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Poonch News: पुंछ में रक्षाबंधन पर रंग-बिरंगी पतंगों से सजा आसमान
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पतंगबाजी से दिन भर सुनाई देता रहा चल गई ओ का शोर
संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को पुंछ में लोगों ने जमकर पतंगबाजी की। जिसके चलते जहां आसमान रंग बिरंगी पतंगों से पटा रहा। वहीं दिन भर हर तरफ एक ही स्वर सुनाई देता रहा चल गई ओ, चल गई ओ।
युवाओं का कहना था कि इस बार बहुत अधिक पतंगबाजी हुई है, मौसम भी काफी अच्छा रहा। धूप भी बहुत कम थी और हवा भी अच्छी थी जिससे पतंगबाजी करने में मजा आ रहा था। वहीं पतंगों एवं डोर के कारोबार से जुटे दुकानदारों का कहना है कि गत वर्षों के मुकाबले इस बार काम धंधा काफी अच्छा चला है। युवाओं में एक बार फिर पतंग उढ़ाने का शौक बढ़ा है। जिससे दो दिनों में हमारे पास मौजूद अधिकतर पतंगें और डोर बिक गई हैं। अब जन्माष्टमी के लिए फिर से माल मंगवाना पडे़गा।
गौरतलब है कि पुंछ में रक्षा बंधन पर पतंगबाजी की प्राचीन परंपरा है। जो पिछले कुछ वर्षों में कम हो गई थी लेकिन पिछले एक दो वर्षों में फिर से पतंगबाजी बढ़ने लगी है। जिसके चलते शुक्रवार को भी सुबह सबेरे ही नगर में सभी समुदायों के बच्चों एवं युवाओं के साथ बुजुर्ग पतंगबाजी करने के लिए छतों पर चढ़ गए और देर शाम तक छतों पर पतंगबाजी करते रहे। इस दौरान जैसे ही कोई पतंग काटता तो सभी मिल कर शोर मचाते चल गई ओ।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पुंछ। रक्षाबंधन के अवसर पर शुक्रवार को पुंछ में लोगों ने जमकर पतंगबाजी की। जिसके चलते जहां आसमान रंग बिरंगी पतंगों से पटा रहा। वहीं दिन भर हर तरफ एक ही स्वर सुनाई देता रहा चल गई ओ, चल गई ओ।
युवाओं का कहना था कि इस बार बहुत अधिक पतंगबाजी हुई है, मौसम भी काफी अच्छा रहा। धूप भी बहुत कम थी और हवा भी अच्छी थी जिससे पतंगबाजी करने में मजा आ रहा था। वहीं पतंगों एवं डोर के कारोबार से जुटे दुकानदारों का कहना है कि गत वर्षों के मुकाबले इस बार काम धंधा काफी अच्छा चला है। युवाओं में एक बार फिर पतंग उढ़ाने का शौक बढ़ा है। जिससे दो दिनों में हमारे पास मौजूद अधिकतर पतंगें और डोर बिक गई हैं। अब जन्माष्टमी के लिए फिर से माल मंगवाना पडे़गा।
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गौरतलब है कि पुंछ में रक्षा बंधन पर पतंगबाजी की प्राचीन परंपरा है। जो पिछले कुछ वर्षों में कम हो गई थी लेकिन पिछले एक दो वर्षों में फिर से पतंगबाजी बढ़ने लगी है। जिसके चलते शुक्रवार को भी सुबह सबेरे ही नगर में सभी समुदायों के बच्चों एवं युवाओं के साथ बुजुर्ग पतंगबाजी करने के लिए छतों पर चढ़ गए और देर शाम तक छतों पर पतंगबाजी करते रहे। इस दौरान जैसे ही कोई पतंग काटता तो सभी मिल कर शोर मचाते चल गई ओ।
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