फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Poonch News ›   थोड़ी देर और रुकता, तो शायद वह नहीं बचता

थोड़ी देर और रुकता, तो शायद वह नहीं बचता

Wed, 04 Sep 2013 05:36 AM IST
Punch
Punch Updated Wed, 04 Sep 2013 05:36 AM IST
विज्ञापन
पाक गोलाबारी में घायल बालक के पिता ने सुनाई दास्तान
विज्ञापन

पुंछ। पशुओं के पास और थोड़ी देर रुकता, तो बकरियों के साथ मेरा बेटा भी मारा जाता। यह कहना है पुंछ जिले के शाहपुर किरनी सेक्टर के भारत-पाक नियंत्रण रेखा पर फैंसिंग के आगे बसे गांव काइयां मंधार निवासी मोहम्मद शरीफ का, जिसका 13 वर्षीय पुत्र मोहम्मद शौकत पाक सेना की गोलाबारी में गंभीर रूप से घायल हो गया।
मंगलवार की देर शाम को जिला अस्पताल में पुत्र को प्राथमिक उपचार के बाद जम्मू रेफर किए जाने के समय आपबीती सुनाते हुए मोहम्मद शरीफ ने कहा कि सुबह 9.45 बजे पाकिस्तानी सेना ने अचानक पूरे क्षेत्र में मशीन गनों और मोर्टारों से गोलाबारी शुरू कर दी। पाक सेना की गोलाबारी का भारतीय फौज ने भी जवाब देना शुरू किया, तो ऐसा लगा जैसे हिंदुस्तान-पाकिस्तान के बीच जंग शुरू हो गई हो। हम लोग दिन भर घरों में ही बंद रहे। करीब चार बजे अचानक जब हमारे गांव में गोले गिरने लगे, तो शौकत बाहर निकली भेड़ बकरियों को एकत्र कर गोलाबारी से बचाने के लिए उन्हें बांधने दौड़ा। सभी भेड़ बकरियाें को वहां बंद कर जैसे ही कमरे की तरफ मुड़ा कि पाक सेना द्वारा दागा एक गोला पशुओं के बाड़े के पास आ कर फटा। उसके टुकडे़ शौकत को लगे। वह गंभीर घायल हो गिर पड़ा। बड़ी मुश्किल से घसीट कर उसे कमरे में पहुंचाया। शुक्र है खुदा का कि मेरा बच्चा बच गया। अगर वह पांच मिनट और पशुओं के साथ रुकता, तो मेरी दस बकरियों के साथ शायद वह भी मारा जाता।
विज्ञापन

दो घंटे तक घर में करते रहे मरहम-पट्टी
शरीफ का कहना है करीब दो घंटों तक कपडे़ से उसकी पट्टियां की। शरीर से बहते हुए खून को बंद करने का प्रयास करते रहे। गांव में इस प्रकार गोलाबारी हो रही थी, जैसे दिवाली पर आतिशबाजी की आवाज होती है। फिर दो घंटों बाद गोलाबारी के बीच पुंछ पुलिस के डीएसपी जावेद नाज पहुंचे। शौकत को गांव से सड़क तक लाया। फिर वहां से जिला अस्पताल पहुंचाया।
विज्ञापन
विज्ञापन

शुक्र है खुदा का, मेरा बेटा बच गया
अब उम्मीद है कि मेरा बेटा बच जाएगा। शरीफ का कहना है कि घायल बेटे के साथ जो दो घंटे हमने बिना उपचार के घर में बिताए, वह हमारे लिए मर-मर के जीने के बराबर थे, क्योंकि घायल बेटे को गोद में तड़पता देखकर हमारे प्राण निकल रहे थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed