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गांव बायला के ग्रामीणों पी डब्लयू डी के खिलाफ किया प्रदर्शन,तारकोट बिछाने में नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप
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पुंछ। मंडी तहसील के गांव बायला के ग्रामीणों ने बुधवार को पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने गांव की सड़क पर शुरू किए गए तारकोल बिछाने के काम में गुणवत्ता और नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया। इस दौरान तारकोल बिछाने का काम बंद कराने की मांग की।
बुधवार दोपहर गांव बायला के ग्रामीण सड़क पर जहां से तारकोल बिछाने का काम शुरू किया गया है ,एकत्र हुए और पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तारकोल बिछाने का काम बंद कराने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 20 वर्षों के संघर्ष के बाद सरकार की तरफ से गांव की सड़क पर मात्र तीन किलोमीटर क्षेत्र में तारकोल बिछाने का काम मंजूर किया। हमने सरकार का आभार प्रकट किया। ऐसे में रात को ही ठेकेदार और विभाग के अधिकारी सड़क पर तारकोल बिछाने के लिए मशीन को लेकर पहुंच गए और सुबह सड़क पर बिछी मिट्टी पर ही तारकोल डालने का काम शुरू कर दिया। जोकि सड़क निर्माण के नियमों के खिलाफ है।
तारकोल बिछाने के पहले मिट्टी हटा कर कंकर बिछाया जाता है, लेकिन यहां मिट्टी पर ही कई सौ मीटर तक तारकोल बिछा दिया गया है। हम ऐसा काम नहीं होने देंगे। क्योंकि इस प्रकार यह सड़क तीन माह में ही टूट जाएगी। हमें अच्छी एवं गुणवत्ता वाली सड़क चाहिए, जिसके लिए हमने पहले 20 वर्ष संघर्ष किया। अब आगे 10 वर्ष और संघर्ष कर लेंगे, लेकिन ऐसी सड़क का काम हम नहीं होने देंगे।
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प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के साथ ही उपराज्यपाल से तारकोल बिछाने के काम की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग की।
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बुधवार दोपहर गांव बायला के ग्रामीण सड़क पर जहां से तारकोल बिछाने का काम शुरू किया गया है ,एकत्र हुए और पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी करते हुए तारकोल बिछाने का काम बंद कराने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि 20 वर्षों के संघर्ष के बाद सरकार की तरफ से गांव की सड़क पर मात्र तीन किलोमीटर क्षेत्र में तारकोल बिछाने का काम मंजूर किया। हमने सरकार का आभार प्रकट किया। ऐसे में रात को ही ठेकेदार और विभाग के अधिकारी सड़क पर तारकोल बिछाने के लिए मशीन को लेकर पहुंच गए और सुबह सड़क पर बिछी मिट्टी पर ही तारकोल डालने का काम शुरू कर दिया। जोकि सड़क निर्माण के नियमों के खिलाफ है।
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तारकोल बिछाने के पहले मिट्टी हटा कर कंकर बिछाया जाता है, लेकिन यहां मिट्टी पर ही कई सौ मीटर तक तारकोल बिछा दिया गया है। हम ऐसा काम नहीं होने देंगे। क्योंकि इस प्रकार यह सड़क तीन माह में ही टूट जाएगी। हमें अच्छी एवं गुणवत्ता वाली सड़क चाहिए, जिसके लिए हमने पहले 20 वर्ष संघर्ष किया। अब आगे 10 वर्ष और संघर्ष कर लेंगे, लेकिन ऐसी सड़क का काम हम नहीं होने देंगे।
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प्रदर्शनकारियों ने जिला प्रशासन के साथ ही उपराज्यपाल से तारकोल बिछाने के काम की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग की।