की अलख जागाए रखने की प्रशंसा करते हुए नगर निवासियों दर्शन कुमार, निश्चिंत कुमार, धर्र्मेंद्र शास्त्री, कमल दीप आदि का कहना है कि अशीश गुप्ता ऐसे शिक्षक हैं जो निस्वार्थ भाव से शिक्षा का ज्ञान बांटने का काम कर रहे हैं। वो अपने अधिकतर समय को बच्चों को शिक्षित करने का ही काम करते हैं।
विज्ञापन