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नियंत्रण रेखा के सटे गांव पोलस निवासियों ने सड़क की मांग को लेकर किया प्रदर्शन
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पुंछ। जिले में भारत-पाकिस्तान नियंत्रण रेखा से सटे गुलपुर सेक्टर से सटे आखिरी गांव पोलस के ग्रामीणों ने शनिवार को गांव तक पक्की सड़क उपलब्ध न किए जाने को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने भाग लेते हुए नारेबाजी की। गांव के बुजुर्गों अब्दुल गनी और मोहम्मद शफीक ने आरोप लगाया कि 70 वर्ष से सेना के साथ देश की रक्षा में डटे होने के बावजूद हमें मूलभूत सुविधाएं विशेष कर सड़क सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
जबकि नियंत्रण रेखा के उस पार के पोलस क्षेत्र में शून्य रेखा तक उनके वाहन आते हैं तो हमें हमारी हुकूमतों ने आज तक सड़क सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं कराई हैै। सड़क न होने के कारण हमारे कई लोग पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल होने के बाद अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके हैं। कई लोग दिव्यांग हो गए हैं, क्योंकि हम उन्हें समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचा पाए हैं। हमें गांव में पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल होने वालों को कंधों पर उठा कर चार-पांच किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। देर सबेर वहां भी वाहन या एंबुलेंस तक नहीं मिलती हैं। ऐसे में अगर हमारे गांव तक पक्की सड़क का निर्माण करा दिया जाए तो हमें पाकिस्तानी गोलाबारी की भी कोई परवाह नहीं होगी। परंतु एक तो हमारे पास सड़क भी नहीं है और उस पार हर दिन होने वाली गोलाबारी से हमारा जीना मुहाल हो गया है।
अब्दुल गनी का कहना है कि गांव पोलस के तीन हिस्से पाकिस्तान के कब्जे में हैं और एक हिस्सा हमारे पास है। हमें इस बात का अफसोस है कि हमारा देश पाकिस्तान से विकास में बहुत आगे है, लेकिन जब उस पार से उनके वाहन हमारे गांव से कुछ सो मीटर की दूरी तक आते हैं। वहां तक पक्की सड़कें बनी हुई हैं। हमारे यहां वाहन आना तो दूर हमारा पैदल चल कर भी गांव से बाहर जान मुश्किल होता है। इसलिए हमारी मांग है कि गांव पोलस तक पक्की सड़क का जल्दी से निर्माण कराया जाए।
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जबकि नियंत्रण रेखा के उस पार के पोलस क्षेत्र में शून्य रेखा तक उनके वाहन आते हैं तो हमें हमारी हुकूमतों ने आज तक सड़क सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं कराई हैै। सड़क न होने के कारण हमारे कई लोग पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल होने के बाद अस्पताल पहुंचने से पहले ही दम तोड़ चुके हैं। कई लोग दिव्यांग हो गए हैं, क्योंकि हम उन्हें समय पर अस्पताल तक नहीं पहुंचा पाए हैं। हमें गांव में पाकिस्तानी गोलाबारी में घायल होने वालों को कंधों पर उठा कर चार-पांच किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है। देर सबेर वहां भी वाहन या एंबुलेंस तक नहीं मिलती हैं। ऐसे में अगर हमारे गांव तक पक्की सड़क का निर्माण करा दिया जाए तो हमें पाकिस्तानी गोलाबारी की भी कोई परवाह नहीं होगी। परंतु एक तो हमारे पास सड़क भी नहीं है और उस पार हर दिन होने वाली गोलाबारी से हमारा जीना मुहाल हो गया है।
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अब्दुल गनी का कहना है कि गांव पोलस के तीन हिस्से पाकिस्तान के कब्जे में हैं और एक हिस्सा हमारे पास है। हमें इस बात का अफसोस है कि हमारा देश पाकिस्तान से विकास में बहुत आगे है, लेकिन जब उस पार से उनके वाहन हमारे गांव से कुछ सो मीटर की दूरी तक आते हैं। वहां तक पक्की सड़कें बनी हुई हैं। हमारे यहां वाहन आना तो दूर हमारा पैदल चल कर भी गांव से बाहर जान मुश्किल होता है। इसलिए हमारी मांग है कि गांव पोलस तक पक्की सड़क का जल्दी से निर्माण कराया जाए।
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