{"_id":"62829f5f12860c066e51b3fe","slug":"cultural-poonch-news-jmu2599605104","type":"story","status":"publish","title_hn":"दो वर्षों के बाद नियंत्रण रेखा पर लोहड़ देवता मंदिर में यज्ञ एंव भंडारे का आयोजन,हजारों की संख्या में श्रदालू पहुंचे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दो वर्षों के बाद नियंत्रण रेखा पर लोहड़ देवता मंदिर में यज्ञ एंव भंडारे का आयोजन,हजारों की संख्या में श्रदालू पहुंचे
विज्ञापन
पुंछ जिले के लोहड देवता मंदिर में श्रदालू
- फोटो : POONCH
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुंछ। बुद्ध पूर्णिमा पर नियंत्रण रेखा पर कृष्णा घाटी क्षेत्र में स्थित प्राचीन पांडव कालीन लोहड़ देवता मंदिर में दो वर्षों के अंतराल पर सोमवार को विश्व शांति के लिए यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें अन्य राज्यों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालूओं, सैन्य, पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लेते हुए पूजा अर्चना की।
मंदिर समिति सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने प्रशासन एवं सरकार से मंदिर तक सड़क निर्माण और मंदिर को पर्यटन मानचित्र में लाकर सुविधाएं देने की भी मांग की। मंदिर समिति प्रधान राजेंद्र सिंह और क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना था कि नियंत्रण रेखा पर शून्य रेखा से कुछ ही दूरी पर स्थित यह मंदिर जिले ही नहीं पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम एवं सिख एकता एवं भाईचारे को मूर्तरूप देना वाला स्थान है। दो वर्षों से कोरोना के चलते मंदिर में यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन न किए जाने के बाद इस बार महामारी के कम होने के चलते यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सर्व प्रथम मंदिर में चल रहे रामायण के अखंडपाठ का भोग डाला गया एवं विशेष पूजा की गई।
मंदिर समिति सदस्यों, सैन्य अधिकारी, उपायुक्त, डीएसपी आपरेशन आदि ने भाग लेते हुए पंडित नीरज शर्मा एवं अन्य की अगुवाई में अग्निदेव को आहुतियां अर्पित करते हुए विश्व शांति की प्रार्थना की।
विज्ञापन
विज्ञापन
मंदिर समिति सदस्यों एवं श्रद्धालुओं ने प्रशासन एवं सरकार से मंदिर तक सड़क निर्माण और मंदिर को पर्यटन मानचित्र में लाकर सुविधाएं देने की भी मांग की। मंदिर समिति प्रधान राजेंद्र सिंह और क्षेत्र के मुस्लिम समुदाय के लोगों का कहना था कि नियंत्रण रेखा पर शून्य रेखा से कुछ ही दूरी पर स्थित यह मंदिर जिले ही नहीं पूरे देश में हिंदू, मुस्लिम एवं सिख एकता एवं भाईचारे को मूर्तरूप देना वाला स्थान है। दो वर्षों से कोरोना के चलते मंदिर में यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन न किए जाने के बाद इस बार महामारी के कम होने के चलते यज्ञ एवं भंडारे का आयोजन किया गया। इसमें सर्व प्रथम मंदिर में चल रहे रामायण के अखंडपाठ का भोग डाला गया एवं विशेष पूजा की गई।
विज्ञापन
मंदिर समिति सदस्यों, सैन्य अधिकारी, उपायुक्त, डीएसपी आपरेशन आदि ने भाग लेते हुए पंडित नीरज शर्मा एवं अन्य की अगुवाई में अग्निदेव को आहुतियां अर्पित करते हुए विश्व शांति की प्रार्थना की।
विज्ञापन