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पुंछ हादसा: हमारे ऊपर महिलाएं ऐसे गिरीं जैसे गोदाम में गेहूं की बोरियां, लगा था अब नहीं बचेंगे- घायल महिला
Fri, 14 Apr 2023 11:49 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ
अमर उजाला नेटवर्क, पुंछ
Published by: जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
Updated Fri, 14 Apr 2023 11:49 AM IST
सार
महिलाओं ने बताया कि वे पहले ही वहां बैठी थीं। तभी उन्हें ऐसा लगा कि नीचे से जमीन खिसक रही है। इससे पहले कि उन्हें कुछ समझ आता, सभी धड़ाम से पशुशाला में जा गिरीं और पलक झपकते ही उनके ऊपर कई और औरतें आ गिरीं।
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Poonch
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हमें ऐसा लगा था कि आज हम नहीं बचेंगी। हमारे ऊपर एक के बाद एक महिला ऐसे गिरी जैसे किसी गोदाम में एक गेहूं की बोरी खिसकने के बाद ऊपर से अन्य बोरियां गिरती हैं। यह कहना था पुंछ के गांव खनेतर में लेंटर गिरने से घायल सफीना, रजिया और शरीफा बेगम का, जो लेंटर गिरने पर सबसे नीचे गिरीं, और उनके ऊपर एक के बाद एक दर्जनों महिलाएं आ गिरीं और सभी घायल हो गईं।
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इन महिलाओं का कहना है कि वे पहले से ही लेंटर के एक कोने में बैठी हुई थीं। क्योंकि, सुबह से ही घर के सदस्य सभी को पशुशाला के लेंटर पर जमा होने से रोक रहे थे। क्योंकि, उनका कहना था कि लेंटर पुराना एवं कमजोर है। इसलिए, वे इसमें पशुओं को भी नहीं बांधते। इस पर ज्यादा भार नहीं डालना था। परिवार के सदस्यों की इस बात पर लोग सुबह से अमल भी कर रहे थे। परंतु जब रिफत का जनाजा निकला तो घर के अंदर और बाहर मौजूद दर्जनों महिलाएं जनाजा देखने एवं रिफत को अंतिम विदाई देने के लिए एक साथ तेजी से लेंटर पर आ चढ़ीं।
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महिलाओं ने बताया कि वे पहले ही वहां बैठी थीं। तभी उन्हें ऐसा लगा कि नीचे से जमीन खिसक रही है। इससे पहले कि उन्हें कुछ समझ आता, सभी धड़ाम से पशुशाला में जा गिरीं और पलक झपकते ही उनके ऊपर कई और औरतें आ गिरीं। कुछ पलों के लिए उन्हें लगा वे आज नहीं बचेंगी। उसके बाद वे बेहोश हो गईं। जब उन्हें होश आया तो अस्पताल में पड़ी हुई थीं। उन्होंने कहा कि खुदा का शुक्र है वे बच गईं, और अन्य औरतें भी बच गई। उधर, गांव की जामा मस्जिद के इमाम मोहम्मद माशूक अशरफी का कहना है कि बार-बार मना करने पर महिलाएं लेंटर पर जमा हो गईं, जिससे यह हादसा हुआ। लेकिन खुदा का शुक्र है कि लेंटर मात्र सात-आठ फुट ही ऊंचा था, जिसके कारण किसी का कोई ज्यादा नुकसान नहीं हुआ।
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