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ओलों की तरह आसमान से बरस रहे थे गोले
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पुंछ। पाकिस्तानी सेना ने शुक्रवार की देर शाम से शनिवार तड़के तक हमारे गांव में ऐसे गोलाबारी की जैसे ओले बरसते हैं। यह तो खुदा का शुक्र है कि गोलाबारी में किसी की जान नहीं गई वरना पाकिस्तानियों ने तो हमें मारने की कोई कसर ही नहीं छोड़ी थी। पाकिस्तानी गोलाबारी में गांव के दर्जनों घरों को नुकसान पहुंचा है। यह कहना है भारत पाकिस्तान नियंत्रण रेखा पर बसे गांव शाहपुर निवासियों शबीर अहमद, वकार यूनिस, सैद मोहम्मद, सकीना बी आदि का।
लोगों का कहना था कि शुक्रवार की शाम पौने पांच बजे से लेकर शनिवार तड़के तक पाकिस्तानी सेना हमारे गांव को निशाना बना कर 120 एमएम के गोले दागे। इससे गांव के घरों की दीवारें, दरवाजे और टीन की बने छतें छलनी हो गई हैं। बड़ी संख्या में पेड़ कट कर गिर गए। पता नहीं हमारी जाने कैसे बच गईं, जबकि हमें अपने बचने की कोई आशा ही नहीं थी। गांव में गोले ऐसे गिर रहे थे, जैसे ओले पड़ रहे हों। उन्होंने बताया कि उनके गांव में कोई बंकर तक नहीं है। जो एक सामुदायिक बंकर बन कर तैयार है, उस तक पहुंचने का किसी को मौका तक नहीं मिला। कई बच्चे पाकिस्तानी गोलों के फटने से उठने वाले धमाकों के कारण बेहोश हो गए। गांव के अधिकतर लोगों को रात का खाना तक पकाने का मौका नहीं मिला। शबीर अहमद तक कहना है कि शुक्रवार की रात गोलाबारी में गांव में लगी बिजली के तार टूट कर जमीन पर गिर गए। उन्होंने कहा कि यह तो ऊपर वाले का शुक्र है कि रात को इलाके की बिजली सप्लाई पीछे से ही बंद कर दी गई थी। नहीं तो गोलाबारी के साथ बिजली की टूटे तारों से भी लोगों को जानी नुकसान हो सकता था।
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लोगों का कहना था कि शुक्रवार की शाम पौने पांच बजे से लेकर शनिवार तड़के तक पाकिस्तानी सेना हमारे गांव को निशाना बना कर 120 एमएम के गोले दागे। इससे गांव के घरों की दीवारें, दरवाजे और टीन की बने छतें छलनी हो गई हैं। बड़ी संख्या में पेड़ कट कर गिर गए। पता नहीं हमारी जाने कैसे बच गईं, जबकि हमें अपने बचने की कोई आशा ही नहीं थी। गांव में गोले ऐसे गिर रहे थे, जैसे ओले पड़ रहे हों। उन्होंने बताया कि उनके गांव में कोई बंकर तक नहीं है। जो एक सामुदायिक बंकर बन कर तैयार है, उस तक पहुंचने का किसी को मौका तक नहीं मिला। कई बच्चे पाकिस्तानी गोलों के फटने से उठने वाले धमाकों के कारण बेहोश हो गए। गांव के अधिकतर लोगों को रात का खाना तक पकाने का मौका नहीं मिला। शबीर अहमद तक कहना है कि शुक्रवार की रात गोलाबारी में गांव में लगी बिजली के तार टूट कर जमीन पर गिर गए। उन्होंने कहा कि यह तो ऊपर वाले का शुक्र है कि रात को इलाके की बिजली सप्लाई पीछे से ही बंद कर दी गई थी। नहीं तो गोलाबारी के साथ बिजली की टूटे तारों से भी लोगों को जानी नुकसान हो सकता था।
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